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नोटबंदी के 50 दिन: नहीं कैशलेस हो पाए सरकारी विभाग
ब्यूरो/अमर उजाला झज्जर
Updated Thu, 29 Dec 2016 01:05 AM IST
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झज्जर। नोटबंदी के समय केंद्र सरकार ने दावा किया था कि केवल 50 दिन तक दिक्कत है उसके बाद सब कुछ सही हो जाएगा। नोटबंदी के दौरान ही सरकार ने लोगों को विकल्प देने के लिए कैैशलेस का रुख किया था। इसमें सरकारी कार्यालयों से लेकर निजी क्षेत्रों को भी कैशलेस के तहत जोड़ने की बात कही गई थी। नोटबंदी के 50 दिन बाद सरकार ने आम आदमी को राहत पहुंचाने के लिए क्या कदम उठाए और कितना प्रयास आम आदमी के लिए अभी तक हो पाया है, अमर उजाला ने इसकी बुुधवार को इसकी पड़ताल। पड़ताल में पाया कि सरकारी विभाग पीओएस मशीनों की डिमांड भेजकर अभी तक केवल एक कदम ही इस दिशा में बढ़ा पाए हैं। आम आदमी के लिए सरकारी विभागों के पास नोटबंदी के 50 दिन पूरे होने के बावजूद कैशलेस की कोई सुविधा उपलब्ध नहीं है।
डिमांड 428 की, पहुंची नहीं एक भी
दिसंबर माह के शुरूआती सप्ताह में डीसी के द्वारा जानकारी मांगने पर जिले के सरकारी विभागों की ओर से 428 स्वाइप मशीनों की डिमांड दी गई थी। इसे डीसी के द्वारा उच्चाधिकारियों को भेज दिया गया था लेकिन दिसंबर माह खत्म होने को आ रहा है और अभी तक मशीनों कब आएंगी इसका कोई अता-पता नहीं है। वहीं सरकारी विभागों के द्वारा भी अभी तक ऐसा कोई दूसरी तरीका ईजाद नहीं किया गया है, जिससे लोगों को भुगतान के समय कैश की आवश्यकता न पड़े।
झटके से नहीं संभल पाया है बाजार
बाजार चाहे किसी भी प्रकार का हो लेकिन नोटबंदी के झटके से उभर नहीं पाया है। बिल्डिंग मैटीरियल सप्लायर के धंधे की कमर टूट गई है, रेट धड़ाम से नीचे आ गिरे हैं क्योंकि कंस्ट्रक्शन के काम ठप्प हो चुके हैं और मार्केट में माल की डिमांड खत्म हो चुकी है। वहीं ट्रांसपोर्ट का धंधा भी बुरी तरह से पिटा हुआ है। इसके अलावा शहर के बाजारों की रौनक भी पूरी तरह से गायब है। बाजारों में जहां पहले भीड़ नजर आती थी, वहीं अब कोई इक्का-दुक्का ग्राहक ही नजर आ रहे हैं।
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सरचार्ज के चक्कर में बाजार नहीं हुआ कैशलेस
स्वाइप मशीनों पर कटने वाले सरचार्ज के चक्कर के चलते अभी तक झज्जर की मिडल क्लास मार्केट कैशलेस नहीं हो पाई है। ईजी-डे और विशाल मेगा मार्ट को छोड़ दिया जाए तो पूरे बाजार में कहीं भी स्वाइप मशीन नजर नहीं आती। वहीं पेटीएम ट्राजेक्शन में समय लगने के चलते दुकानदारों का रुझान इसकी ओर नहीं है। दुकानदारों के अनुसार पेमेंट खाते में आने को कई बार तो एक सप्ताह तक समय लग जाता है। जिसके चलते वे इस झंझट में फंसना नहीं चाह रहे।
दुकानदारों की जुुबानी, मार्केट का हाल
