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अर्धसैनिकों की मांगों के संबंध में मंत्री को सौंपा मांग पत्र
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केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की भलाई से संबंधी कई मुद्दों को लेकर कॉंफेडरेशन ऑफएक्स पैरामिलिट्री फोर्स वेलफेयर एसोसिएशन का पांच सदस्य प्रतिनिधि मंडल महासचिव रणबीर सिंह के नेतृत्व में रक्षा राज्यमंत्री अजय भट्ट से मिला और उन्हें अपनी मांगों का ज्ञापन भी सौंपा।
एसोसिएशन के महासचिव रणबीर सिंह ने नाराजगी जताई कि सेना के जवानों व उनके परिवारों के लिए झंडा दिवस, सैनिक स्कूल, सैनिक कल्याण बोर्ड, पेंशन, वन रैंक-वन पेंशन, मिलिट्री सर्विस पे और अन्य सुविधाएं हैं तो फिर 20 लाख पैरा मिलिट्री जवानों के परिवारों के लिए ये सुविधाएं सरकार क्यों नहीं दे रही। उन्होंने कहा कि देश की सरहदों पर अर्धसैनिक बल के जवान दिन-रात ड्यूटी दे रहे हैं। देश की रक्षा के लिए शहीद भी हो रहे हैं लेकिन उसके बाद भी उनके साथ भेदभाव बरता जाता है। जयेंद्र सिंह राणा ने रक्षा राज्य मंत्री से आग्रह किया कि हमारे कल्याणार्थ मुद्दों को प्रधानमंत्री के संज्ञान में लाएं ताकि सरहदी चौकीदारों की पुन: पेंशन बहाली का एलान 15 अगस्त को लाल किले की प्राचीर से करें, जैसा कि भारतीय सैनिकों के लिए वन रैंक-वन पेंशन की घोषणा की थी। उन्होंने कहा कि आईपीएस अधिकारियों के बजाय कैडर ऑफिसर्स को डीजी बनाना चाहिए जो कि जवानों के कठिनाइयों एवं भलाई संबंधी मुद्दों को बेहतर तरीके से जानते हैं।
कोषाध्यक्ष वीएस कदम ने रक्षा राज्यमंत्री को याद दिलाया कि 13 दिसंबर 2001 पाक आतंकी हमले से देश की संसद को सीआरपीएफ के जवानों ने बचाया था फिर जवानों से क्या गलती हुई कि सरकार ने इनाम देने के बजाय 2004 में जवानों की पेंशन ही बंद कर दी। आने वाले पांच राज्यों के विधानसभा व 2024 के आम चुनाव में उपरोक्त 20 लाख पैरामिलिट्री फोर्स के परिवार एक निर्णायक भूमिका निभाएंगे। सरकार भूल रही है कि चुनाव को निष्पक्ष ढंग से संपन्न कराने में बूथ लेवल पर इन्हीं सुरक्षा बलों की तैनाती होती है। उन्होंने कहा कि गृहमंत्री व प्रधानमंत्री से पूर्व अर्धसैनिकों के प्रतिनिधि मंडल ने मिलने वास्ते बार-बार गुहार लगाई, लेकिन आज तक बुलावा नहीं आया, जोकि एक चिंतनीय विषय है। कॉर्डिनेटर तारादत्त शर्मा ने उम्मीद जताई कि रक्षा राज्यमंत्री के माध्यम से उपरोक्त मसलों को प्रधानमंत्री तक पहुंचाएंगे। कंफेडरेशन ने सरहदों के वास्तविक चौकीदारों को पुन: पेंशन बहाली की घोषणा जल्द किए जाने की मांग की है ताकि अर्धसैनिक बलों को भी राहत मिल सके।
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एसोसिएशन के महासचिव रणबीर सिंह ने नाराजगी जताई कि सेना के जवानों व उनके परिवारों के लिए झंडा दिवस, सैनिक स्कूल, सैनिक कल्याण बोर्ड, पेंशन, वन रैंक-वन पेंशन, मिलिट्री सर्विस पे और अन्य सुविधाएं हैं तो फिर 20 लाख पैरा मिलिट्री जवानों के परिवारों के लिए ये सुविधाएं सरकार क्यों नहीं दे रही। उन्होंने कहा कि देश की सरहदों पर अर्धसैनिक बल के जवान दिन-रात ड्यूटी दे रहे हैं। देश की रक्षा के लिए शहीद भी हो रहे हैं लेकिन उसके बाद भी उनके साथ भेदभाव बरता जाता है। जयेंद्र सिंह राणा ने रक्षा राज्य मंत्री से आग्रह किया कि हमारे कल्याणार्थ मुद्दों को प्रधानमंत्री के संज्ञान में लाएं ताकि सरहदी चौकीदारों की पुन: पेंशन बहाली का एलान 15 अगस्त को लाल किले की प्राचीर से करें, जैसा कि भारतीय सैनिकों के लिए वन रैंक-वन पेंशन की घोषणा की थी। उन्होंने कहा कि आईपीएस अधिकारियों के बजाय कैडर ऑफिसर्स को डीजी बनाना चाहिए जो कि जवानों के कठिनाइयों एवं भलाई संबंधी मुद्दों को बेहतर तरीके से जानते हैं।
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कोषाध्यक्ष वीएस कदम ने रक्षा राज्यमंत्री को याद दिलाया कि 13 दिसंबर 2001 पाक आतंकी हमले से देश की संसद को सीआरपीएफ के जवानों ने बचाया था फिर जवानों से क्या गलती हुई कि सरकार ने इनाम देने के बजाय 2004 में जवानों की पेंशन ही बंद कर दी। आने वाले पांच राज्यों के विधानसभा व 2024 के आम चुनाव में उपरोक्त 20 लाख पैरामिलिट्री फोर्स के परिवार एक निर्णायक भूमिका निभाएंगे। सरकार भूल रही है कि चुनाव को निष्पक्ष ढंग से संपन्न कराने में बूथ लेवल पर इन्हीं सुरक्षा बलों की तैनाती होती है। उन्होंने कहा कि गृहमंत्री व प्रधानमंत्री से पूर्व अर्धसैनिकों के प्रतिनिधि मंडल ने मिलने वास्ते बार-बार गुहार लगाई, लेकिन आज तक बुलावा नहीं आया, जोकि एक चिंतनीय विषय है। कॉर्डिनेटर तारादत्त शर्मा ने उम्मीद जताई कि रक्षा राज्यमंत्री के माध्यम से उपरोक्त मसलों को प्रधानमंत्री तक पहुंचाएंगे। कंफेडरेशन ने सरहदों के वास्तविक चौकीदारों को पुन: पेंशन बहाली की घोषणा जल्द किए जाने की मांग की है ताकि अर्धसैनिक बलों को भी राहत मिल सके।
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