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बेकार पड़े बिजली के तारों से बनाई पीएम, सीएम की तस्वीर और अन्य आकर्षक पेंटिंग
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आर्ट एंड क्राफ्ट मेले में युवाओं को वेस्ट से बेस्ट बनाना सिखाते उदित नारायण बैंसला।
- फोटो : Bahadurgarh
शहर के रेलवे रोड पर देवकरण धर्मशाला में आयोजित हस्त एवं शिल्पकला की प्रदर्शनी कला प्रेमियों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। बिजली की बेकार तारों से फरीदाबाद के एक शिल्पकार उदित नारायण बैंसला ने रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री मनोहर लाल और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की आकर्षक पेंटिंग बनाकर सबको आश्चर्यचकित कर दिया है। बैंसला का कहना है कि बेकार बिजली की तारें, प्लास्टिक टेप और लोशन के इस्तेमाल से आकर्षित पेंटिंग भी बनाई जा सकती है। उदित नारायण अब तक 5 हजार से ज्यादा पेंटिंग बना चुके हैं।
फरीदाबाद के गांव एतमादपुर निवासी उदित नारायण बैंसला ने अमर उजाला से बातचीत में कहा कि घर में खराब पड़ी रहने वाली बिजली की तारों से अनेक तरह की आकर्षक पेंटिंग बनाकर वे पर्यावरण सरंक्षण का संदेश दे रहे हैं और बेकार चीजों का उपयोग भी कर रहे हैं। शिल्पकार उदित नारायण बैंसला की कलाकारी भी लोगों को खूब भा रही है, बैंसला ने घरों में बेकार पड़ी हुई बिजली की तारों से आकर्षित करने वाली पेंटिंग बनाकर लोगों को हैरत में डाल दिया है।
शिल्पकार उदित नारायण ने बताया कि उनके मन में स्वच्छ भारत को लेकर कुछ करने की चाह थी। जगह-जगह बिखरी बिजली की तारों तथा प्लास्टिक टेप देखकर उनके मन में विचार आया कि पर्यावरण संरक्षण के लिए कुछ करना चाहिए। उन्होंने इन तारों को इकट्ठा कर पेंटिंग बनाना शुरू कर दिया। बाद में जब इसकी सराहना होने लगी तो उनका हौसला बढ़ गया।
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ऐसे बनाते है पेंटिंग
उदित नारायण ने बताया कि वे पहले लकड़ी के बोर्ड पर पेंसिल से डिजाइन तैयार करते हैं। फिर इसके बाद बिजली की बारीक तारों को बोर्ड में सेट कर देते हैं। पहले पेंसिल से स्केच तैयार किया जाता है। उसके बाद बिजली की तारों को व्यवस्थित तरीके से सजाया जाता है। इस काम में लोशन और प्लास्टिक टेप का प्रयोग करते हैं। बोर्ड पर पेड़-पौधों की पेंटिंग भी की जाती है। साथ ही स्वच्छता अभियान का भी संदेश दिया जाता है।
बचपन से रहा है चित्रकारी का शौक
उदित नारायण ने बताया कि वे इन पेंटिंगों में न तो रंग का प्रयोग करते हैं और न ही किसी प्रकार के मेटेरियल का। उदित नारायण ने बताया कि प्लास्टिक रिसाइकिल करना एक वैश्विक समस्या है। उन्हें बचपन से चित्रकारी का शौक था तो कैनवास में रंगों की जगह प्लास्टिक के तार, चाइनीज लड़ियां, हेडफोन आदि का इस्तेमाल करने लगे। अब तक करीब पांच हजार पेंटिग बना चुके हैं। इसमें कई किलो प्लास्टिक वेस्ट का भी इस्तेमाल भी कर चुके हैं। लोग प्लास्टिक की बेकार वस्तुएं तार, लड़ियां, हेडफोन, चार्जर, कंप्यूटर लीड आदि को फेंक देते हैं। उदित ने दावा किया कि ये पेंटिंग हजारों साल टिकी भी रहेगी। उनका कहना है कि वे बच्चों को भी घर में पड़े वेस्ट से बेस्ट बनाना सिखाते हैं। यह प्रदर्शनी 25 मार्च तक चलेगी।
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फरीदाबाद के गांव एतमादपुर निवासी उदित नारायण बैंसला ने अमर उजाला से बातचीत में कहा कि घर में खराब पड़ी रहने वाली बिजली की तारों से अनेक तरह की आकर्षक पेंटिंग बनाकर वे पर्यावरण सरंक्षण का संदेश दे रहे हैं और बेकार चीजों का उपयोग भी कर रहे हैं। शिल्पकार उदित नारायण बैंसला की कलाकारी भी लोगों को खूब भा रही है, बैंसला ने घरों में बेकार पड़ी हुई बिजली की तारों से आकर्षित करने वाली पेंटिंग बनाकर लोगों को हैरत में डाल दिया है।
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शिल्पकार उदित नारायण ने बताया कि उनके मन में स्वच्छ भारत को लेकर कुछ करने की चाह थी। जगह-जगह बिखरी बिजली की तारों तथा प्लास्टिक टेप देखकर उनके मन में विचार आया कि पर्यावरण संरक्षण के लिए कुछ करना चाहिए। उन्होंने इन तारों को इकट्ठा कर पेंटिंग बनाना शुरू कर दिया। बाद में जब इसकी सराहना होने लगी तो उनका हौसला बढ़ गया।
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ऐसे बनाते है पेंटिंग
उदित नारायण ने बताया कि वे पहले लकड़ी के बोर्ड पर पेंसिल से डिजाइन तैयार करते हैं। फिर इसके बाद बिजली की बारीक तारों को बोर्ड में सेट कर देते हैं। पहले पेंसिल से स्केच तैयार किया जाता है। उसके बाद बिजली की तारों को व्यवस्थित तरीके से सजाया जाता है। इस काम में लोशन और प्लास्टिक टेप का प्रयोग करते हैं। बोर्ड पर पेड़-पौधों की पेंटिंग भी की जाती है। साथ ही स्वच्छता अभियान का भी संदेश दिया जाता है।
बचपन से रहा है चित्रकारी का शौक
उदित नारायण ने बताया कि वे इन पेंटिंगों में न तो रंग का प्रयोग करते हैं और न ही किसी प्रकार के मेटेरियल का। उदित नारायण ने बताया कि प्लास्टिक रिसाइकिल करना एक वैश्विक समस्या है। उन्हें बचपन से चित्रकारी का शौक था तो कैनवास में रंगों की जगह प्लास्टिक के तार, चाइनीज लड़ियां, हेडफोन आदि का इस्तेमाल करने लगे। अब तक करीब पांच हजार पेंटिग बना चुके हैं। इसमें कई किलो प्लास्टिक वेस्ट का भी इस्तेमाल भी कर चुके हैं। लोग प्लास्टिक की बेकार वस्तुएं तार, लड़ियां, हेडफोन, चार्जर, कंप्यूटर लीड आदि को फेंक देते हैं। उदित ने दावा किया कि ये पेंटिंग हजारों साल टिकी भी रहेगी। उनका कहना है कि वे बच्चों को भी घर में पड़े वेस्ट से बेस्ट बनाना सिखाते हैं। यह प्रदर्शनी 25 मार्च तक चलेगी।