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नरेंद्र हत्याकांड के चार दोषियों को उम्रकैद
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करीब चार साल पहले हुए नरेंद्र हत्याकांड में एडिशनल सेशन जज झज्जर की अदालत ने चार आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही 11-11 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।
मामले की विस्तृत जानकारी देते हुए सिटी थाना प्रभारी बिजेंद्र ने बताया कि 19 मार्च 2016 को मृतक की पत्नी मीना ने अपने पति नरेंद्र के लापता होने के संबंध में थाना शहर बहादुरगढ़ में शिकायत देते हुए मामला दर्ज कराया था। लापता नरेंद्र बहादुरगढ़ में स्थित एक कंपनी में बतौर सुपरवाइजर के पद पर कार्यरत था। आरोपी भी उसी कंपनी में हेल्पर का कार्य कर रहे थे। यूनियनबाजी के कारण आरोपियों को कंपनी से निकाल दिया गया था। जिसकी रंजिश रखते हुए आरोपी वीरेंद्र उर्फ बंटी व सुभाष निवासी गांव रोहद ने अपने साथी मोहित निवासी गांव कानोन्दा के साथ मिलकर 18 मार्च 2016 को सांखोल से नरेंद्र का अपहरण कर लिया और उसे गांव हलालपुर ले गए। रास्ते में उसका मोबाइल छीन कर फेंक दिया। हलालपुर गांव में मुणक नहर की पटरी पर ले जाकर उसकी हत्या कर दी।
गंडासी से मारा, नहर में बहाया शव
वारदात में आरोपियों का साथ अनुज व बलराम ने भी दिया। वारदात के पश्चात मृतक का शव मुणक नहर में फेंक दिया गया। उसके कपड़े व जूते आदि सामान भी नहर में पहचान छिपाने के लिए फेंक दिए गए। मृतक के हाथ पर उसका व उसकी पत्नी का नाम गुदा हुआ था। उस हिस्से पर भी पहचान छिपाने के मकसद से गंडासी से वार किए गए।
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ऐसे हो पाई पहचान
मृतक का शव निर्वस्त्र हालत में 21 मार्च 2016 को हैदरपुर वाटर ट्रीटमेंट प्लांट में बरामद हुआ था। जिसके संबंध में थाना समयपुर बादली दिल्ली में धारा 302, 201 आईपीसी का मामला अंकित किया गया था। मृतक की पहचान उसके परिचित द्वारा अखबार में छपी लाश की फोटो से की गई थी।
बहादुरगढ़ पुलिस ने पकड़े आरोपी
मामला बहादुरगढ़ पुलिस तक पहुंचा तो जांच शुरू की गई। मामले में चश्मदीद गवाह न होते हुए भी स्थानीय पुलिस ने गंभीरता से कार्रवाई करते हुए एक-एक सुबूत को इकट्ठा किया। अपहरण व हत्या की उपरोक्त वारदात में शामिल आरोपियों को एक-एक करके गिरफ्तार किया गया। पकड़े गए आरोपियों के कब्जे से हत्या की उपरोक्त वारदात में इस्तेमाल की गई गंडासी गांव हलालपुर से बरामद हुई।
बहादुरगढ़ पुलिस ने मामले का चालान तैयार करके अदालत में पेश किया। गवाहियों और पुलिस द्वारा जुटाए गए सबूतों के आधार पर अदालत द्वारा आरोपियों को दोषी पाया गया। आरोपियों वीरेंद्र उर्फ बंटी और सुभाष निवासी गांव रोहद, भैयराम निवासी हलालपुर और मोहित निवासी गांव कानोन्दा को एडिशनल सेशन जज महेंद्र की अदालत ने सात जनवरी को दोषी ठहराते हुए उम्र कैद व 11-11 हजार रुपये जुर्माना की सजा सुनाई गई। जुर्माना अदा न करने पर एक वर्ष अतिरिक्त सजा के आदेश किए गए हैं।
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मामले की विस्तृत जानकारी देते हुए सिटी थाना प्रभारी बिजेंद्र ने बताया कि 19 मार्च 2016 को मृतक की पत्नी मीना ने अपने पति नरेंद्र के लापता होने के संबंध में थाना शहर बहादुरगढ़ में शिकायत देते हुए मामला दर्ज कराया था। लापता नरेंद्र बहादुरगढ़ में स्थित एक कंपनी में बतौर सुपरवाइजर के पद पर कार्यरत था। आरोपी भी उसी कंपनी में हेल्पर का कार्य कर रहे थे। यूनियनबाजी के कारण आरोपियों को कंपनी से निकाल दिया गया था। जिसकी रंजिश रखते हुए आरोपी वीरेंद्र उर्फ बंटी व सुभाष निवासी गांव रोहद ने अपने साथी मोहित निवासी गांव कानोन्दा के साथ मिलकर 18 मार्च 2016 को सांखोल से नरेंद्र का अपहरण कर लिया और उसे गांव हलालपुर ले गए। रास्ते में उसका मोबाइल छीन कर फेंक दिया। हलालपुर गांव में मुणक नहर की पटरी पर ले जाकर उसकी हत्या कर दी।
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गंडासी से मारा, नहर में बहाया शव
वारदात में आरोपियों का साथ अनुज व बलराम ने भी दिया। वारदात के पश्चात मृतक का शव मुणक नहर में फेंक दिया गया। उसके कपड़े व जूते आदि सामान भी नहर में पहचान छिपाने के लिए फेंक दिए गए। मृतक के हाथ पर उसका व उसकी पत्नी का नाम गुदा हुआ था। उस हिस्से पर भी पहचान छिपाने के मकसद से गंडासी से वार किए गए।
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ऐसे हो पाई पहचान
मृतक का शव निर्वस्त्र हालत में 21 मार्च 2016 को हैदरपुर वाटर ट्रीटमेंट प्लांट में बरामद हुआ था। जिसके संबंध में थाना समयपुर बादली दिल्ली में धारा 302, 201 आईपीसी का मामला अंकित किया गया था। मृतक की पहचान उसके परिचित द्वारा अखबार में छपी लाश की फोटो से की गई थी।
बहादुरगढ़ पुलिस ने पकड़े आरोपी
मामला बहादुरगढ़ पुलिस तक पहुंचा तो जांच शुरू की गई। मामले में चश्मदीद गवाह न होते हुए भी स्थानीय पुलिस ने गंभीरता से कार्रवाई करते हुए एक-एक सुबूत को इकट्ठा किया। अपहरण व हत्या की उपरोक्त वारदात में शामिल आरोपियों को एक-एक करके गिरफ्तार किया गया। पकड़े गए आरोपियों के कब्जे से हत्या की उपरोक्त वारदात में इस्तेमाल की गई गंडासी गांव हलालपुर से बरामद हुई।
बहादुरगढ़ पुलिस ने मामले का चालान तैयार करके अदालत में पेश किया। गवाहियों और पुलिस द्वारा जुटाए गए सबूतों के आधार पर अदालत द्वारा आरोपियों को दोषी पाया गया। आरोपियों वीरेंद्र उर्फ बंटी और सुभाष निवासी गांव रोहद, भैयराम निवासी हलालपुर और मोहित निवासी गांव कानोन्दा को एडिशनल सेशन जज महेंद्र की अदालत ने सात जनवरी को दोषी ठहराते हुए उम्र कैद व 11-11 हजार रुपये जुर्माना की सजा सुनाई गई। जुर्माना अदा न करने पर एक वर्ष अतिरिक्त सजा के आदेश किए गए हैं।