फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Jhajjar/Bahadurgarh News ›   Pollution decreased as wind speed increased

Jhajjar-Bahadurgarh News: हवा की रफ्तार बढ़ते ही कम हुआ प्रदूषण

Sun, 19 Nov 2023 01:24 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़ Updated Sun, 19 Nov 2023 01:24 AM IST
विज्ञापन
Pollution decreased as wind speed increased
बहादुरगढ़। शुक्रवार को प्रदूषण का स्तर 400 को पार कर गया था लेकिन शुक्रवार देर रात 14 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चली हवाओं ने प्रदूषण का स्तर 140 अंक कम करके 263 पर ला दिया। इससे लोगों को कुछ राहत मिली है।
विज्ञापन

शनिवार को शाम 4 बजकर 5 मिनट पर तक एक्यूआई 263 दर्ज किया गया। हालांकि अभी भी यह हवा सांस लेने लायक नहीं है। हल्की राहत जरूर रही। मौसम विभाग के अधिकारियों का कहना है कि अभी दो दिनों तक एक्यूआई इसी स्तर बना रहेगा। इसके बाद फिर से बढ़ने की आशंका है। हालांकि चिकित्सकों ने अभी भी इस खराब मौसम में अस्थमा और सांस के मरीजों को घर से बाहर न निकलने की सलाह दी है। उन्हें सावधान रहने की जरूरत है। बहादुरगढ़ में शनिवार को पीएम 2.5 का उच्चतम स्तर 347, न्यूनतम 106 और औसत 263 रही। जबकि पीएम 10 का उच्चतम स्तर 373, न्यूनतम 108 व औसत 184 दर्ज की गई। एनओ 2 का उच्चतम स्तर 38, न्यूनतम 34 और औसत 36, एनएच3 का उच्चतम स्तर 12, न्यूनतम 11 और औसत 11 पर रहा। एसओ2 का अधिकतम स्तर 14, न्यूनतम 7 और औसत 10, सीओ का उच्चतम स्तर 103, न्यूनतम 90 और औसत 94 दर्ज की गई। वहीं ओजोन का अधिकतम स्तर 69 पर रहा। जबकि न्यूनतम 56 और औसत 59 पर रही।
विज्ञापन



कौन सा प्रदूषण कितना नुकसान पहुंचाता है, डॉक्टर के अनुसार

पीएम10 : यह दस माइक्रोमीटर साइज तक के कण हैं। जब इनका स्तर अधिक हो जाता है तो इनकी वजह से लोगों को एलर्जी, सिरदर्द, सांस लेने में परेशानी, अस्थमा, आंखों में जलन, सूजन जैसी समस्याएं होती हैं। आमतौर पर सांस के साथ नाक इन्हें अंदर जाने से रोक लेती है।
विज्ञापन
विज्ञापन




पीएम 2.5 : 2.5 माइक्रोमीटर साइज तक के ये कण सांस के साथ शरीर में चले जाते हैं और अंगों को प्रभावित करते हैं। इससे जकड़न, चक्कर आना, थकावट, चिड़चिड़ापन जैसी समस्या भी हो सकती है। इससे बच्चों का विकास प्रभावित होता है।



एसओ2 : हवा में सल्फर डायऑक्साइड का स्तर बढ़ने से फेफड़ों का फंक्शन प्रभावित हो सकता है। आंखों में जलने और लाली के साथ कफ म्यूकस होने का खतरा रहता है। अस्थमा का खतरा भी बढ़ जाता है।



एनओ2 : यह गाड़ियों और इंडस्ट्रियों के धुएं से निकलता है। इसकी वजह से व्यक्ति के दिल पर असर होता है। बच्चों के फेफड़े कम काम करने लगते हैं, सांस संबंधित समस्या होती है।



एनएच3 : आम बोलचाल में इसे अमोनिया कहा जाता है। इसका स्तर हवा में बढ़ने से व्यक्ति को आंखों व गले में जलन का अहसास होता है। गले के अंदरुनी हिस्से में सूजन की समस्या हो सकती है। सांस की नली में सूजन आ सकती है।




ओजोन : ओजोन का स्तर बढ़ने से कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं। इनमें छाती का दर्द, कफ, गले में खराश, छाती में जकड़न जैसी समस्या शामिल हैं।



सीओ : हवा में इस जहरीली गैस का स्तर बढ़ने से व्यक्ति को सिरदर्द, बेहोशी, कमजोरी, पेट से जुड़ी समस्या, उल्टी, छाती दर्द और भ्रम की समस्या भी हो सकती है।

-डॉ. मनीष शर्मा, निदेशक, ब्रह्मशक्ति संजीवनी अस्पताल बहादुरगढ़।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed