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माता भीमेश्वरी देवी मंदिर में जले आस्था के दीप, उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
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माता भीमेश्वरी देवी को लेकर जाते पुजारी।
- फोटो : Jhjhar
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नवरात्र के दूसरे दिन मंदिर में मां ब्रह्मचारिणी देवी की पूजा हुई। मां भीमेश्वरी देवी मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। अल-सुबह से ही भीमेश्वरी देवी की पूजा करने के लिए भक्तों की कतार लगी रही। पूरे कस्बें में श्रद्धालुओं की चहल-पहल से चारों और धार्मिक माहौल बना हुआ है। सप्तमी व अष्टमी के दिनों भक्तों का यह सैलाब अपने चरम पर होगा।
बेरी मंदिर की मान्यता इतनी अधिक है कि यहां कोलकाता, मुंबई, लखनऊ, दिल्ली आदि से भी
श्रद्धालु नौ दिन बेरी में ही रहकर मां की पूजा-अर्चना करते हैं। वैसे यहां मुख्य पूजा व अनुष्ठान सप्तमी और अष्टमी के दिन होती है। उस दौरान हजारों की संख्या में श्रद्धालु मां भीमेश्वरी देवी मंदिर में दर्शन करने के लिए पहुंचते हैं। इसी भीड़ के मंदिर के चारों और के सड़क मार्ग वाहनों के लिए पूरी तरह से बंद कर दिया जाता है। श्रद्धालु पैदल रास्ता तय कर माता के मंदिर में पहुंचते हैं।
मां के स्वागत में हर कोई बैठा है तैयार
बेरी में स्थित मां भीमेश्वरी देवी के यहां दो मंदिर है। एक मंदिर बाहरी क्षेत्र में है और एक भीतर आबादी वाले क्षेत्र में। चली आ रही परंपरा के अनुसार दिन के समय में मां बाहरी क्षेत्र स्थित बने मंदिर में विराजमान रहती है। जबकि शाम से भीतर वाले मंदिर में भक्तों को आशीर्वाद देती हैं। मां को भीतर से बाहर वाले मंदिर लाने और ले जाने के समय पर यहा खास व्यवस्था होती है और उस दौरान हर किसी को इस बात का इंतजार रहता है कि वह भी मां के दर्शन प्राप्त करते हुए अपने जीवन को सफल बनाएगा।
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बच्चों का मुंडन कराने के लिए श्रद्धालु उमड़े
बच्चों का मुंडन कराने के लिए भी मंदिर में श्रद्धालुओं की खासी भीड़ होती है। लोग अपने बच्चों का पहला मुंडन माता के यहां करवाते हैं। मान्यता है कि ऐसा करने से बच्चे का भविष्य उज्जवल हो जाता है व जीवन में आने वाली परेशानियां पहले ही दूर हो जाती हैं। वहीं नव दंपती भी एक साथ आकर मां भीमेश्वरी का आशीर्वाद लेते हैं। इसके पीछे मान्यता यह है कि मां का आशीर्वाद लेने के बाद दांपत्य जीवन सुखमयी बीतता है। दंपती में हमेशा प्रेम बना रहता है। मां के दर्शन करने के लिए पंजाब, यूपी, हिमाचल व राजस्थान से भी श्रद्धालु आते है।
सीसीटीवी से रखी जा रही नजर
थाना प्रभारी सुंदर पाल ने बताया कि पुलिस विभाग की ओर से सुरक्षा को देखते हुए अलग-अलग जगहों पर पुलिस अधिकारियों व कर्मचारियों की ड्यूटी लगा रखी है। ड्यूटी पर तैनात पुलिस अधिकारियों व कर्मचारियों को निर्देश दिए गए है कि मेले में आने श्रद्धालुओं की सुरक्षा में किसी प्रकार कोई कोताही ना बरती जाए। वहीं सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से हर श्रद्धालु पर नजर रखी जा रही है।
