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आरटीआई में जानकारी न देना ईओ को पड़ा महंगा, लगाया 10 हजार जुर्माना

Tue, 20 Apr 2021 02:01 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Tue, 20 Apr 2021 02:01 AM IST
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Not giving information in RTI cost EO expensive, imposed 10,000 fine
बहादुरगढ़। जन सूचना अधिकार अधिनियम के तहत कई विभागों में अधिकारियों की मनमानी लोगों को परेशानी में भी ला रही है। मगर यह मनमानी संबंधित अधिकारियों के लिए कई बार भारी भी पड़ रही है। हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण द्वारा जन सूचना अधिकार अधिनियम के तहत निर्धारित समयावधि में सूचना नहीं देने पर राज्य सूचना आयोग ने प्राधिकरण के ईओ 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाने का आदेश जारी किया गया है। करीब सवा साल पहले जन सूचना अधिकार अधिनियम के तहत किए गए आवेदन पर अपील के दौरान आयोग के आदेश के बाद भी सूचना नहीं देने पर यह कार्रवाई की गई है।
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बता दें कि रोहिणी निवासी जोगिंद्र सिंह ने गत वर्ष 16 जनवरी को आरटीआई एक्ट के तहत हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण के संपदा कार्यालय में आवेदन किया था। मामले में सूचना नहीं मिलने और प्रथम अपील अधिकारी द्वारा राहत नहीं दिए जाने पर जोगिंद्र सिंह ने आयोग के समक्ष द्वितीय अपील कर दी थी। जिस पर आयोग ने 11 दिसंबर को सुनवाई के दौरान एसपीआईयू सिद्धार्थ सिंह को निर्देश दिया था कि आवेदक को 22 दिसंबर को 11 बजे संबंधित रिकॉर्ड का अवलोकन करवाया जाए। इसके बाद निशुल्क संबंधित दस्तावेज की प्रतिलिपियां देने के भी निर्देश आयोग ने दिए थे। साथ ही पूर्व संपदा अधिकारी विकास ढांडा को भी शोकॉज नोटिस जारी किया था। इस मामले में 22 जनवरी को भी सुनवाई की गई थी। आवेदक को 30 जनवरी तक संपूर्ण सूचना उपलब्ध करवाने के निर्देश दिए गए थे। साथ ही वर्तमान ईओ सिद्धार्थ सिंह को भी शो कॉज नोटिस जारी किया गया था। शोकॉज नोटिस का जवाब नहीं मिलने पर 5 मार्च को तत्कालीन सूचना आयुक्त भूपेंद्र धमार्नी ने इस केस की सुनवाई करते हुए एसपीआईयू सिद्धार्थ सिंह पर 10 हजार रुपये जुर्माना लगाने के आदेश दिए हैं। उन्हें 15 अप्रैल तक यह जुर्माना राशि जमा करवानी थी। आयोग ने ऐसा न करने की सूरत में संबंधित डीडीओ को ईओ सिद्धार्थ सिंह के वेतन से यह राशि काटने के निर्देश दिए थे। मामले में 11 दिसंबर को आयोग द्वारा जारी आदेशों के बावजूद आवेदक को कोई सूचना उपलब्ध नहीं करवाई गई। इस मामले में 4 मार्च को दी गई सूचना भी अधूरी व क्रमबद्ध नहीं मिली। यह भी पाया गया कि ईओ सिद्धार्थ सिंह ने आयोग द्वारा दिए गए आदेशों की पालना नहीं करते हुए लापरवाही बरती है।
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