सरकार द्वारा देश को कैश लैस करने की मुहिम का कदम कुछ हद तक तो ठीक है, लेकिन ग्राहकों की परेशानी से सरकार रूबरू नहीं है। अभी तक सभी खरीददारों के पास ना तो एटीएम कार्डों की सुविधा है और ना ही उन्हें आनलाइन बैंकिंग के बारे में जानकारी है। सिर्फ ग्राहकों के पास ही नहीं बल्कि बाजार स्थित सभी दुकानदारों के पास भी इस प्रकार के लेन देन की सुविधा नहीं है। -जयपाल लांबा, स्वर्णकार
हमने अपनी दुकान में ग्राहकों की परेशानी को कम करने के लिए बैंकिंग की सुविधा जरूर उपलब्ध करवाई है, लेकिन ग्राहकों को इस बारे में पूरी जानकारी ना होने के कारण यह अभी तक पूर्ण रूप से सफल नहीं हो पाई है। जिसके कारण ग्राहक को सामान की खरीद फरोख्त करने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। अभी तक सरकार द्वारा चलाई तक इस कैश लैस भारत की मुहिम के कारण क्षेत्रवासियों के सामने एक भारी समस्या आन खड़ी हुई है।
- राकेश अरोड़ा, कपड़ा व्यापारी
छोटी दुकानदारी के बीच इस प्रकार के आनलाइन बैंकिंग झंझटों में पड़ना एक बड़ी समस्या के समान है। अब तक कोई भी सामान बेचने के बदले ग्राहक से सीधे कैश की उपलब्धता होती थी। लेकिन सरकार की इस मुहिम के कारण ग्राहकों के पास कैश की कमी आन पड़ी है जिसका भुगतान दुकानदार को भी करना पड़ रहा है। क्योंकि सामान के एवज में ग्राहक से लिया गया चैक उन्हें हर रोज बैंक लाइन में खड़े करने व खर्चे के मुताबिक बैंक से कैश वापस ना निकल पाने के कारण परेशानी को बढ़ा रहा है।
- मनोज गर्ग, किरयाना स्टोर संचालक
स्वाइप मशीनें आने में समय लगता है। डिमांड आने के बाद अप्रूवल के लिए आरबीआई को भेजी जाती है, जहां से अप्रूवल मिलने के बाद ही डिलीवरी एड्रेस पर भेजी जाती है।
- एलडी शर्मा, एलडीएम, झज्जर।
डिमांड भेजी जा चुकी है। स्वाइप मशीनों की पहले खेप जनवरी माह के प्रथम सप्ताह में आने की पूरी संभावना है। इसके बाद सभी सरकारी विभागों में कैशलेस कार्य शुरू हो जाएंगे। - आरसी बिढाण, डीसी, झज्जर।
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डिमांड 428 की, पहुंची नहीं एक भी
दिसंबर माह के शुरूआती सप्ताह में डीसी के द्वारा जानकारी मांगने पर जिले के सरकारी विभागों की ओर से 428 स्वाइप मशीनों की डिमांड दी गई थी। इसे डीसी के द्वारा उच्चाधिकारियों को भेज दिया गया था लेकिन दिसंबर माह खत्म होने को आ रहा है और अभी तक मशीनों कब आएंगी इसका कोई अता-पता नहीं है। वहीं सरकारी विभागों के द्वारा भी अभी तक ऐसा कोई दूसरी तरीका ईजाद नहीं किया गया है, जिससे लोगों को भुगतान के समय कैश की आवश्यकता न पड़े।
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झटके से नहीं संभल पाया है बाजार
बाजार चाहे किसी भी प्रकार का हो लेकिन नोटबंदी के झटके से उभर नहीं पाया है। बिल्डिंग मैटीरियल सप्लायर के धंधे की कमर टूट गई है, रेट धड़ाम से नीचे आ गिरे हैं क्योंकि कंस्ट्रक्शन के काम ठप्प हो चुके हैं और मार्केट में माल की डिमांड खत्म हो चुकी है। वहीं ट्रांसपोर्ट का धंधा भी बुरी तरह से पिटा हुआ है। इसके अलावा शहर के बाजारों की रौनक भी पूरी तरह से गायब है। बाजारों में जहां पहले भीड़ नजर आती थी, वहीं अब कोई इक्का-दुक्का ग्राहक ही नजर आ रहे हैं।
