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Jhajjar-Bahadurgarh News: माता भीमेश्वरी देवी मंदिर में जलाए आस्था के दीप

Wed, 20 Dec 2023 11:22 PM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़ Updated Wed, 20 Dec 2023 11:22 PM IST
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Lights of faith lit in Mata Bhimeshwari Devi temple
बेरी में सजा हुआ माता भीमेश्वरी देवी मंदिर ।सं
बेरी। माता भीमेश्वरी देवी मंदिर में अष्टमी के अवसर पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। श्रद्धालुओं ने माता के दरबार में पूजा अर्चना की और परिवार की खुशहाली की कामना की।
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मां के दरबार में अलसुबह से ही भक्तों की लाइन लगनी शुरू हो गई थी।सुबह करीब साढ़े 5 बजे मां को अंदर वाले दरबार से बाहर वाले भवन में लाया गया। जहां पुजारी ने मंत्रोच्चारण के साथ स्नान करवाया और मंगला आरती करने के बाद भक्तों के दर्शन के लिए कपाट खोले। पुजारी कुलदीप वशिष्ठ ने बताया कि हर माह की अष्टमी के दिन मां के दरबार भक्तों की भीड़ उमड़ती है। महिलाओं ने मां के मंदिर में पीपल के पेड़ पर धागा बांधकर मन्नत मांगी। मां के दरबार में भक्तों को किसी प्रकार की परेशानी न हो इसको लेकर पुलिसकर्मियों की ड्यूटी लगाई गई थी। बेरी शहर चौकी प्रभारी प्रदीप दलाल का कहना है कि माता भीमेश्वरी देवी मंदिर में हर माह की अष्टमी के दिन हरियाणा, दिल्ली समेत कई राज्यों से श्रद्धालु पहुंचते हैं।
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अति प्राचीन है मां भीमेश्वरी देवी मंदिर का इतिहास

मां भीमेश्वरी देवी मंदिर का इतिहास अति प्राचीन है। विद्वानों के अनुसार मां की मूर्ति को पांडु पुत्र भीम पाकिस्तान के हिंगलाज पर्वत से लेकर आए थे। भीम ने मां को अपने साथ चलने के लिए कहा तो मां ने पांडु पुत्र से कहा कि मैं तुम्हारे साथ तो चलूंगी, लेकिन तुम मुझे अपनी गोद में रखोगे। रास्ते में जहां भी उतारोगे, मैं उस स्थान से आगे नहीं जाऊंगी। भीम ने मां का कहना माना और गोद में उठाकर युद्ध भूमि की तरफ चल पड़ा । जब भीम मां को लेकर बेरी कस्बे से गुजर रहा था तो भीम को लघु शंका के लिए उन्हें अपने कंधे से उतार दिया । बाद में माता को वापस चलने के लिए अपनी गोद में उठाने लगा तो वह नहीं उठ पाई । तभी मां भीमेश्वरी की यहां स्थापना हुई और महाभारत के युद्ध के बाद यहां मंदिर की स्थापना कर दी गई।
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