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Jhajjar-Bahadurgarh News: 25 जुलाई से योग निद्रा में रहेंगे भगवान विष्णु
Sat, 04 Jul 2026 04:54 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
Updated Sat, 04 Jul 2026 04:54 PM IST
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-फोटो 51 : पंडित सीयाराम, पुजारी, शिव-हनुमान मंदिर, काठमंडी बहादुरगढ़।
-चार महीने के लिए मांगलिक कार्य रहेंगे वर्जित, देव उठानी एकादशी होगी 20 नवंबर को
संवाद न्यूज एजेंसी
बहादुरगढ़। देवशयनी एकादशी 25 जुलाई से भगवान विष्णु चार माह के लिए योग निद्रा में रहेंगे। इस अवधि में मांगलिक कार्य करना वर्जित रहेगा। 20 नवंबर को देवउठनी एकादशी से मांगलिक कार्य शुरू होंगे। भगवान विष्णु को पंचदेव में सर्वश्रेष्ठ और विशेष माना गया है।
मांगलिक कार्य की शुरुआत पंचदेव पूजा से ही होती है। भगवान विष्णु विश्व के पालनकर्ता हैं और सृष्टि के संचालन का भार इन्हीं पर हैं, इसलिए हर शुभ कार्य में विष्णु की पूजा करने का प्रावधान है। भगवान विष्णु के योग निद्रा में जाने की अवधि को चातुर्मास भी कहते हैं।
काठमंडी स्थित शिव-हनुमान मंदिर के पुजारी सियाराम ने बताया कि भगवान विष्णु चार महीने सावन, भाद्रपद, अश्विन और कार्तिक में योग निद्रा में रहते हैं। जब भगवान विष्णु योग निद्रा में रहते हैं तो सृष्टि का संचालन भगवान शिव परिवार करता है। कहा जाता है कि इस अवधि में भगवान शिव, माता पार्वती, भगवान गणेश और कार्तिकेय विशेष रूप से सक्रिय रहते हैं और सभी प्रकार की नकारात्मक शक्तियों से सृष्टि की रक्षा करते हैं। उन्होंने बताया कि चातुर्मास का समय भगवान की पूजा और वंदना का है।
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इस अवधि में मां लक्ष्मी की आराधना करनी चाहिए। स्कंद पुराण के अनुसार भगवान विष्णु के शयन करने के समय माता लक्ष्मी और श्रीहरि की आराधना करनी चाहिए। भगवान विष्णु के योग निद्रा में जाने की अवधि में पृथ्वी पर सोना चाहिए और पूर्ण ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए। तिल और सरसों के तेल का त्याग करना चाहिए। गुड़ और शहद का उपयोग करने से बचाना चाहिए। भात का सेवन न करे। अहिंसा व्रत का पालन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि धार्मिक दृष्टि से यह चार महीने भगवान विष्णु के निद्राकाल माने जाते हैं। इस दौरान ब्रज की यात्रा की जा सकती है, क्योंकि इन महीनों में भूमंडल के समस्त तीर्थ ब्रज में आकर वास करते हैं।
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बहादुरगढ़। देवशयनी एकादशी 25 जुलाई से भगवान विष्णु चार माह के लिए योग निद्रा में रहेंगे। इस अवधि में मांगलिक कार्य करना वर्जित रहेगा। 20 नवंबर को देवउठनी एकादशी से मांगलिक कार्य शुरू होंगे। भगवान विष्णु को पंचदेव में सर्वश्रेष्ठ और विशेष माना गया है।
मांगलिक कार्य की शुरुआत पंचदेव पूजा से ही होती है। भगवान विष्णु विश्व के पालनकर्ता हैं और सृष्टि के संचालन का भार इन्हीं पर हैं, इसलिए हर शुभ कार्य में विष्णु की पूजा करने का प्रावधान है। भगवान विष्णु के योग निद्रा में जाने की अवधि को चातुर्मास भी कहते हैं।
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काठमंडी स्थित शिव-हनुमान मंदिर के पुजारी सियाराम ने बताया कि भगवान विष्णु चार महीने सावन, भाद्रपद, अश्विन और कार्तिक में योग निद्रा में रहते हैं। जब भगवान विष्णु योग निद्रा में रहते हैं तो सृष्टि का संचालन भगवान शिव परिवार करता है। कहा जाता है कि इस अवधि में भगवान शिव, माता पार्वती, भगवान गणेश और कार्तिकेय विशेष रूप से सक्रिय रहते हैं और सभी प्रकार की नकारात्मक शक्तियों से सृष्टि की रक्षा करते हैं। उन्होंने बताया कि चातुर्मास का समय भगवान की पूजा और वंदना का है।
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इस अवधि में मां लक्ष्मी की आराधना करनी चाहिए। स्कंद पुराण के अनुसार भगवान विष्णु के शयन करने के समय माता लक्ष्मी और श्रीहरि की आराधना करनी चाहिए। भगवान विष्णु के योग निद्रा में जाने की अवधि में पृथ्वी पर सोना चाहिए और पूर्ण ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए। तिल और सरसों के तेल का त्याग करना चाहिए। गुड़ और शहद का उपयोग करने से बचाना चाहिए। भात का सेवन न करे। अहिंसा व्रत का पालन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि धार्मिक दृष्टि से यह चार महीने भगवान विष्णु के निद्राकाल माने जाते हैं। इस दौरान ब्रज की यात्रा की जा सकती है, क्योंकि इन महीनों में भूमंडल के समस्त तीर्थ ब्रज में आकर वास करते हैं।