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‘दादी का घाघरा’ हास्य रचना सुन श्रोता लोटपोट
ब्ययूराो/अमर उजाला / झज्जजर
Updated Tue, 02 Feb 2016 02:01 AM IST
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जन उद्बोधन समिति द्वारा खरमाण रोड स्थित सीएसएम सीनियर सेकेंडरी स्कूल दुल्हेड़ा में आयोजित विराट हास्य कवि सम्मेलन में दिल्ली और हरियाणा के जाने-माने कवियों ने श्रोताओं को भाव विभोर कर दिया।
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क्षेत्र के प्रसिद्ध संस्कृत विद्वान पंडित आजाद शास्त्री के सानिध्य में हुए इस कार्यक्रम का शुभारंभ गांव के सरपंच संजय सांगवान द्वारा किए गए दीप प्रज्ज्वलन व कुमारी रश्मि द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना से हुआ। तीन घंटे चले काव्योत्सव का मंच संचालन फरीदाबाद से आए कवि दीपक गुप्ता ने किया।
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गुड़गांव के युवा शिक्षाविद सुंदर कटारिया की चुटीली कविताओं से शुरू हुए इस कवि सम्मेलन में जहां झज्जर के चर्चित हास्य कवि मास्टर महेन्द्र ने अपनी हरियाणवी हास्य रचनाओं ..दादी का घाघरा.. और ..बनवारी का रक्षाबंधन.. से श्रोताओं को खूब लोटपोट किया, वहीं नजफगढ़ दिल्ली के युवा गज़लकार राजीव पाराशर ने भी अपनी शायरी से सभी को मंत्रमुग्ध किया।
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उनके इस शेर को सर्वाधिक पसंद किया गया...मैं सच कहता हूं सीने में अगर ये दिल नहीं होता, न होता इश्क और मेरा कोई कातिल नहीं होता। नांगलोई से पधारे ओज के जाने-माने हस्ताक्षर जयसिंह आर्य ने देशप्रेम से ओतप्रोत कई गीत सुनाए।
इस ग्रामीण अंचल में पहली बार हुए इस साहित्यिक आयोजन के सूत्रधार रहे युवा कवि शिव पाराशर ने श्रृंगार रस की गज़लों व मुक्तकों पर आधारित अपने काव्यपाठ के दौरान खूब तालियां बटोरीं।
उनकी इन पंक्तियों को सभी ने जमकर सराहा- ...जहां तक ये नजर जाए वहां तक तुम नजर आओ, खुला रखता हूं दरवाजा कभी मेरे भी घर आओ, न हसरत चांद तारों की न चाहत आसमां की है, लगेगा चांद भी फीका अगर जो तुम संवर आओ।
आशुकवि कृष्ण गोपाल विद्यार्थी ने अपनी रोचक टिप्पणियों से श्रोताओं का भरपूर मनोरंजन करने के अलावा अपनी कुछ प्रतिनिधि रचनाएं भी सुनाईं। उन्होंने कहा- ...दुश्मन है कहीं फिरंगी सा, पहचान सको तो पहचानो। मत लड़ो तिरंगे के रंगो, मत लड़ो देश के दीवानों।
पाश्चात्य संस्कृति के अनुकरण के चलते अपनी गौरवशाली भारतीय संस्कृति को तिलांजलि दे रहे युवाओं को जागरण का संदेश देती पंडित आजाद शास्त्री की रचनाओं ने सभी को भीतर तक झकझोर दिया।
कवि सम्मेलन का समापन दीपक गुप्ता की साहित्यिक रचनाओं से हुआ। कार्यक्रम के दौरान आमंत्रित कवियों सहित आयोजन में सहयोगी रहे संस्थानों के प्रतिनिधियों को सम्मानित भी किया गया। जन उद्बोधन समिति के अध्यक्ष सुमित कुमार के संबोधन के साथ इस काव्योत्सव का विधिवत समापन हुआ।