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अव्यवस्था की मारः रैन बसेरों पर लटका ताला, मुसाफिर बिता रहे ठंड में रात
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बस स्टैंड में रैन बसेरे के सामने खड़े प्रवासी श्रमिक। संवाद
- फोटो : Jhjhar
झज्जर। शहर में रात में मुसाफिरों को रोकने के लिए दो रैन बसेरे बनाए गए हैं। लेकिन इन पर ताले लटके हुए हैं। जिम्मेदार अधिकारी व कर्मचारी अपने घरों में ठंड के मौसम में रात बिता रहे हैं। जबकि कड़ाके की ठंड में 6 डिग्री सेल्सियस तापमान के बीच प्रवासी मजदूर रैन बसेरा होने के बावजूद भी ठंड में रात बिताने को मजबूर हैं।
जिले में एक रैन बसेरा जिला रेडक्रॉस सोसाइटी के कार्यालय में बनाया गया है, जबकि दूसरा हरियाणा व झज्जर जिले के सबसे बड़े बस स्टैंड में बनाया गया है। लेकिन जिला रेडक्रॉस सोसाइटी के अधिकारियों की लापरवाही के चलते नए बस स्टैंड का रैन बसेरा अभी तक खोला नहीं गया है, उस पर ताला लगा हुआ है। जब किसी कारण वश कोई मुसाफिर बस स्टैंड पर बस ने मिलने पर वहां पर मजबूरन बस रुकना पड़ता है और वह रैन बसेरे पर ताला जड़ा देखता है तो अपने मन में कोसता है और अपनी रात काटने के लिए बस स्टैंड में इधर-उधर जगह ढूंढता रहता है। मंगलवार रात को भी इसी तरह का नजारा शहर के नए बस स्टैंड पर देखने को मिला। यहां झारखंड से आए 7 प्रवासी मजदूर अपनी रात काटने के लिए बस स्टैंड में जगह ढूंढते दिखे। उन्हें मजबूरन बस एक टिकट काटने वाली खिड़की में जगह मिली और जो अपने साथ गर्म कपड़े लिए हुए थे। वे अपने हाथ पैर व मुंह पर ढक कर सोने की तैयारी में थे, लेकिन कड़ाके की सर्दी के कारण उनके हाथ पैर ठंड के कारण बुरी तरह से कांप रहे थे। एक छोटी सी मदद की तलाश में लेकिन रेडक्रॉस के अधिकारियों की लापरवाही के चलते न जाने कितने ही प्रवासी मजदूरों ने अपनी रात ठंड में गुजारी होगी। आलम यह है कि जब करीबन 09: 45 बजे जिला रेडक्रास अधिकारी प्रदीप हुड्डा से बात करनी चाहिए तो उन्होंने फोन नहीं उठाया इस बात से यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि रेडक्रॉस के अधिकारी रैन बसेरों में आने वाले लोगों के प्रति कितने जागरूक हैं। वहीं अगर रेड क्रॉस में स्थित रैन बसेरा की बात की जाए तो उन पर भी ताले जड़े हुए थे। झारखंड के प्रवासी मजदूर चरखी दादरी जा रहे थे।
किसान आंदोलन में ड्यूटी के चलते बस स्टैंड के रैन बसेरे को चालू नहीं करवा पाए थे। बुधवार को सुबह उसमें साफ सफाई करवा कर चालू करवा दिया जाएगा।
- दीपक कुमार हेल्थ एजुकेटर, जिला रेडक्रॉस सोसायटी, झज्जर।
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जिले में एक रैन बसेरा जिला रेडक्रॉस सोसाइटी के कार्यालय में बनाया गया है, जबकि दूसरा हरियाणा व झज्जर जिले के सबसे बड़े बस स्टैंड में बनाया गया है। लेकिन जिला रेडक्रॉस सोसाइटी के अधिकारियों की लापरवाही के चलते नए बस स्टैंड का रैन बसेरा अभी तक खोला नहीं गया है, उस पर ताला लगा हुआ है। जब किसी कारण वश कोई मुसाफिर बस स्टैंड पर बस ने मिलने पर वहां पर मजबूरन बस रुकना पड़ता है और वह रैन बसेरे पर ताला जड़ा देखता है तो अपने मन में कोसता है और अपनी रात काटने के लिए बस स्टैंड में इधर-उधर जगह ढूंढता रहता है। मंगलवार रात को भी इसी तरह का नजारा शहर के नए बस स्टैंड पर देखने को मिला। यहां झारखंड से आए 7 प्रवासी मजदूर अपनी रात काटने के लिए बस स्टैंड में जगह ढूंढते दिखे। उन्हें मजबूरन बस एक टिकट काटने वाली खिड़की में जगह मिली और जो अपने साथ गर्म कपड़े लिए हुए थे। वे अपने हाथ पैर व मुंह पर ढक कर सोने की तैयारी में थे, लेकिन कड़ाके की सर्दी के कारण उनके हाथ पैर ठंड के कारण बुरी तरह से कांप रहे थे। एक छोटी सी मदद की तलाश में लेकिन रेडक्रॉस के अधिकारियों की लापरवाही के चलते न जाने कितने ही प्रवासी मजदूरों ने अपनी रात ठंड में गुजारी होगी। आलम यह है कि जब करीबन 09: 45 बजे जिला रेडक्रास अधिकारी प्रदीप हुड्डा से बात करनी चाहिए तो उन्होंने फोन नहीं उठाया इस बात से यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि रेडक्रॉस के अधिकारी रैन बसेरों में आने वाले लोगों के प्रति कितने जागरूक हैं। वहीं अगर रेड क्रॉस में स्थित रैन बसेरा की बात की जाए तो उन पर भी ताले जड़े हुए थे। झारखंड के प्रवासी मजदूर चरखी दादरी जा रहे थे।
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किसान आंदोलन में ड्यूटी के चलते बस स्टैंड के रैन बसेरे को चालू नहीं करवा पाए थे। बुधवार को सुबह उसमें साफ सफाई करवा कर चालू करवा दिया जाएगा।
- दीपक कुमार हेल्थ एजुकेटर, जिला रेडक्रॉस सोसायटी, झज्जर।