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ढाकला में नहीं करेंगे किसान अब धान की खेती, हाल मे लगाई धान की फसल भी कर दी नष्ट
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झज्जर। हरियाणा सरकार की ओर से जल संरक्षण व फसल विविधीकरण को प्रोत्साहन के लिए बीते वर्ष चलाई गई मेरा पानी-मेरी विरासत योजना के सकारात्मक परिणाम सामने लगे हैं। जिले के गांव ढाकला के किसानों ने इस बार सामूहिक रूप से अपने खेड़े की 3445 एकड़ भूमि में धान की खेती नहीं करने का निर्णय लिया है। जबकि बीते वर्ष गांव के तीन हजार एकड़ रकबे में धान लगाई गई थी।
इस बार दो किसानों ने स्वयं अपनी फसल नष्ट करते हुए कम पानी वाली फसल अपनाने की पहल भी कर दी है। किसानों का मानना है कि धान में पानी की अधिक खपत से फसल की लागत तो बढ़ती है साथ ही भूजल का भी अत्याधिक दोहन होता है। जबकि अन्य फसलों में कम लागत होने व सरकार की प्रोत्साहन राशि से पैसा और पानी दोनों की बचत होगी।
इस वर्ष राज्य में दो लाख एकड़ भूमि को योजना के अधीन लाने का लक्ष्य है। गिरते भूजल स्तर के काकरण हरियाणा के 36 खंड डार्क जोन में आ चुके हैं। अगर जल संरक्षण के प्रति अभी से सजगता नहीं बरती गई तो भविष्य में स्थिति और ज्यादा खराब हो सकती है। बीते वर्ष भी राज्य के 95 हजार एकड़ भूमि में धान की बजाय कम पानी से होने वाली फसलों की खेती गई थी। प्रदेश में मेरा पानी-मेरी विरासत योजना के तहत एक लाख 13 हजार 885 किसान अब तक एक लाख 26 हजार 928 हेक्टेयर में धान की बजाय अन्य कम लागत वाली फसलों की खेती कर रहे हैं।
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पूर्व कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री ओमप्रकाश धनखड़ के गांव ढाकला में धान की फसल नष्ट करने वाले किसान संतराम व जयपाल ने पंचायत की जमीन पट्टे पर लेकर इस बार धान लगाई थी लेकिन जल संरक्षण के प्रति गांव में बनी जागरूकता व हरियाणा सरकार की मेरा पानी-मेरी विरासत से उन्होंने अपनी फसल नष्ट करने का निर्णय लिया। इन किसानों के इस कदम की न केवल आस-पास बल्कि राज्य स्तर पर भी चर्चा हो रही है। गांव ढाकला के ही अन्य किसान सुरेंद्र व रामरतन ने बताया कि बीते वर्ष धान की खेती करने वालों में इस बार मेरा पानी-मेरी विरासत योजना के पोर्टल पर पंजीकरण कराने में तेजी भी नजर आ रही है। उल्लेखनीय है कि हरियाणा सरकार ने किसानों की मेरा पानी-मेरी विरासत योजना के लिए पंजीकरण कराने की अंतिम तिथि 25 जून कर दी है। इस योजना के तहत धान के स्थान पर कम पानी में उगने वाली फसलें जैसे मक्का, कपास, बाजरा, दलहन, सब्जियां आदि की खेती करने वालों को प्रति एकड़ सात हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी।
इतना ही नहीं इस वर्ष इस योजना में एग्रो फोरेस्ट्री को भी जोड़ा गया है। जिसके तहत धान की बजाय प्रति एकड़ 400 पेड़ लगाने पर हरियाणा सरकार किसान को प्रति वर्ष 10,000 रुपये प्रति एकड़ प्रोत्साहन राशि भी प्रदान करेगी।
- 750 साल पहले बसा था गांव
लगभग 750 साल पहले बसे गांव ढाकला ने हमेशा इस क्षेत्र और प्रदेश को नई दिशा देने का काम किया है। प्रथम विश्व युद्ध के विक्टोरिया क्रास विजेता बदलूराम, नेताजी सुभाषचंद्र बोस के सहयोगी रहे कैप्टन कंवल सिंह, पहलवान ढाला राम, समाजसेवी बाबू रूपचंद ढाकला गांव में जन्मे और विश्व भर में गांव का नाम रोशन किया। आजादी का आंदोलन हो या आजादी के बाद हिंदी आंदोलन हमेशा ढाकला के वीर सेनानी अग्रणी रहे। उसी समृद्ध परंपरा को आगे बढ़ाते हुए राजनीतिक क्षेत्र में भाजपा के वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष ओम प्रकाश धनखड़, समाजसेवी एनआरआई सतीश गुप्ता, बिग्रेडियर सुरेंद्र धनखड़, बिग्रेडियर कुलबीर सिंह ने गांव ढाकला का नाम रोशन करते हुए युवाओं के प्रेरणास्रोत बने हुए हैं।
