फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Jhajjar/Bahadurgarh News ›   Leopard enters factory, team of Wildlife Department overcomes

फैक्टरी में घुसा तेंदुआ, वन्य जीव विभाग की टीम ने किया काबू

Mon, 10 May 2021 12:46 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Mon, 10 May 2021 12:46 AM IST
विज्ञापन
Leopard enters factory, team of Wildlife Department overcomes
बहादुरगढ़। गांव पाहसौर के पास रविवार को एक तेंदुआ एक फैक्टरी में घुस गया। इससे फैक्टरी कर्मचारियों में हड़कंप मच गया। बाद में सूचना मिलने पर पहुंची वन्य जव विभाग की टीम ने बेहोशी का इंजेक्शन देकर तेंदुए को काबू किया। फिलहाल वन्य जीव को रोहतक के चिड़ियाघर में रखा है।
विज्ञापन

पाहसौर स्थित एक फैक्टरी में रविवार सुबह उत्पादन कार्य चल रहा था। एक कर्मचारी की नजर फैक्टरी के एक हिस्से में बैठे शेर जैसे जानवर पर पड़ी। वह ठिठका और बाहर आकर अपने वरिष्ठ कर्मचारियों को बताया। वरिष्ठ कर्मचारियों ने जिला वन्य जीव निरीक्षक देवेंद्र हुड्डा का फोन नंबर तलाश कर सूचित किया। शेर की प्रजाति का जानवर होने की पुष्टि करने के लिए हुड्डा ने फैक्टरी वालों को फोटो भेजने के लिए कहा। फोटो में केवल पूंछ नजर आ रही थी। लेकिन तेंदुआ होने की पुष्टि हो गई। हुड्डा अपने सहयोगी कर्मचारियों फोरेस्ट गार्ड जितेंद्र व सतबीर के साथ मौके पर पहुंचे। वहां करीब 11 बजे उन्होंने फैक्टरी परिसर से सभी लोगों को बाहर निकाल दरवाजा बंद करवा दिया। रोहतक से वन्य जीव रेस्क्यू टीम बुलाई। झज्जर से जिला वन अधिकारी शिव सिंह रावत भी पहुंच गए।
विज्ञापन

ट्रेनगुलर गन से लगाया इंजेक्शन
हुड्डा ने बताया कि मौके पर फैक्टरी के कामगारों सहित काफी भीड़ इकट्ठी हो गई। ऐसी हालत में तेंदुए को काबू करने की सारी कार्रवाई को सुरक्षित तरीके से अंजाम देना बड़ी चुनौती थी। तंदुआ जिस कमरे में बैठा हुआ था, उसका दरवाजा पहले ही बंद कर दिया था। अब रेस्क्यू टीम के सदस्य डॉ. अशोक खासा ने कमरे की दीवार में करीब 10 फुट ऊपर लगे रोशन दान में से ट्रेनगुलर गन की मदद से तेंदुए को बेहोशी का इंजेक्शन दिया। हुड्डा ने बताया कि इंजेक्शन से बेहोश होने के बाद तेंदुए को काबू करके 15-20 मिनट में लोहे के पिंजरे में बंद करना आवश्यक था। इसलिए टीम ने सारे काम को फटाफट अंजाम दिया। तेंदुए को पहले जाल में फंसाया और फिर बाहर लाकर पिंजरे में बंद किया। अन्यथा 20 मिनट के बाद बेहोशी टूट सकती थी और खुद को खतरे में देख जानवर हिसंक हो जाए।
विज्ञापन
विज्ञापन

चार साल है तंदुए की उम्र
हड्डा ने बताया कि इस तेंदुए की आयु लगभग चार साल है। इस प्रजाति के जानवर करीब डेढ़ साल की उम्र में ही बालिग हो जाते हैं। फिलहाल इस वन्य जीव को रोहतक के चिड़ियाघर में रखा गया है। ये उच्च अधिकारी तय करेंगे कि अब इस तेंदुए को यमुनानगर जिले में कलेसर के वनों, मेवात के पहाड़ी क्षेत्र में छोड़ा जाएगा अथवा कहां रखा जाएगा। अगर इसको तुरंत काबू नहीं किया जाता और यह फैक्टरी से निकलकर अज्ञात स्थान के लिए चल पड़ता तो समस्या बढ़ सकती थी। लोगों में हड़कंप मचा रहता।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed