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Jhajjar-Bahadurgarh News: सिंचाई कर फसल को रात की ठंड से बचाएं
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फोटो नंबर 71: कोहरा शुरू होते ही गेहूं की फसल में चल रहा सिंचाई कार्य
बादली। सर्दी बढ़ने के साथ ही रविवार को कोहरा भी दस्तक दी है। कोहरे की आमद से फसलों में रोग लगने का खतरा बढ़ गया है। फसलों को होने वाले नुकसान से बचाने के लिए कृषि वैज्ञानिक ने किसानों को सिंचाई कार्य करने की सलाह दी है। दिसंबर और जनवरी माह में फसलों पर बहुत अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है।
कोहरे के साथ ठंड पड़ने से गेहूं की फसल में गेरुई रोग लग जाता है। इस रोग में फसल की पत्तियां पीली पड़ जाती हैं और धीरे-धीरे फसल खराब होने लगती है। यदि कोहरा कम रहे तो गेहूं की फसल को लाभ भी होता है। कृषि वैज्ञानिक के अनुसार सिंचाई करने से 0.5 से दो डिग्री सेल्सियस तक तापमान में बढ़ोतरी हो जाती है।
किसान गौरव, हरदीप, रामनिवास और दीपक कहना है कि ठंड तो पड़ रही है लेकिन सिंचाई भी उतनी ही जरूरी है। समय पर सिंचाई नहीं हुई तो उपज पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। किसानों ने यह भी बताया कि खेती में लागत अधिक लग रही है लेकिन फसल तैयार होने पर उचित दाम नहीं मिल पा रहा है।
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ऐसे में सिंचाई में लापरवाही बरती जाए तो भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। कृषि विभाग के एसडीओ सुनील कौशिक ने बताया कि शाम के समय हल्की सिंचाई करने से मिट्टी का तापमान बढ़ता है जिससे पाले का असर कम होता है।
कृषि विशेषज्ञ के सुझाव
• सिंचाई से पहले खेत की नमी जांचे।
• गेहूं, आलू, तिल और सरसों फसलों को कम तापमान की जरूरत होती है लेकिन पाले से बचाव जरूरी है।
• नियमित खाद और पानी से फसल का विकास करें
• पोटाश और सल्फर युक्त खाद दें ताकि पौधों की ठंड सहने की क्षमता बढ़े।
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कोहरे के साथ ठंड पड़ने से गेहूं की फसल में गेरुई रोग लग जाता है। इस रोग में फसल की पत्तियां पीली पड़ जाती हैं और धीरे-धीरे फसल खराब होने लगती है। यदि कोहरा कम रहे तो गेहूं की फसल को लाभ भी होता है। कृषि वैज्ञानिक के अनुसार सिंचाई करने से 0.5 से दो डिग्री सेल्सियस तक तापमान में बढ़ोतरी हो जाती है।
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किसान गौरव, हरदीप, रामनिवास और दीपक कहना है कि ठंड तो पड़ रही है लेकिन सिंचाई भी उतनी ही जरूरी है। समय पर सिंचाई नहीं हुई तो उपज पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। किसानों ने यह भी बताया कि खेती में लागत अधिक लग रही है लेकिन फसल तैयार होने पर उचित दाम नहीं मिल पा रहा है।
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ऐसे में सिंचाई में लापरवाही बरती जाए तो भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। कृषि विभाग के एसडीओ सुनील कौशिक ने बताया कि शाम के समय हल्की सिंचाई करने से मिट्टी का तापमान बढ़ता है जिससे पाले का असर कम होता है।
कृषि विशेषज्ञ के सुझाव
• सिंचाई से पहले खेत की नमी जांचे।
• गेहूं, आलू, तिल और सरसों फसलों को कम तापमान की जरूरत होती है लेकिन पाले से बचाव जरूरी है।
• नियमित खाद और पानी से फसल का विकास करें
• पोटाश और सल्फर युक्त खाद दें ताकि पौधों की ठंड सहने की क्षमता बढ़े।