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Jhajjar-Bahadurgarh News: बिरोहड़ गांव में 6 माह से 100 एकड़ खेतों में जलभराव, किसान बोले-बदहाली के आंसू बहा रहे
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21jjrp18- बिरोहड़ गांव का किसान खेत में जमा पानी दिखाते। संवाद
साल्हावास। गांव बिरोहड़ से सातौर रोड पर पिछले छह माह से किसानों के लगभग 100 एकड़ में जलभराव है। पानी खेतों में अभी तक खड़ा हुआ है। चावल, ज्वार, बाजरा, मक्का, मूंग, मूंगफली, गन्ना, सोयाबीन और कपास की फसल तो खराब हो ही गई थी अब रबी की फसल गेंहू, आलू, मटर, चना, अलसी, सरसों और जौं की बुवाई भी नहीं हो पाई है।
ग्रामीण उमेद शर्मा, सतबीर, अशोक, संजय, राजेश नंबरदार, शमशेर, ब्रह्म पाल रोहताश, पृथ्वी, सतबीर नंबरदार, जिले सिंह, भाना राम, सुरेश, बोबेंद्र का कहना है कि इस बार तो उनकी खरीफ की फसल जलभराव से नष्ट हो चुकी और रबी की फसल की बुवाई नहीं हो पाई जिससे उन्हें दोहरी मार पड़ रही है।
प्रशासन की तरफ से खेतों से पानी निकासी के लिए लगी हुई मोटर और डोरी भी कहीं नजर नहीं आ रही है। मुआवजे के नाम पर कोई मरहम नहीं लगाया गया है जिससे किसानों में रोष है। ग्रामीणों का आरोप है कि सरकार व प्रशासन की उदासीनता के चलते आज किसान बदहाली के आंसू बहा रहे हैं।
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खेतों के ट्यूबवेल भी डूबे
ग्रामीण जय प्रकाश सहरावत ने बताया कि गांव के खेत पूरी तरह से डूबे हुए हैं। खेतों में भरे पानी से किसानों की दोनों फसलें चौपट हो गई। उन्होंने कहा कि प्रशासन व सरकार को गांव में जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान किया जाए। लोगों के ट्यूबवेल भी पानी में ही डूब गए हैं।
ग्रामीणों ने बताया कि खेतों में आज भी इतना अत्यधिक जलभराव है कि आने वाली फसल भी इन खेतों में नहीं उगाई जा सकेगी।
सांसद व विधायक कर चुके दौरा
ग्रामीणों ने बताया कि अगस्त माह से ही जलभराव बना हुआ है। उस समय सांसद दीपेंद्र हुड्डा व झज्जर विधायक गीता भुक्कल भी दौरा कर चुके थे। प्रशासनिक अधिकारियों ने भी दौरा किया था। उनको उम्मीद थी कि सरकार जरूर मुआवजे का मरहम लगाएगी लेकिन उनके अरमान धरे की तरह रह गए। उनको अभी तक एक रुपया भी नहीं मिला है।
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ग्रामीण उमेद शर्मा, सतबीर, अशोक, संजय, राजेश नंबरदार, शमशेर, ब्रह्म पाल रोहताश, पृथ्वी, सतबीर नंबरदार, जिले सिंह, भाना राम, सुरेश, बोबेंद्र का कहना है कि इस बार तो उनकी खरीफ की फसल जलभराव से नष्ट हो चुकी और रबी की फसल की बुवाई नहीं हो पाई जिससे उन्हें दोहरी मार पड़ रही है।
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प्रशासन की तरफ से खेतों से पानी निकासी के लिए लगी हुई मोटर और डोरी भी कहीं नजर नहीं आ रही है। मुआवजे के नाम पर कोई मरहम नहीं लगाया गया है जिससे किसानों में रोष है। ग्रामीणों का आरोप है कि सरकार व प्रशासन की उदासीनता के चलते आज किसान बदहाली के आंसू बहा रहे हैं।
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खेतों के ट्यूबवेल भी डूबे
ग्रामीण जय प्रकाश सहरावत ने बताया कि गांव के खेत पूरी तरह से डूबे हुए हैं। खेतों में भरे पानी से किसानों की दोनों फसलें चौपट हो गई। उन्होंने कहा कि प्रशासन व सरकार को गांव में जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान किया जाए। लोगों के ट्यूबवेल भी पानी में ही डूब गए हैं।
ग्रामीणों ने बताया कि खेतों में आज भी इतना अत्यधिक जलभराव है कि आने वाली फसल भी इन खेतों में नहीं उगाई जा सकेगी।
सांसद व विधायक कर चुके दौरा
ग्रामीणों ने बताया कि अगस्त माह से ही जलभराव बना हुआ है। उस समय सांसद दीपेंद्र हुड्डा व झज्जर विधायक गीता भुक्कल भी दौरा कर चुके थे। प्रशासनिक अधिकारियों ने भी दौरा किया था। उनको उम्मीद थी कि सरकार जरूर मुआवजे का मरहम लगाएगी लेकिन उनके अरमान धरे की तरह रह गए। उनको अभी तक एक रुपया भी नहीं मिला है।