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सरचार्ज के चक्कर में बाजार नहीं हुआ कैशलेस
स्वाइप मशीनों पर कटने वाले सरचार्ज के चक्कर के चलते अभी तक झज्जर की मिडल क्लास मार्केट कैशलेस नहीं हो पाई है। ईजी-डे और विशाल मेगा मार्ट को छोड़ दिया जाए तो पूरे बाजार में कहीं भी स्वाइप मशीन नजर नहीं आती। वहीं पेटीएम ट्राजेक्शन में समय लगने के चलते दुकानदारों का रुझान इसकी ओर नहीं है। दुकानदारों के अनुसार पेमेंट खाते में आने को कई बार तो एक सप्ताह तक समय लग जाता है। जिसके चलते वे इस झंझट में फंसना नहीं चाह रहे।
दुकानदारों की जुुबानी, मार्केट का हाल
सरकार द्वारा देश को कैश लैस करने की मुहिम का कदम कुछ हद तक तो ठीक है, लेकिन ग्राहकों की परेशानी से सरकार रूबरू नहीं है। अभी तक सभी खरीददारों के पास ना तो एटीएम कार्डों की सुविधा है और ना ही उन्हें आनलाइन बैंकिंग के बारे में जानकारी है। सिर्फ ग्राहकों के पास ही नहीं बल्कि बाजार स्थित सभी दुकानदारों के पास भी इस प्रकार के लेन देन की सुविधा नहीं है। -जयपाल लांबा, स्वर्णकार
हमने अपनी दुकान में ग्राहकों की परेशानी को कम करने के लिए बैंकिंग की सुविधा जरूर उपलब्ध करवाई है, लेकिन ग्राहकों को इस बारे में पूरी जानकारी ना होने के कारण यह अभी तक पूर्ण रूप से सफल नहीं हो पाई है। जिसके कारण ग्राहक को सामान की खरीद फरोख्त करने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। अभी तक सरकार द्वारा चलाई तक इस कैश लैस भारत की मुहिम के कारण क्षेत्रवासियों के सामने एक भारी समस्या आन खड़ी हुई है।
- राकेश अरोड़ा, कपड़ा व्यापारी
छोटी दुकानदारी के बीच इस प्रकार के आनलाइन बैंकिंग झंझटों में पड़ना एक बड़ी समस्या के समान है। अब तक कोई भी सामान बेचने के बदले ग्राहक से सीधे कैश की उपलब्धता होती थी। लेकिन सरकार की इस मुहिम के कारण ग्राहकों के पास कैश की कमी आन पड़ी है जिसका भुगतान दुकानदार को भी करना पड़ रहा है। क्योंकि सामान के एवज में ग्राहक से लिया गया चैक उन्हें हर रोज बैंक लाइन में खड़े करने व खर्चे के मुताबिक बैंक से कैश वापस ना निकल पाने के कारण परेशानी को बढ़ा रहा है।
- मनोज गर्ग, किरयाना स्टोर संचालक
स्वाइप मशीनें आने में समय लगता है। डिमांड आने के बाद अप्रूवल के लिए आरबीआई को भेजी जाती है, जहां से अप्रूवल मिलने के बाद ही डिलीवरी एड्रेस पर भेजी जाती है।
- एलडी शर्मा, एलडीएम, झज्जर।
डिमांड भेजी जा चुकी है। स्वाइप मशीनों की पहले खेप जनवरी माह के प्रथम सप्ताह में आने की पूरी संभावना है। इसके बाद सभी सरकारी विभागों में कैशलेस कार्य शुरू हो जाएंगे। - आरसी बिढाण, डीसी, झज्जर।