{"_id":"5ec573b28ebc3e90333704a4","slug":"lock-down-workers-back-to-home-jhajjar-jhjhar-news-rtk555847676","type":"story","status":"publish","title_hn":"बेगूसराय से खगरिया के लिए पैदल निकले श्रमिक","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बेगूसराय से खगरिया के लिए पैदल निकले श्रमिक
विज्ञापन
दोपहर के समय लघु सचिवालय के सामने आराम करते श्रमिक।
- फोटो : Jhjhar
झज्जर। लॉकडाउन होने के बाद से क्षेत्र में फंसे श्रमिकों को प्रशासन की तरफ से जहां बसों में रेलगाड़ियों में भेजा जा रहा है। वहीं कुछ श्रमिक ऐसे भी हैं जिन्होंने आज तक अपना रजिस्ट्रेशन नहीं करवाया है और वे अपने राज्यों के लिए पैदल ही रवाना हो रहे हैं। हर रोज कहीं न कहीं से काफी संख्या में प्रवासी श्रमिक पलायन कर रहे हैं। सरकार व प्रशासन के लाख प्रयासों के बावजूद इनका पलायन नहीं रुक रहा है। कुलाना गांव से बिहार के खगड़िया और बेगुसराय के लिए पैदल जा रहे 20 प्रवासी श्रमिकों ने कहा कि वे थर्मल प्लांट से निकलने वाली बिजली की बड़ी लाइनों के खंभे लगाने का कार्य करते थे, लेकिन लॉकडाउन के बाद से यह कार्य बंद पड़ा है। जिसकी वजह से उनके सामने भूखे मरने की नौबत आ गई है। उनका कहना था कि वे गांव जाने के लिए रजिस्ट्रेशन नहीं करवा पाए हैं।
श्रमिकों की प्रतिक्रिया
बिजली की लाइन लगाने का कार्य करते थे, लेकिन लॉकडाउन के बाद यहां पर फंस गए हैं। इसलिए पैदल ही जा रहे हैं। खाने के लिए जो सामान था वह खत्म हो गया है। जब खाने के लिए भी कुछ नहीं बचा है तो यहां रुक कर भी क्या करेंगे।
- त्रीवेणी सिंह।
हमारा गांव करीब 1300 किलोमीटर दूर पड़ता है। वहां तक पैदल ही जाना पड़ेगा। रजिस्ट्रेशन करवाने के बारे में जानकारी नहीं थी। अगर किसी ने वाहन में बैठा लिया तो उसमें चले जाएंगे। वरना पैदल जाना तो मजबूरी है।
विज्ञापन
- राजीव।
हमें रजिस्ट्रेशन करवाने के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। खेतों में रहते थे। लॉकडाउन लागू होने के बाद से यहां पर फंसे हुए हैं। खाने के लिए सामान भी खत्म हो गया है।
- रामानंद।
विज्ञापन
श्रमिकों की प्रतिक्रिया
बिजली की लाइन लगाने का कार्य करते थे, लेकिन लॉकडाउन के बाद यहां पर फंस गए हैं। इसलिए पैदल ही जा रहे हैं। खाने के लिए जो सामान था वह खत्म हो गया है। जब खाने के लिए भी कुछ नहीं बचा है तो यहां रुक कर भी क्या करेंगे।
विज्ञापन
- त्रीवेणी सिंह।
हमारा गांव करीब 1300 किलोमीटर दूर पड़ता है। वहां तक पैदल ही जाना पड़ेगा। रजिस्ट्रेशन करवाने के बारे में जानकारी नहीं थी। अगर किसी ने वाहन में बैठा लिया तो उसमें चले जाएंगे। वरना पैदल जाना तो मजबूरी है।
विज्ञापन
- राजीव।
हमें रजिस्ट्रेशन करवाने के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। खेतों में रहते थे। लॉकडाउन लागू होने के बाद से यहां पर फंसे हुए हैं। खाने के लिए सामान भी खत्म हो गया है।
- रामानंद।