{"_id":"4cfd4af0366da4351ffda70bdce329e6","slug":"heavy-fire-in-footwear-factory-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"फुटवियर फैक्टरी में भीषण आग","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
फुटवियर फैक्टरी में भीषण आग
ब्यूरो/अमर उजाला बहादुरगढ़
Updated Mon, 13 Jul 2015 01:41 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
एमआईई के पार्ट वन स्थित एक फुटवियर की फैक्टरी में भीषण आग भड़क उठी। गोदाम आग की चपेट में आने से लपटें दूर-दूर तक जा पहुंची। कुछ ही पल में पूरा गोदाम आग के गोलों में तब्दील हो गया।
विज्ञापन
इससे फैक्टरी में रखा कच्चा व तैयार माल जल गया। आग पर काबू पाने के लिए बहादुरगढ़ व दिल्ली से फायर ब्रिगेड की कई गाड़ियां मौके पर पहुंची। आग लगने की सूचना मिलते ही यहां के चौकी प्रभारी भी अपनी टीम के साथ पहुंचे।
विज्ञापन
आग से फैक्टरी मालिक को कितना नुकसान हुआ है इसका आंकलन नहीं हो पाया था। समाचार लिखे जाने तक फायर ब्रिगेडकर्मी आग बुझाने में जुटे हुए थे।
औद्योगिक क्षेत्र के प्लाट नंबर 848 व 849 में कुछ दिनों पहले ही फुटवियर फैक्टरी शिफ्ट हुई थी। रविवार को यहां अवकाश के चलते कोई कार्य नहीं होे रहा था। करीब साढ़े सात बजे फैक्टरी के गोदाम से धुआं उठने लगा।
विज्ञापन
देखते ही देखते गोदाम पूरी तरह से आग की लपटों में घिर गया। फैक्टरी का अन्य परिसर भी चपेट में आ गया। फैक्टरी में अभी यहां ज्यादा उत्पादन नहीं था। तैयार और कच्चा माल पहली मंजिल पर रखा था। वहीं पर आग लगी।
कुछ ही मिनटों में यह भयंकर रूप ले गई। फैक्टरी मालिकों की ओर से फायर ब्रिगेड को सूचना दी गई। फायर ब्रिगेडकर्मी मौके पहुंचे और चारों तरफ लगी आग पर काबू पाने का कार्य शुरू किया। आग पर काबू पाने के लिए बहादुरगढ़ व दिल्ली से आठ गाड़ियां मौके पर पहुंची हुई थी।
आग किन कारणों के चलते लगी इसको लेकर अभी स्पष्ट नहीं हुआ, लेकिन शॉर्ट सर्किट का अंदेशा जताया जा रहा है। जिस फैक्टरी में आग लगी थी वहां पहुंचने के लिए फायर ब्रिगेड दस्ते को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। ऊबड़-खाबड़ मार्ग व उसमें जमा कीचड़ के चलते दमकल कर्मियों को जल्द पहुंचना आसान नहीं रहा।
सड़कें बदहाल थी तो कुछ जगह भवन निर्माण सामग्री भी सड़क पर ही पड़ी हुई थी। इससे गाड़ियों को दूसरे रास्तों से लाकर फैक्टरी तक पहुंचाना पड़ा।