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Jhajjar-Bahadurgarh News: किशोरियों को उच्च शिक्षा के लिए किया प्रेरित
Mon, 24 Nov 2025 12:30 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
Updated Mon, 24 Nov 2025 12:30 AM IST
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23jjrp05- ब्रेक थ्रू की सदस्य नाटक के जरिये विद्यार्थियों को जागरूक करते। स्रोत-संस्था
झज्जर। माछरोली और अमादलपुर में ब्रेक थ्रू संस्था की तरफ से बड़ी सी आशा अभियान कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें किशोरियों को उच्च शिक्षा के लिए प्रेरित किया गया। साथ में संदेश दिया गया कि उच्च शिक्षा पाना हर लड़की का अधिकार है परंतु समाज में रूढ़िवादी धारणाओं के कारण उन्हें अपने इस अधिकार से वंचित रखा जाता हैं।
नाटक में यह भी दिखाया कि स्कूल मैनेजमेंट कमेटी किशोरियों को आगे बढ़ने में मदद कर सकती है। ब्रेक थ्रू संस्था से पूनम और अनुराधा ने बताया कि विद्यालयों में किशोर-किशोरी सशक्तीकरण प्रोग्राम किशोर-किशोरियों को सशक्त करते हैं, जिसमें तारों की टोली के माध्यम से बड़ी सी आशा, हौसलों की उड़ान मॉड्यूल करवाया जाता है।
इससे किशोर-किशोरी अपने सपनों को पहचान कर अपने सपनों के बारे में अपने माता-पिता से बात कर सकें। माछरौली में नाटक के दौरान आरुषि ने कहा कि बाधक और रुकावटें बहुत आती हैं, जिससे बहुत बार हिम्मत खत्म हो जाती है। सपने पूरे हो पाएंगे या नहीं, यह खुद से सवाल करना पड़ता हैं।
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सीमा ने नाटक देखने के बाद कहा कि मेरी भी बेटियां हैं, जो स्कूल, कॉलेज जाती हैं। उनकी सुरक्षा की चिंता मुझे परेशान करती है, लेकिन माहौल की वजह से मैं अपनी बेटियों के सपने नहीं छुड़वा सकती। उनके लिए उनके सपने बहुत जरूरी हैं और माहौल की सुरक्षा की जिम्मेदारी सभी की होनी चाहिए। इससे माहौल सभी के लिए सुरक्षित रहे और कोई स्कूल जाने से न रुक पाए।
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नाटक में यह भी दिखाया कि स्कूल मैनेजमेंट कमेटी किशोरियों को आगे बढ़ने में मदद कर सकती है। ब्रेक थ्रू संस्था से पूनम और अनुराधा ने बताया कि विद्यालयों में किशोर-किशोरी सशक्तीकरण प्रोग्राम किशोर-किशोरियों को सशक्त करते हैं, जिसमें तारों की टोली के माध्यम से बड़ी सी आशा, हौसलों की उड़ान मॉड्यूल करवाया जाता है।
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इससे किशोर-किशोरी अपने सपनों को पहचान कर अपने सपनों के बारे में अपने माता-पिता से बात कर सकें। माछरौली में नाटक के दौरान आरुषि ने कहा कि बाधक और रुकावटें बहुत आती हैं, जिससे बहुत बार हिम्मत खत्म हो जाती है। सपने पूरे हो पाएंगे या नहीं, यह खुद से सवाल करना पड़ता हैं।
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सीमा ने नाटक देखने के बाद कहा कि मेरी भी बेटियां हैं, जो स्कूल, कॉलेज जाती हैं। उनकी सुरक्षा की चिंता मुझे परेशान करती है, लेकिन माहौल की वजह से मैं अपनी बेटियों के सपने नहीं छुड़वा सकती। उनके लिए उनके सपने बहुत जरूरी हैं और माहौल की सुरक्षा की जिम्मेदारी सभी की होनी चाहिए। इससे माहौल सभी के लिए सुरक्षित रहे और कोई स्कूल जाने से न रुक पाए।