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11 रणबांकुरों ने कारगिल विजय के दौरान दी थी प्राणों की आहुति

Mon, 26 Jul 2021 12:51 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Mon, 26 Jul 2021 12:51 AM IST
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jhajjar bahadurgarh news,11 Ranbankurs had sacrificed their lives during Kargil Vijay
देश के दुश्मनों ने जब देश की आन-बान-शान की तरफ देखा तो हमारे वीर जवानों ने अपने प्राणों की परवाह न करते हुुए दुश्मन के दांत खट्टे किए हैं। देश की रक्षा के लिए चाहे कोई घोषित युद्ध रहा हो या आतंकवादियों के साथ मुठभेड़ हर बार क्षेत्र के वीर जवानों ने दुश्मन का डटकर मुकाबला किया है।
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वहीं, 22 साल पहले कारगिल में ऑपरेशन विजय के दौरान दुश्मनों के छक्के छुड़ाने में झज्जर के वीरों ने अहम भूमिका निभाई थी। प्रदेश में सबसे ज्यादा झज्जर के रणबांकुरों ने भारत माता की रक्षा के लिए अपने प्राणों का बलिदान दिया, जबकि अनेक जवान घायल भी हुए थे। वर्ष 1999 में जब कारगिल युद्ध हुआ तो इसमें जिले के 11 वीरों ने अपने प्राणों की आहुति दी। शहीद हुए सभी वीरों के पार्थिव शरीर सरकार की तरफ से पूरे सम्मान के साथ उनके परिजनों तक पहुंचाए गए थे और पूरे सैनिक सम्मान के साथ अंतिम संस्कार करने के बाद सभी शहीदों के पैतृक गांवों में उनकी प्रतिमा लगाकर स्मारक भी बनाए गए हैं।
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दो माह चला था कारगिल युद्ध
करीब दो माह तक चले कारगिल युद्ध में 26 जुलाई 2021 को भारत की विजय के 22 साल पूरे हो गए हैं। 1999 में भारत और पाकिस्तान के बीच 18 हजार फीट की ऊंचाई पर कारगिल में दोनों देशों के बीच युद्ध हुआ था। सैन्य ऑपरेशन 8 मई 1999 को शुरू हुआ और 26 जुलाई 1999 को खत्म हुआ। इसकी शुरुआत 8 मई 1999 को तब हुई जब पाक के फौजियों और कश्मीरी आतंकियों को कारगिल की चोटी पर देखा गया था तो तत्कालीन सरकार ने एक घोषित युद्ध की घोषणा की थी। युद्ध के पहले दिन झज्जर के बेटे ने अपने प्राणों की आहुति दी थी। जिले के देशलपुर गांव निवासी हवलदार जयप्रकाश पुत्र रण सिंह ने 8 मई 1999 को दुश्मनों को नाकों चने चबवाते हुए हंसते-हसंते अपने प्राण न्यौछावर किए थे।
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इन वीरों ने दिया था प्राणों का बलिदान
1. देशलपुर गांव निवासी हवलदार जयप्रकाश पुत्र रण सिंह 8 मई 1999 को दुश्मनों से लोहा लेते हुए शहीद हुए थे।
2. जाखौदा गांव निवासी सहायक कमांडेंट आजाद सिंह पुत्र लायक राम दलाल ने 13 जून 1999 को देश के लिए अपने प्राणों की आहुति दी थी।
3. निलौठी गांव निवासी लांस नायक श्याम सिंह पुत्र हुकमचंद 13 जून 1999 को दुश्मन से लोहा लेते हुए वीरगति को प्राप्त हुए थे।
4. जैतपुर गांव निवासी सिग्नलमैन विनोद कुमार पुत्र जगदीश चंद ने 14 जून 1999 को देश की रक्षा के लिए अपने प्राण न्यौछावर किए थे।
5. सुबाना गांव निवासी ग्रनेडियर सुरेंद्र सिंह पुत्र रण सिंह ने 16 जून 1999 को अपने देश के लिए प्राणों का बलिदान दिया था।
6. जटवाड़ा गांव निवासी नायक लीला राम पुत्र रिजक राम ने 25 जून 1999 को अपने प्राणों की आहुति दी।
7. बराही गांव निवासी कैप्टन अमित वर्मा पुत्र सुरेंद्र सिंह ने 4 जुलाई 1999 को अपने प्राणों का बलिदान दिया था।
8. सौलधा गांव निवासी नायक रामफल पुत्र राज सिंह ने 6 जुलाई 1999 को अपने प्राणों की आहुति दी थी।
9. झांसवा गांव निवासी लांस नायक राजेश पुत्र रामेश्वर ने 7 जुलाई 1999 को देश की रक्षा के लिए अपने प्राण न्यौछावर किए।
10. खुंगाई गांव निवासी हवलदार हरिओम धारीवाल पुत्र चांद राम 7 जुलाई 1999 को भारत माता की रक्षा करते हुए उनके चरणों में लीन हो गए।
11. ढाकला गांव निवासी सिपाही धर्मबीर पुत्र सूबे सिंह 8 जुलाई 1999 को भारत माता की रक्षा करते हुए वीरगति को प्राप्त हुए थे।
शहीदों की याद में बनवाया स्मारक
शहीदों की याद में तीन स्मारक बनाए गए हैं, लेकिन जिला प्रशासन की तरफ से शहर के बाल भवन में कारगिल युद्ध में शहीद हुए वीरों की याद में अलग से स्मारक का निर्माण करवाया गया था। इस स्मारक की एक दीवार पर अशोक चक्र व दूसरी दीवार पर कारगिल विजय ऑपरेशन के दौरान शहीद हुए वीरों के नाम अंकित किए गए हैं।
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