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व्यक्तिगत स्वार्थों के लिए नहीं, बल्कि मेहनतकशों के लिए लड़ रहे : उगराहां
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बहादुरगढ़। तीन कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली के टीकरी बॉर्डर पर चल रहा किसान आंदोलन मंगलवार को 165वें दिन में प्रवेश कर गया। पकोड़ा चौक के पास बीबी गुलाब कौर नगर के मंच से किसानों को भारतीय किसान यूनियन एकता (उगराहां) के प्रदेश अध्यक्ष जोगिंदर सिंह उगराहां ने संबोधित किया।
उन्होंने कहा कि इस आंदोलन की अगुआई कर रहे किसान नेता अपने व्यक्तिगत स्वार्थों के लिए घर छोड़कर आंदोलन में नहीं लगे हैं, बल्कि वे देश के हर मेहनतकश के भले के लिए अपने घर छोड़कर अपने घरों से सैकड़ों मील दूर दिल्ली की सीमाओं पर बैठे हैं। उगराहां ने कहा कि लोगों हमारे बारे में भी जानने की जरूरत है। बहुत से लोग इस भ्रम में हो सकते हैं कि काम छोड़ने वाले नेताओं को किसी तरह का लालच हो सकता है, लेकिन हमने तो हम सरकार का हिस्सा बनना चाहते, न सरपंच और न चेयरमैन बनना चाहते हैं। हमारा उद्देश्य केवल खेती किसानी को बचाना है।
उन्होंने कहा कि किसानों की एकता से कई मुद्दे हल होते हैं। कोई बैंक अधिकारी किसी डिफॉल्ट किसान को नहीं पकड़ सकता, किसी भी किसान, मजदूर की कोई भी कुर्की, नीलामी करने की हिम्मत नहीं कर सकता। सरकारी कार्यालयों में संगठन के लोगों की प्राथमिकता के आधार पर सुनवाई होती है। लोगों की एकता का ही परिणाम है कि कॉरपोरेट घरानों के सैकड़ों टोल प्लाजा, मॉल, पेट्रोल पंप सील कर दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि इस लड़ाई को लोगों के विश्वास के बिना नहीं जीता जा सकता।
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जिला बठिंडा के महासचिव हरजिंदर बग्गी ने कहा कि दुनिया के इतिहास ने दिखाया है कि जब भी अभिमानी पुरुष सत्ता में आते हैं, तो वे कामकाजी लोगों को कीड़े के रूप में मानते हैं। अपनी स्वयं की सनक और रिक्तियों के अनुसार राज्य चलाते हैं। ऐसे उत्पीड़कों की असामयिक मृत्यु हो जाती है। चाहे वह जर्मनी का हिटलर हो, मुगल साम्राज्य के नवाब हों या दमनकारी अंग्रेज। सरकार (केंद्र या राज्य) का जो भी रंग है, उसने 1947 से भारत पर शासन किया है, चाहे वह नरेंद्र मोदी आज सत्ता में हों। उनकी किस्मत पहले और लोगों की तरह ही होगी। अंत में जनता ही जीतेगी।
कोरोना महामारी के बारे में महिला नेता परमजीत कौर समुराई ने कहा कि राजनीतिक पार्टी के नेताओं के परिवारों में कोई भी कानून किसी व्यक्ति पर लागू नहीं होता। चाहे वह शादी हो या पार्टी आदि। लेकिन गरीब लोगों के पास खुशी या दु:ख के पांच से सात बार होते हैं। लेकिन कोरोना की आड़ में किसी भी साधन (वाहन) के हजारों रुपये के चालान काटे जाते हैं। इस समय की सरकारें कोरोना बीमारी के बहाने कामकाजी लोगों को लूट रही हैं और लोगों के संघर्ष को कुचलना चाहती हैं। मंगलवार की सभा में काफी संख्या में महिलाएं, युवा, किसान और मजदूर शामिल हुए। सुनील कुमार, हरजीत सिंह फतेहाबाद (हरियाणा), हरजीत सिंह महला चौक, जगदेव सिंह जोगा, कृष्ण सिंह फतेहगढ़, चन्ना जिला बरनाला ने भी सभा को संबोधित किया। सभी ने कहा कि मोदी सरकार को इन काले कानूनों को निरस्त करना होगा।
