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Jhajjar-Bahadurgarh News: उचाना में बंदर, कुत्तों के आतंक से लोग परेशान
Thu, 17 Oct 2024 02:32 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
Updated Thu, 17 Oct 2024 02:32 AM IST
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नागरिक अस्पताल में कुत्ते के काटे मरीज को इंजेक्शन लगाते हुए।
उचाना। उचाना में बंदरों, कुत्तों का आंतक बढ़ रहा है। अस्पताल में बंदर और कुत्ते के काटने के पीड़ित रोज नागरिक 10 से 12 मरीज रेबीज के टीके लगवाने आते हैं।
कुछ दिनों से मरीजों की संख्या बढ़ रही है। घसो कलां गांव निवासी अनिल, पालवां अरमान ने बताया कि उनको कुत्ते ने काटा है। गांव में कुत्तों की तादाद बढ़ रही है। गलियों में कुत्तों के झूंड आने-जाने वालों को काटते है। बंदरों की संख्या शहर के बाद गांव में भी बढ़ रही है। प्राइवेट अस्पताल में इंजेक्शन लगवाया जाए तो वहां 400 रुपए प्रति इंजेक्शन के आस-पास देना पड़ता है।
डॉ. योगेश ने बताया कि बंदर, कुत्ते के काटने पर रेबिज का इंजेक्शन लगवाना जरूरी होता है। मरीज को पांच इंजेक्शन लगते है। बीपीएल, आयुष्मान कार्ड वाले को मुफ्त इंजेक्शन लगता है तो अन्य मरीज को 100 रुपये प्रति इंजेक्शन देने पड़ते है। रेबिज गंभीर बीमारी है। कुत्ते, बिल्ली, बंदर के काटने से ये फैलती है। काफी समय पहले इनके काटने पर 14 इंजेक्शन लगते थे लेकिन समय के साथ अब हुए बदलाव से सरकार की नए नियमों के हिसाब से चार इंजेक्शन लगाए जाते है। तीन से चार कैटेगरी होती है। नागरिक अस्पताल में रेबिज इंजेक्शन उपलब्ध है। बंदर, कुत्ते के काटने के बाद 24 घंटे के अंदर-अंदर इंजेक्शन लगना जरूरी होता है। कुछ समय से मरीज बढ़ है। हर रोज 10 से 12 मरीज आते है।
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कुछ दिनों से मरीजों की संख्या बढ़ रही है। घसो कलां गांव निवासी अनिल, पालवां अरमान ने बताया कि उनको कुत्ते ने काटा है। गांव में कुत्तों की तादाद बढ़ रही है। गलियों में कुत्तों के झूंड आने-जाने वालों को काटते है। बंदरों की संख्या शहर के बाद गांव में भी बढ़ रही है। प्राइवेट अस्पताल में इंजेक्शन लगवाया जाए तो वहां 400 रुपए प्रति इंजेक्शन के आस-पास देना पड़ता है।
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डॉ. योगेश ने बताया कि बंदर, कुत्ते के काटने पर रेबिज का इंजेक्शन लगवाना जरूरी होता है। मरीज को पांच इंजेक्शन लगते है। बीपीएल, आयुष्मान कार्ड वाले को मुफ्त इंजेक्शन लगता है तो अन्य मरीज को 100 रुपये प्रति इंजेक्शन देने पड़ते है। रेबिज गंभीर बीमारी है। कुत्ते, बिल्ली, बंदर के काटने से ये फैलती है। काफी समय पहले इनके काटने पर 14 इंजेक्शन लगते थे लेकिन समय के साथ अब हुए बदलाव से सरकार की नए नियमों के हिसाब से चार इंजेक्शन लगाए जाते है। तीन से चार कैटेगरी होती है। नागरिक अस्पताल में रेबिज इंजेक्शन उपलब्ध है। बंदर, कुत्ते के काटने के बाद 24 घंटे के अंदर-अंदर इंजेक्शन लगना जरूरी होता है। कुछ समय से मरीज बढ़ है। हर रोज 10 से 12 मरीज आते है।
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