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29 का संसद मार्च रद्द होने पर भी टीकरी बार्डर पर पहुंचे किसान

Sun, 28 Nov 2021 12:33 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sun, 28 Nov 2021 12:33 AM IST
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farmers reached tikri border even the cancellation of 29th parliament march
बार्डर पर सभा में अपने नेताओं के विचार सुनते किसान। संवाद - फोटो : Bahadurgarh
बहादुरगढ़। एसकेएम द्वारा टीकरी बॉर्डर से 29 को ट्रैक्टरों से संसद मार्च का कार्यक्रम रद्द करने के फैसले के बावजूद किसानों का दिल्ली के टीकरी बार्डर पर आना जारी रहा। यहां हुई सभा में पंजाब-हरियाणा, पश्चिम बंगाल, राजस्थान समेत कई सूबों से आए किसानों की भीड़ रही। उधर, टीकरी बार्डर पर स्टेज के पीछे दिल्ली पुलिस ने किसानों के धरने को गैरकानूनी ठहराते हुए एक वैधानिक चेतावनी बोर्ड लगा दिया है। इस पर कई किसानों ने शांति के साथ कड़ी प्रतिक्रिया दी।
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भारतीय किसान यूनियन डकोंदा के नेता बलदेव सिंह भाई रूपा ने किसानों को संबोधित करते हुए बताया कि सरकार ने पराली जलाने वाले कानून को वापस ले लिया है और सरकार ने जितने भी किसानों पर मुकदमे दर्ज हुए हैं उनको भी वापस लेने की बात कही है। एमएसपी कानून पर एक कमेटी बनाई गई है जिसमें समय सीमा तय की जाएगी। किसान मोर्चा के आदमी इस कमेटी में शामिल होंगे।
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किसान नेताओं ने सभा को जानकारी दी कि 29 का प्रस्तावित संसद मार्च फिलहाल टल गया है। अब 4 दिसंबर तक संसद के फैसले की प्रतीक्षा रहेगी। लेकिन सभी मांगें पूरी होने तक आंदोलन चलता रहेगा, आंदोलन की जगह और दिशा बेशक बदल जाए। सरकार को किसानों के साथ वार्ता की टेबल पर आना होगा। दिल्ली पुलिस द्वारा बार्डर पर लगाए गए बोर्ड के बारे में युवा किसान जगदीप सिंह व सुरिन्दर सिंह ने कहा कि आदेशों को मानने से मांगें कभी पूरी नहीं हो सकती। हम आंदोलनकारी ऐसे आदेशों को बहुत दिन से झेल रहे हैं। आंदोलन के दौरान जान गंवाने वाले मानसा के एक किसान के परिजनों को टीकरी बार्डर स्टेज पर सम्मानित किया गया।
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कुलदीप ढांडा भारतीय किसान यूनियन जुलाना ने कहा कि गत दिवस हमारे आंदोलन को पूरा एक साल हो चुका है और तीनों कृषि कानूनों को संसद में रद्द करवाकर जीत कर अपने घर जाएंगे। उन्होंने पंजाबी इंकलाबी गीत भी गाया। पश्चिम बंगाल से भी कई किसानों ने टीकरी बार्डर पर पहुंचकर अपना समर्थन दिया।
परगट सिंह भारतीय किसान यूनियन राजेवाल तलवंडी पंजाब ने कहा कि आंदोलन की वर्षगांठ पर उमड़ी किसानों की भीड़ ने साबित कर दिया कि किसान एकजुट हैं। उन्होंने सभी किसानों को वर्षगांठ में शामिल होने पर बधाई दी। उन्होंने कहा कि वे संसद सत्र में इन कानूनों को निरस्त करवाकर ही रहेंगे और एमएसपी पर कानून बनवाएंगे।
बीकेयू पंजाब के नक्षत्र ने भी किसानों को अपना समर्थन दिया। शहीद भगत सिंह के भांजे प्रो. जगमोहन सिंह ने कहा कि हमारे देश को कॉरपोरेट घराने लूट रहे हैं। कानूनों को रद्द करवाने के अलावा एमएसपी पर कानून बनवाना है। प्रधानमंत्री कह रहे हैं हम किसानों की आय दोगुनी कर देंगे लेकिन सरकार ने किसानों की आय को बहुत कम किया है। हमें इस सरकार के खिलाफ जंग लड़नी है और आंदोलन में संघर्ष करना है। किसानों की मेहनत का फल है कि यह तीनों कानून रद्द किए जा रहे हैं। उन्होंने किसानों से अपनी सेहत का भी ख्याल रखने की अपील की और कहा कि वे आंदोलन को मजबूत बनाकर रखें, जीतकर ही घर जाएंगे।

इस अवसर पर सेवानिवृत्त प्राचार्य शारदा दीक्षित, जियालाल, सूरज किरण उचाना मंडी जींद, गुरमीत कौर पटियाला पंजाब, अमरीक सिंह भाई के फबड़े जम्हूरी किसान यूनियन पंजाब, बारूराम भारतीय किसान यूनियन टिकैत गुट जींद, कुलवंत सिंह मौलवी वाला कुलहिंद किसान सभा पंजाब ने भी अपने विचार पेश किए।
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