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लखीमपुर खीरी कांड को लेकर गरजे किसान, सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में एसआईटी का गठन करने की मांग

Tue, 05 Oct 2021 12:03 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Tue, 05 Oct 2021 12:03 AM IST
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Farmers roar over Lakhimpur Kheri case, demand for formation of SIT under the supervision of Supreme Court
उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी कांड को लेकर किसानों ने डीसी कार्यालय का घेराव किया। किसानों ने डीसी के माध्यम से राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में लखीमपुर खीरी कांड की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में एसआईटी का गठन करने की मांग की गई। अनाज मंडी परिसर से किसानों के विभिन्न संगठनों ने लघु सचिवालय तक पैदल मार्च किया और डीसी श्याम लाल पूनिया को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा।
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अनाज मंडी परिसर में भारतीय किसान यूनियन, चढूनी के पदाधिकारी व किसान नेता, पंजाब से भारतीय किसान एकता उग्राहा, अखिल भारतीय किसान संघ, सर्व कर्मचारी संघ के नेता व पदाधिकारियों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। लखीमपुर खीरी के आरोपियों को जल्द पकड़ कर सजा देने की मांग जोरशोर से उठाई।
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अनाज मंडी से नारेबाजी करते हुए सभी किसान संगठन लघु सचिवालय परिसर के मुख्य गेट पर पहुंचे तो पुलिस कर्मीयों ने बैरिकेड लगाकर रोकने का प्रयास किया गया। किसान नेताओं ने स्पष्ट किया की वे प्रशासन से किसी भी प्रकार का टकराव नहीं चाहते हैं। वे केवल अपनी मांगों को लेकर ज्ञापन सौपने के लिए आए हैं और शांतिपूर्वक ज्ञापन सौंपने का काम करेंगे। इस के बाद किसान सीधे सचिवालय में घुस गए और सरकार के खिलाफ नारेबाजी करने लगे।
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उतर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री व उसके पुत्र ने गाड़ी से कुचल कर 6 किसानों व 2 अन्य लोगों को मौत के घाट उतार दिया। निहत्थे किसानों पर गोलियां भी चलाई गई थी। किसान संगठनों ने उपायुक्त के माध्यम से राष्ट्रपति को सौंप कर मांग की गई है कि उतर प्रदेश के केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा व उसके पुत्र आशीष मिश्रा के खिलाफ तुरंत प्रभाव से कानूनी कार्रवाई की जाए।
- केंद्रीय मंत्री के पद से बर्खास्त किया जाए और कानून उसे जल्द से जल्द सजा दे।
- केंद्रीय गृह मंत्री के बेटे आशीष मिश्रा व उसके साथियों पर किसानों की हत्या करने का मुकदमा दर्ज करके गिरफ्तारी की जाए।
- इस मामले को की जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में एसआईटी का गठन किया जाए।
- प्रदेश के मुख्यमंत्री के विवादित बयान पर भड़के किसानों ने मुख्यमंत्री को दी कड़ी चेतावनी बोले, आपसी भाईचारा खराब करवाने की कोशिश न करें मुख्यमंत्री मनोहर लाल।
किसानों ने उपायुक्त को जिले के विभिन्न गांवों में जलभराव की स्थिति से अवगत करवाया और बाजरे की खरीद न होने को लेकर भी बातचीत की गई। डीसी ने किसानों को बताया कि जिले के काफी क्षेत्र में जलभराव की समस्या है तो संबंधित तहसील के एसडीएम से बात करके बारिश के पानी को निकालने की व्यवस्था करवा सकते हैं। बाजरा खरीद को लेकर डीसी ने बताया कि सरकार के आदेश अभी तक उनके पास नहीं पहुंचे हैं लेकिन 25 फीसदी बाजरे की खरीद सरकार की और से की जा सकती है।

संयुक्त किसान मोर्चा से सैैकड़ों की संख्या में किसान नेता, कार्यकर्ता व पदाधिकारी पहुंचे। भारतीय किसान एकता उग्राहा से व संयुक्त किसान मोर्चा के सदस्य जोगेंद्र सिंह उग्राहा, भारतीय किसान यूनियन की प्रदेशाध्यक्ष सुमन हुड्डा, जिलाध्यक्ष ममता कादयान, अखिल भारतीय किसान संघ के जिलाध्यक्ष जेपी बैनीवाल, चिंटू छारा, सचिव रामचंद्र यादव, सुरेेंद्र सिवाच, अनाज मंडी बेरी के प्रधान तेजबीर सिंह कादयान, किसान नेत्री रेनू बाघपुर, सविता, जगबीर सफीपुर, उमराव बेरी, जयपाल गुढ़ा, धनखड़ खाप के प्रधान युद्धवीर धनखड़, सरजीत गुलिया के अलावा सैकड़ों की संख्या में किसान मौजूद रहे।

  प्रदर्शन करते हुए लघु सचिवालय में जाते किसान।

प्रदर्शन करते हुए लघु सचिवालय में जाते किसान। - फोटो : Jhjhar

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