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Jhajjar-Bahadurgarh News: दुष्कर्म का झूठा केस दर्ज कराने वाले पिता को कोर्ट बंद होने तक कारावास की सजा
Thu, 17 Jul 2025 12:23 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
Updated Thu, 17 Jul 2025 12:23 AM IST
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झज्जर। दुष्कर्म का झूठा केस दर्ज कराने पर एडिशनल सेशन जज राजकुमार यादव की विशेष अदालत ने युवती के पिता को कोर्ट बंद होने तक कारावास की सजा सुनाई। अदालत ने व्यक्ति पर 500 रुपये जुर्माना भी लगाया है।
बेरी क्षेत्र निवासी एक व्यक्ति ने बेरी थाने में 13 अगस्त 2013 को बेटी से दुष्कर्म की शिकायत दर्ज कराई थी। आरोप लगाया था कि एक युवक उसकी बेटी को बहला-फुसलाकर ले गया। युवती अपने साथ सोने की चेन, एक जोड़ी बाली और 4700 रुपये भी ले गई थी। पुलिस ने शिकायत पर केस दर्ज कर लिया था।
अदालत ने 5 मार्च 2014 को आरोपी को उद्घोषित अपराधी घोषित कर दिया था। इसके बाद 23 मार्च 2024 को आरोपी को पुलिस ने गिरफ्तार किया। जब सुनवाई हुई तो युवती आरोपों से मुकर गई। इसके बाद 18 अप्रैल 2025 को आरोपी को बरी कर दिया गया था।
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इस मामले में आरोपी युवक के वकील ने झूठा केस दर्ज कराने पर कोर्ट में शिकायत दी थी। 15 जुलाई को इस मामले में युवती का पिता अदालत में पेश हुआ। यहां उसने झूठा केस दर्ज कराने की बात कबूल ली। अदालत ने प्रतिवादी-अभियुक्त को दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 344 (अब भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 383) के तहत दोषी ठहराते हुए उसे सजा सुनाई।
8 जुलाई को भी एक मामले में सुनाई गई थी ऐसी सजा
एडिशनल सेशन जज राजकुमार यादव की विशेष अदालत ने 8 जुलाई को एक अन्य मामले में दुष्कर्म का झूठा केस दर्ज कराने पर एक युवती को भी ऐसी ही सजा सुनाई थी। अदालत ने युवती को कोर्ट बंद होने तक कारावास की सजा सुनाई थी।
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बेरी क्षेत्र निवासी एक व्यक्ति ने बेरी थाने में 13 अगस्त 2013 को बेटी से दुष्कर्म की शिकायत दर्ज कराई थी। आरोप लगाया था कि एक युवक उसकी बेटी को बहला-फुसलाकर ले गया। युवती अपने साथ सोने की चेन, एक जोड़ी बाली और 4700 रुपये भी ले गई थी। पुलिस ने शिकायत पर केस दर्ज कर लिया था।
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अदालत ने 5 मार्च 2014 को आरोपी को उद्घोषित अपराधी घोषित कर दिया था। इसके बाद 23 मार्च 2024 को आरोपी को पुलिस ने गिरफ्तार किया। जब सुनवाई हुई तो युवती आरोपों से मुकर गई। इसके बाद 18 अप्रैल 2025 को आरोपी को बरी कर दिया गया था।
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इस मामले में आरोपी युवक के वकील ने झूठा केस दर्ज कराने पर कोर्ट में शिकायत दी थी। 15 जुलाई को इस मामले में युवती का पिता अदालत में पेश हुआ। यहां उसने झूठा केस दर्ज कराने की बात कबूल ली। अदालत ने प्रतिवादी-अभियुक्त को दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 344 (अब भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 383) के तहत दोषी ठहराते हुए उसे सजा सुनाई।
8 जुलाई को भी एक मामले में सुनाई गई थी ऐसी सजा
एडिशनल सेशन जज राजकुमार यादव की विशेष अदालत ने 8 जुलाई को एक अन्य मामले में दुष्कर्म का झूठा केस दर्ज कराने पर एक युवती को भी ऐसी ही सजा सुनाई थी। अदालत ने युवती को कोर्ट बंद होने तक कारावास की सजा सुनाई थी।