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इस बार दो किसानों ने स्वयं अपनी फसल नष्ट करते हुए कम पानी वाली फसल अपनाने की पहल भी कर दी है। किसानों का मानना है कि धान में पानी की अधिक खपत से फसल की लागत तो बढ़ती है साथ ही भूजल का भी अत्याधिक दोहन होता है। जबकि अन्य फसलों में कम लागत होने व सरकार की प्रोत्साहन राशि से पैसा और पानी दोनों की बचत होगी।
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इस वर्ष राज्य में दो लाख एकड़ भूमि को योजना के अधीन लाने का लक्ष्य है। गिरते भूजल स्तर के काकरण हरियाणा के 36 खंड डार्क जोन में आ चुके हैं। अगर जल संरक्षण के प्रति अभी से सजगता नहीं बरती गई तो भविष्य में स्थिति और ज्यादा खराब हो सकती है। बीते वर्ष भी राज्य के 95 हजार एकड़ भूमि में धान की बजाय कम पानी से होने वाली फसलों की खेती गई थी। प्रदेश में मेरा पानी-मेरी विरासत योजना के तहत एक लाख 13 हजार 885 किसान अब तक एक लाख 26 हजार 928 हेक्टेयर में धान की बजाय अन्य कम लागत वाली फसलों की खेती कर रहे हैं।
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पूर्व कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री ओमप्रकाश धनखड़ के गांव ढाकला में धान की फसल नष्ट करने वाले किसान संतराम व जयपाल ने पंचायत की जमीन पट्टे पर लेकर इस बार धान लगाई थी लेकिन जल संरक्षण के प्रति गांव में बनी जागरूकता व हरियाणा सरकार की मेरा पानी-मेरी विरासत से उन्होंने अपनी फसल नष्ट करने का निर्णय लिया। इन किसानों के इस कदम की न केवल आस-पास बल्कि राज्य स्तर पर भी चर्चा हो रही है। गांव ढाकला के ही अन्य किसान सुरेंद्र व रामरतन ने बताया कि बीते वर्ष धान की खेती करने वालों में इस बार मेरा पानी-मेरी विरासत योजना के पोर्टल पर पंजीकरण कराने में तेजी भी नजर आ रही है। उल्लेखनीय है कि हरियाणा सरकार ने किसानों की मेरा पानी-मेरी विरासत योजना के लिए पंजीकरण कराने की अंतिम तिथि 25 जून कर दी है। इस योजना के तहत धान के स्थान पर कम पानी में उगने वाली फसलें जैसे मक्का, कपास, बाजरा, दलहन, सब्जियां आदि की खेती करने वालों को प्रति एकड़ सात हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी।
इतना ही नहीं इस वर्ष इस योजना में एग्रो फोरेस्ट्री को भी जोड़ा गया है। जिसके तहत धान की बजाय प्रति एकड़ 400 पेड़ लगाने पर हरियाणा सरकार किसान को प्रति वर्ष 10,000 रुपये प्रति एकड़ प्रोत्साहन राशि भी प्रदान करेगी।
- 750 साल पहले बसा था गांव
लगभग 750 साल पहले बसे गांव ढाकला ने हमेशा इस क्षेत्र और प्रदेश को नई दिशा देने का काम किया है। प्रथम विश्व युद्ध के विक्टोरिया क्रास विजेता बदलूराम, नेताजी सुभाषचंद्र बोस के सहयोगी रहे कैप्टन कंवल सिंह, पहलवान ढाला राम, समाजसेवी बाबू रूपचंद ढाकला गांव में जन्मे और विश्व भर में गांव का नाम रोशन किया। आजादी का आंदोलन हो या आजादी के बाद हिंदी आंदोलन हमेशा ढाकला के वीर सेनानी अग्रणी रहे। उसी समृद्ध परंपरा को आगे बढ़ाते हुए राजनीतिक क्षेत्र में भाजपा के वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष ओम प्रकाश धनखड़, समाजसेवी एनआरआई सतीश गुप्ता, बिग्रेडियर सुरेंद्र धनखड़, बिग्रेडियर कुलबीर सिंह ने गांव ढाकला का नाम रोशन करते हुए युवाओं के प्रेरणास्रोत बने हुए हैं।