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बंद रहे निजी अस्पताल, मरीजों ने झेली परेशानी
ब्यूरो/अमर उजाला झज्जर
Updated Mon, 08 Feb 2016 12:35 AM IST
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धनखड़ नर्सिंग होम के खिलाफ स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई के विरोध
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में रविवार को शहर के निज अस्पताल एवं नर्सिंग होम बंद रखे गए। डॉक्टरों के
दोनों प्रमुख संगठनों आईएमए और नीमा ने बंद का आह्वान किया था। डॉक्टरों
ने कहा है कि जब कोई मरीज ही नहीं था तो फिर एमटीपी कानून में केस कैसा।
डॉक्टरों ने कहा है कि या तो मामले की निष्पक्ष जांच हो नहीं तो मामले को प्रदेश स्तर पर ले जाया जाएगा। डॉक्टरों ने सरकार के साथ स्वास्थ्य विभाग पर भी हमला बोला। कहा कि लोगों की चिकित्सा करें या फिर मुकदमे भुगतते रहे। रविवार को झज्जर के साथ बेरी व दुजाना में भी निजी नर्सिंग होम व अस्पतालों में डाक्टरों ने मरीजों को अटेंड नहीं किया। जिले में आईएमए के 50 ओर नीमा के 15 सदस्य डॉक्टर हैं।
रविवार को ये सभी हड़ताल पर रहे। एकाध अस्पतालों में इमरजेंसी के कुछ मरीजों को तो अटेंड किया गया, लेकिन अन्य मरीजों को बिना उपचार के ही लौटाया गया। मौसम में बदलाव के चलते बीमार पड़े लोगों को डॉक्टरों की हड़ताल से परेशानी झेलनी पड़ी।
स्वास्थ्य विभाग कटघरे में
नीमा के जिला प्रधान डॉ. रविंद्र मलिक, महासचिव डॉ. राकेश गर्ग और प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य डॉ. नरेश दलाल ने पत्रकारवार्ता में स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई को कटघरे में खड़ा किया।
उन्होंने कहा कि 15 दिन पहले स्वास्थ्य विभाग के एक आला अधिकारी ने स्थानीय अधिकारियों पर प्रेशर डाला था कि वे पीएनडीटी में कुछ क्यों नहीं कर रहे। गलत सूचना पर स्वास्थ्य विभाग की टीम धनखड़ नर्सिंग होम में घुसी और डाक्टर को झूठे केस में फंसा दिया।
टीम छापेमारी के लिए जहां घुसती है मानसिकता होती है कि डॉक्टर को फंसाना है। इस मामले में भी यही हुआ है। डॉक्टर इसकी निंदा करते हैं। उन्होंने कहा कि नए नए एक्ट आ रहे हैं, ऐसे में मरीजों का उपचार करना ही मुश्किल होता जा रहा है।
डॉक्टर मरीज का इलाज करें या फिर झूठे मामलों में अदालतों के चक्र काटते रहें। जिस किट के धनखड़ नर्सिंग होम में मिलने की बात कही गई है, उसका प्रयोग तो कॉपर टी लगाने में भी होता है। मौके पर जब कोई मरीज ही नहीं था तो कार्रवाई कैसी।
सरकार पर भी हमला
डॉक्टरों ने कहा कि सरकार कितने सालों से पीएनडीटी एक्ट के तहत अस्पतालों में छापेमारी कर रही है, लेकिन लिंगानुपात कंट्रोल नहीं आ रहा है।
असल में सरकार लिंगानुपात का सारा लाठा डॉक्टरों के सिर फोड़ रही है। सरकार की कोई नीति सही नहीं है और न ही नियत सही है। सिर्फ डाक्टरों पर तलवार चल रही हे जबकि जिम्मेदार आम व्यक्ति के साथ सरकार भी है। सरकार की योजनाओं का प्रचार ज्यादा हो रहा है, जबकि धरातल पर कोई काम नहीं हो रहा है।
ये था मामला
सिविल सर्जन डॉ. ईश्वर सिंह के निर्देश पर वीरवार को पीएनडीटी के नोडल अधिकारी एवं उप सिविल सर्जन डॉ. राकेश कुमार के नेतृत्व में उप सिविल सर्जन डॉ. राजकरण, डॉ.विनीत, डॉ. रुचिका, डॉ. ए कमल, ड्रग कंट्रोलर विजयराजे ने संयुक्त रूप से झज्जर शहर के बस स्टैंड के समीप धनखड़ नर्सिंग होम पर छापा मारा।
