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मोटे अनाज को अपने आहार में करे शामिल : शक्ति सिंह
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झज्जर। मोटे अनाज को अपनी डाइट में शामिल करें। मिलेट्स यानी मोटा अनाज सेहत के लिए बहुत फायदेमंद होते हैं। भोजन में मोटे अनाज का अपना अलग महत्व है जैसे बाजरा, कैल्शियम से भरा होता है, ज्वार में पोटेशियम और फास्फोरस होता है, और कंगनी में फाइबर होता है जबकि कोदो आयरन से भरपूर होता है। इसलिए हमें सभी तरह के मिलेट्स खाते रहना चाहिए।
उपायुक्त ने बताया कि केंद्र सरकार के प्रस्ताव को स्वीकार करते हुए संयुक्त राष्ट्र महासभा ने वर्ष 2023 को अंतरराष्ट्रीय पोषक अनाज वर्ष के रूप में मनाने का निर्णय लिया है। संयुक्त राष्ट्र महासभा की ओर से की गई घोषणा के अनुसार वर्ष 2023 अंतरराष्ट्रीय मिलेट्स वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। केंद्र सरकार का उद्देश्य लोगों को मिलेट्स के बारे में ज्यादा से ज्यादा जागरूक करना है ताकि हर देश, इलाके के लोग इसे अपने डाइट में शामिल करें और मिलेट्स के लिए किसानों को अच्छा बाजार और अच्छे दाम मिल सकें।
-कुपोषण के खिलाफ रामबाण है मोटा अनाज
उन्होंने बताया कि आज जब विश्व का बड़ा हिस्सा कुपोषण से लड़ रहा है भारत की मोटे अनाज वाली थाली कुपोषण के खिलाफ रामबाण का काम करेगी। वसुधैव कुटुम्बकम के सिद्धांत वाले भारत के मोटा अनाज वर्ष के प्रस्ताव की महत्ता को समझते हुए संयुक्त राष्ट्र ने इसे स्वीकार किया और अब हम सभी भारतीयों का उत्तरदायित्व है कि हम अपने अपने स्तर पर इसे सफल बनाने के लिए प्रयास करें। भारत सरकार मोटे अनाज की खेती का दायरा बढ़ाने पर बल दे रही है। मोटा अनाज वर्ष के माध्यम से एक साथ कई लक्ष्यों को साधा जा सकता है। मोटा अनाज के प्रति जागरूकता बढने से जहां ज्वार, बाजरा आदि की खेती का रकबा बढ़ेगा वहीं कुपोषण की समस्या का भी समाधान हो पाएगा।
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उपायुक्त ने बताया कि केंद्र सरकार के प्रस्ताव को स्वीकार करते हुए संयुक्त राष्ट्र महासभा ने वर्ष 2023 को अंतरराष्ट्रीय पोषक अनाज वर्ष के रूप में मनाने का निर्णय लिया है। संयुक्त राष्ट्र महासभा की ओर से की गई घोषणा के अनुसार वर्ष 2023 अंतरराष्ट्रीय मिलेट्स वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। केंद्र सरकार का उद्देश्य लोगों को मिलेट्स के बारे में ज्यादा से ज्यादा जागरूक करना है ताकि हर देश, इलाके के लोग इसे अपने डाइट में शामिल करें और मिलेट्स के लिए किसानों को अच्छा बाजार और अच्छे दाम मिल सकें।
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-कुपोषण के खिलाफ रामबाण है मोटा अनाज
उन्होंने बताया कि आज जब विश्व का बड़ा हिस्सा कुपोषण से लड़ रहा है भारत की मोटे अनाज वाली थाली कुपोषण के खिलाफ रामबाण का काम करेगी। वसुधैव कुटुम्बकम के सिद्धांत वाले भारत के मोटा अनाज वर्ष के प्रस्ताव की महत्ता को समझते हुए संयुक्त राष्ट्र ने इसे स्वीकार किया और अब हम सभी भारतीयों का उत्तरदायित्व है कि हम अपने अपने स्तर पर इसे सफल बनाने के लिए प्रयास करें। भारत सरकार मोटे अनाज की खेती का दायरा बढ़ाने पर बल दे रही है। मोटा अनाज वर्ष के माध्यम से एक साथ कई लक्ष्यों को साधा जा सकता है। मोटा अनाज के प्रति जागरूकता बढने से जहां ज्वार, बाजरा आदि की खेती का रकबा बढ़ेगा वहीं कुपोषण की समस्या का भी समाधान हो पाएगा।
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