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ऐसे में कैसे रुक पाएगें झील में प्रवासी पक्षी
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जिला मुख्यालय से करीबन 20 किलोमीटर दूर झज्जर कोसली मार्ग पर भिंडावास गांव के नजदीक प्रवासी पक्षियों के लिए आश्रय का स्थल बना हुआ है। शायद आने वाली सर्दी के मौसम में हालात कुछ और देखने को मिले। ऐसा कहना इसलिए ठीक होगा क्योंकि भिंडावास झील के मौजूदा हालात पक्षियों के रुकने के लिए ठीक नहीं है। भिंडावास झील करीबन 1016 एकड़ जमीन में फैली हुई है जो की सर्दी के मौसम में प्रवासी पक्षियों के लिए एक उपयुक्त आसरा साबित होती है लेकिन संबंधित विभाग की लापरवाही के कारण शायद इस बार यहां पक्षी नहीं कर पाएंगे।
जिसका मुख्य कारण झील में उगी जलकुंभी, साल्विनिया व नरसल घास है जोकि लगातार पानी क्षेत्र को ढक रही है। इस कारण झील का करीबन 80 फीसदी पानी का हिस्सा इनके दिखाई नहीं देता है। वहीं अगर एक नजर में झील को देखे तो जलकुंभी के पौधों की एक परत दिखाई देती है। जो लगातार दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है।
अधिकारियों ने किया जलकुंभी व घास को हटवाने से इनकार
जब संबंधित विषय में जब विभाग के आला अधिकारियों से बात कि गई तो उन्होंने जलकुंभी व घास को हटवाने से इनकार कर दिया। इस हालत में प्रवासी पक्षियों का क्या होगा। वहीं भिंडावास झील को विश्व स्तर पर पर्यटन स्थल का दर्जा मिला हुआ है।
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पानी में भोजन की तलाश करते हैं प्रवासी पक्षी
प्रवासी पक्षी जब झील पर आते हैं तो पानी में भोजन की तलाश करते हैं लेकिन जलकुंभी के कारण अब पक्षी ऐसा नहीं कर पाएंगे और झील में उनका बसेरा नहीं बन पाएगा। वहीं साल्विनिया घास के कारण तैरने वाले पक्षी तैर नहीं पाते है जिसके कारण पक्षी उस क्षेत्र से दूर रहने लगे है। वहीं साल्विनिया होने कारण पानी में हवा की पर्याप्त मात्रा नहीं बन पाती है जिससे पानी में रहने वाले जीव पनप नहीं पाते है।
भिंडावास झील एक ताजे पानी की झील
12 किलोमीटर की परिधि है झील की अगर क्षेत्रफल की बात की जाए तो करीबन 1016 एकड़ में फैली हुई है। जिसमें कन्हावा, बिलोचपुरा, नवादा, रेडूवास, शाहजापुर व चिढ़वाना गांव की भूमि सम्मिलित है। भिंडावास झील एक ताजे पानी की झील है।
दो से तीन साल पहले निकाली गई थी जलकुंभी
विभाग के अधिकारियों बताया कि करीबन तीन साल पहले झील के पानी से जलकुंभी निकाली गई थी। उस समय झील में करीबन 40 हजार प्रवासी आकर ठहरे थे लेकिन इस झील का आलम यह बना हुआ है कि उसमें दो हजार पक्षी तक अपना बसेरा नहीं बना सकते है। जलकुंभी हटाने के बाद पक्षियों को झील के पानी में रहने वाली मछलियां साफ दिखाई देती है जिसे पक्षी अपना भोजन बनाते है।
एक डिग्री से 47 डिग्री सेल्सियस रहता है तापमान
झील इस तरह के क्षेत्र में जहां पर तापमान की काफी विविधता है। झील में अलग-अलग मौसम में एक डिग्री सेल्सियस से लेकर 40 डिग्री सेल्सियस तक तापमान रहता है। जिसे के कारण झील में हर मौसम में पानी पक्षी पाए जाते हैं।
इस साल जलकुंभी को नहीं हटाया जाएगा। इससे पहले के सालों में घास व जलकुंभी को निकाल चुके हैं। जिसमें करोड़ों रुपये खर्च हो चुके हैं।
- शिव सिंह रावत, मंडलीय वन्य प्राणी अधिकारी, रोहतक।
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जिसका मुख्य कारण झील में उगी जलकुंभी, साल्विनिया व नरसल घास है जोकि लगातार पानी क्षेत्र को ढक रही है। इस कारण झील का करीबन 80 फीसदी पानी का हिस्सा इनके दिखाई नहीं देता है। वहीं अगर एक नजर में झील को देखे तो जलकुंभी के पौधों की एक परत दिखाई देती है। जो लगातार दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है।
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अधिकारियों ने किया जलकुंभी व घास को हटवाने से इनकार
जब संबंधित विषय में जब विभाग के आला अधिकारियों से बात कि गई तो उन्होंने जलकुंभी व घास को हटवाने से इनकार कर दिया। इस हालत में प्रवासी पक्षियों का क्या होगा। वहीं भिंडावास झील को विश्व स्तर पर पर्यटन स्थल का दर्जा मिला हुआ है।
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पानी में भोजन की तलाश करते हैं प्रवासी पक्षी
प्रवासी पक्षी जब झील पर आते हैं तो पानी में भोजन की तलाश करते हैं लेकिन जलकुंभी के कारण अब पक्षी ऐसा नहीं कर पाएंगे और झील में उनका बसेरा नहीं बन पाएगा। वहीं साल्विनिया घास के कारण तैरने वाले पक्षी तैर नहीं पाते है जिसके कारण पक्षी उस क्षेत्र से दूर रहने लगे है। वहीं साल्विनिया होने कारण पानी में हवा की पर्याप्त मात्रा नहीं बन पाती है जिससे पानी में रहने वाले जीव पनप नहीं पाते है।
भिंडावास झील एक ताजे पानी की झील
12 किलोमीटर की परिधि है झील की अगर क्षेत्रफल की बात की जाए तो करीबन 1016 एकड़ में फैली हुई है। जिसमें कन्हावा, बिलोचपुरा, नवादा, रेडूवास, शाहजापुर व चिढ़वाना गांव की भूमि सम्मिलित है। भिंडावास झील एक ताजे पानी की झील है।
दो से तीन साल पहले निकाली गई थी जलकुंभी
विभाग के अधिकारियों बताया कि करीबन तीन साल पहले झील के पानी से जलकुंभी निकाली गई थी। उस समय झील में करीबन 40 हजार प्रवासी आकर ठहरे थे लेकिन इस झील का आलम यह बना हुआ है कि उसमें दो हजार पक्षी तक अपना बसेरा नहीं बना सकते है। जलकुंभी हटाने के बाद पक्षियों को झील के पानी में रहने वाली मछलियां साफ दिखाई देती है जिसे पक्षी अपना भोजन बनाते है।
एक डिग्री से 47 डिग्री सेल्सियस रहता है तापमान
झील इस तरह के क्षेत्र में जहां पर तापमान की काफी विविधता है। झील में अलग-अलग मौसम में एक डिग्री सेल्सियस से लेकर 40 डिग्री सेल्सियस तक तापमान रहता है। जिसे के कारण झील में हर मौसम में पानी पक्षी पाए जाते हैं।
इस साल जलकुंभी को नहीं हटाया जाएगा। इससे पहले के सालों में घास व जलकुंभी को निकाल चुके हैं। जिसमें करोड़ों रुपये खर्च हो चुके हैं।
- शिव सिंह रावत, मंडलीय वन्य प्राणी अधिकारी, रोहतक।