छापे में नर्सिंग होम में रखे कूड़ेदान में प्रयोग की गई एमटी किट व नर्सिंग होम में अन्य प्रतिबंधित दवाएं बरामद हुई थी। उक्त नर्सिंग होम इस प्रकार की प्रतिबंधित दवाएं रखने के लिए रजिस्टर्ड नहीं था और जांच के दौरान प्रयोग की गई दवाएं भी कूड़ेदान में मिली।
फोटो-14 व 15
डॉक्टरों ने कहा है कि या तो मामले की निष्पक्ष जांच हो नहीं तो मामले को प्रदेश स्तर पर ले जाया जाएगा। डॉक्टरों ने सरकार के साथ स्वास्थ्य विभाग पर भी हमला बोला। कहा कि लोगों की चिकित्सा करें या फिर मुकदमे भुगतते रहे। रविवार को झज्जर के साथ बेरी व दुजाना में भी निजी नर्सिंग होम व अस्पतालों में डाक्टरों ने मरीजों को अटेंड नहीं किया। जिले में आईएमए के 50 ओर नीमा के 15 सदस्य डॉक्टर हैं।
रविवार को ये सभी हड़ताल पर रहे। एकाध अस्पतालों में इमरजेंसी के कुछ मरीजों को तो अटेंड किया गया, लेकिन अन्य मरीजों को बिना उपचार के ही लौटाया गया। मौसम में बदलाव के चलते बीमार पड़े लोगों को डॉक्टरों की हड़ताल से परेशानी झेलनी पड़ी।
स्वास्थ्य विभाग कटघरे में
नीमा के जिला प्रधान डॉ. रविंद्र मलिक, महासचिव डॉ. राकेश गर्ग और प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य डॉ. नरेश दलाल ने पत्रकारवार्ता में स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई को कटघरे में खड़ा किया।
उन्होंने कहा कि 15 दिन पहले स्वास्थ्य विभाग के एक आला अधिकारी ने स्थानीय अधिकारियों पर प्रेशर डाला था कि वे पीएनडीटी में कुछ क्यों नहीं कर रहे। गलत सूचना पर स्वास्थ्य विभाग की टीम धनखड़ नर्सिंग होम में घुसी और डाक्टर को झूठे केस में फंसा दिया।
टीम छापेमारी के लिए जहां घुसती है मानसिकता होती है कि डॉक्टर को फंसाना है। इस मामले में भी यही हुआ है। डॉक्टर इसकी निंदा करते हैं। उन्होंने कहा कि नए नए एक्ट आ रहे हैं, ऐसे में मरीजों का उपचार करना ही मुश्किल होता जा रहा है।
डॉक्टर मरीज का इलाज करें या फिर झूठे मामलों में अदालतों के चक्र काटते रहें। जिस किट के धनखड़ नर्सिंग होम में मिलने की बात कही गई है, उसका प्रयोग तो कॉपर टी लगाने में भी होता है। मौके पर जब कोई मरीज ही नहीं था तो कार्रवाई कैसी।
सरकार पर भी हमला
डॉक्टरों ने कहा कि सरकार कितने सालों से पीएनडीटी एक्ट के तहत अस्पतालों में छापेमारी कर रही है, लेकिन लिंगानुपात कंट्रोल नहीं आ रहा है।
असल में सरकार लिंगानुपात का सारा लाठा डॉक्टरों के सिर फोड़ रही है। सरकार की कोई नीति सही नहीं है और न ही नियत सही है। सिर्फ डाक्टरों पर तलवार चल रही हे जबकि जिम्मेदार आम व्यक्ति के साथ सरकार भी है। सरकार की योजनाओं का प्रचार ज्यादा हो रहा है, जबकि धरातल पर कोई काम नहीं हो रहा है।
ये था मामला
सिविल सर्जन डॉ. ईश्वर सिंह के निर्देश पर वीरवार को पीएनडीटी के नोडल अधिकारी एवं उप सिविल सर्जन डॉ. राकेश कुमार के नेतृत्व में उप सिविल सर्जन डॉ. राजकरण, डॉ.विनीत, डॉ. रुचिका, डॉ. ए कमल, ड्रग कंट्रोलर विजयराजे ने संयुक्त रूप से झज्जर शहर के बस स्टैंड के समीप धनखड़ नर्सिंग होम पर छापा मारा।
छापे में नर्सिंग होम में रखे कूड़ेदान में प्रयोग की गई एमटी किट व नर्सिंग होम में अन्य प्रतिबंधित दवाएं बरामद हुई थी। उक्त नर्सिंग होम इस प्रकार की प्रतिबंधित दवाएं रखने के लिए रजिस्टर्ड नहीं था और जांच के दौरान प्रयोग की गई दवाएं भी कूड़ेदान में मिली।
फोटो-14 व 15