भक्तों को सामाजिक दूरी को लेकर बार-बार अपील की जा रही है। दर्शन के अलावा सभी प्रकार के धार्मिक आयोजन जैसे कीर्तन, भंडारा, छबील आदि पर रोक है। मंदिर में नारियल, चुनरी, प्रसाद नही चढ़ेगा। मंदिर केवल दर्शन करने के लिए आए। दूसरे नवरात्र पर पांच हजार भक्तों ने मां के दरबार में माथा टेका।
- रविंद्र कुमार, एसडीएम, बेरी।
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बेरी मंदिर की मान्यता इतनी अधिक है कि यहां कोलकाता, मुंबई, लखनऊ, दिल्ली आदि से भी
श्रद्धालु नौ दिन बेरी में ही रहकर मां की पूजा-अर्चना करते हैं। वैसे यहां मुख्य पूजा व अनुष्ठान सप्तमी और अष्टमी के दिन होती है। उस दौरान हजारों की संख्या में श्रद्धालु मां भीमेश्वरी देवी मंदिर में दर्शन करने के लिए पहुंचते हैं। इसी भीड़ के मंदिर के चारों और के सड़क मार्ग वाहनों के लिए पूरी तरह से बंद कर दिया जाता है। श्रद्धालु पैदल रास्ता तय कर माता के मंदिर में पहुंचते हैं।
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मां के स्वागत में हर कोई बैठा है तैयार
बेरी में स्थित मां भीमेश्वरी देवी के यहां दो मंदिर है। एक मंदिर बाहरी क्षेत्र में है और एक भीतर आबादी वाले क्षेत्र में। चली आ रही परंपरा के अनुसार दिन के समय में मां बाहरी क्षेत्र स्थित बने मंदिर में विराजमान रहती है। जबकि शाम से भीतर वाले मंदिर में भक्तों को आशीर्वाद देती हैं। मां को भीतर से बाहर वाले मंदिर लाने और ले जाने के समय पर यहा खास व्यवस्था होती है और उस दौरान हर किसी को इस बात का इंतजार रहता है कि वह भी मां के दर्शन प्राप्त करते हुए अपने जीवन को सफल बनाएगा।
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बच्चों का मुंडन कराने के लिए श्रद्धालु उमड़े
बच्चों का मुंडन कराने के लिए भी मंदिर में श्रद्धालुओं की खासी भीड़ होती है। लोग अपने बच्चों का पहला मुंडन माता के यहां करवाते हैं। मान्यता है कि ऐसा करने से बच्चे का भविष्य उज्जवल हो जाता है व जीवन में आने वाली परेशानियां पहले ही दूर हो जाती हैं। वहीं नव दंपती भी एक साथ आकर मां भीमेश्वरी का आशीर्वाद लेते हैं। इसके पीछे मान्यता यह है कि मां का आशीर्वाद लेने के बाद दांपत्य जीवन सुखमयी बीतता है। दंपती में हमेशा प्रेम बना रहता है। मां के दर्शन करने के लिए पंजाब, यूपी, हिमाचल व राजस्थान से भी श्रद्धालु आते है।
सीसीटीवी से रखी जा रही नजर
थाना प्रभारी सुंदर पाल ने बताया कि पुलिस विभाग की ओर से सुरक्षा को देखते हुए अलग-अलग जगहों पर पुलिस अधिकारियों व कर्मचारियों की ड्यूटी लगा रखी है। ड्यूटी पर तैनात पुलिस अधिकारियों व कर्मचारियों को निर्देश दिए गए है कि मेले में आने श्रद्धालुओं की सुरक्षा में किसी प्रकार कोई कोताही ना बरती जाए। वहीं सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से हर श्रद्धालु पर नजर रखी जा रही है।
भक्तों को सामाजिक दूरी को लेकर बार-बार अपील की जा रही है। दर्शन के अलावा सभी प्रकार के धार्मिक आयोजन जैसे कीर्तन, भंडारा, छबील आदि पर रोक है। मंदिर में नारियल, चुनरी, प्रसाद नही चढ़ेगा। मंदिर केवल दर्शन करने के लिए आए। दूसरे नवरात्र पर पांच हजार भक्तों ने मां के दरबार में माथा टेका।
- रविंद्र कुमार, एसडीएम, बेरी।