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उन्होंने कहा कि इस आंदोलन की अगुआई कर रहे किसान नेता अपने व्यक्तिगत स्वार्थों के लिए घर छोड़कर आंदोलन में नहीं लगे हैं, बल्कि वे देश के हर मेहनतकश के भले के लिए अपने घर छोड़कर अपने घरों से सैकड़ों मील दूर दिल्ली की सीमाओं पर बैठे हैं। उगराहां ने कहा कि लोगों हमारे बारे में भी जानने की जरूरत है। बहुत से लोग इस भ्रम में हो सकते हैं कि काम छोड़ने वाले नेताओं को किसी तरह का लालच हो सकता है, लेकिन हमने तो हम सरकार का हिस्सा बनना चाहते, न सरपंच और न चेयरमैन बनना चाहते हैं। हमारा उद्देश्य केवल खेती किसानी को बचाना है।
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उन्होंने कहा कि किसानों की एकता से कई मुद्दे हल होते हैं। कोई बैंक अधिकारी किसी डिफॉल्ट किसान को नहीं पकड़ सकता, किसी भी किसान, मजदूर की कोई भी कुर्की, नीलामी करने की हिम्मत नहीं कर सकता। सरकारी कार्यालयों में संगठन के लोगों की प्राथमिकता के आधार पर सुनवाई होती है। लोगों की एकता का ही परिणाम है कि कॉरपोरेट घरानों के सैकड़ों टोल प्लाजा, मॉल, पेट्रोल पंप सील कर दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि इस लड़ाई को लोगों के विश्वास के बिना नहीं जीता जा सकता।
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जिला बठिंडा के महासचिव हरजिंदर बग्गी ने कहा कि दुनिया के इतिहास ने दिखाया है कि जब भी अभिमानी पुरुष सत्ता में आते हैं, तो वे कामकाजी लोगों को कीड़े के रूप में मानते हैं। अपनी स्वयं की सनक और रिक्तियों के अनुसार राज्य चलाते हैं। ऐसे उत्पीड़कों की असामयिक मृत्यु हो जाती है। चाहे वह जर्मनी का हिटलर हो, मुगल साम्राज्य के नवाब हों या दमनकारी अंग्रेज। सरकार (केंद्र या राज्य) का जो भी रंग है, उसने 1947 से भारत पर शासन किया है, चाहे वह नरेंद्र मोदी आज सत्ता में हों। उनकी किस्मत पहले और लोगों की तरह ही होगी। अंत में जनता ही जीतेगी।
कोरोना महामारी के बारे में महिला नेता परमजीत कौर समुराई ने कहा कि राजनीतिक पार्टी के नेताओं के परिवारों में कोई भी कानून किसी व्यक्ति पर लागू नहीं होता। चाहे वह शादी हो या पार्टी आदि। लेकिन गरीब लोगों के पास खुशी या दु:ख के पांच से सात बार होते हैं। लेकिन कोरोना की आड़ में किसी भी साधन (वाहन) के हजारों रुपये के चालान काटे जाते हैं। इस समय की सरकारें कोरोना बीमारी के बहाने कामकाजी लोगों को लूट रही हैं और लोगों के संघर्ष को कुचलना चाहती हैं। मंगलवार की सभा में काफी संख्या में महिलाएं, युवा, किसान और मजदूर शामिल हुए। सुनील कुमार, हरजीत सिंह फतेहाबाद (हरियाणा), हरजीत सिंह महला चौक, जगदेव सिंह जोगा, कृष्ण सिंह फतेहगढ़, चन्ना जिला बरनाला ने भी सभा को संबोधित किया। सभी ने कहा कि मोदी सरकार को इन काले कानूनों को निरस्त करना होगा।