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किसान अपनी जमीन और फसल बचाने के लिए ठंड में आंदोलन करने के लिए मजबूर: बजरंग गर्ग
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डीघल टोल प्लाजा पर नारेबाजी करते बजरंग गर्ग व अन्य। संवाद
- फोटो : Jhjhar
डीघल टोल प्लाजा पर साथियों के साथ पहुंच कर हरियाणा प्रदेश व्यापार मंडल के प्रांतीय अध्यक्ष व अखिल भारतीय व्यापार मंडल के राष्ट्रीय महासचिव बजरंग गर्ग ने किसान आंदोलन का समर्थन किया।
उन्होंने काह कि देश और प्रदेश में सबसे ज्यादा किसान दुखी हैं। देश के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है की किसान अपनी जमीन और फसल बचाने के लिए कड़ाके की ठंड में 47 दिन से सड़क पर बैठकर आंदोलन कर रहे हैं, जिसमें काफी किसान अपनी जान भी गंवा चुके हैं। आज तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने जान गंवा चुके किसानों के लिए दुख नहीं प्रकट किया है।
प्रांतीय अध्यक्ष ने किसान आंदोलन में मृतकों के परिवारों को सरकार की तरफ से कम से कम 50 लाख रुपये मुआवजा व एक सरकारी नौकरी देने की मांग करते हुए किसानों पर दर्ज हुए झूठे मुकदमे के तुरंत वापस लेने की मांग की। गर्ग ने कहा जब किसान और आढ़ती नया कृषि कानून नहीं चाह रहे हैं तो केंद्र सरकार उन पर जबरन क्यों थोपना चाह रही है। इससे साफ है कि प्रधानमंत्री अपने चहेते अंबानी-अडानी और बड़ी-बड़ी कंपनियों को लाभ पहुंचाने के लिए यह कानून बनाएं हैं।
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गर्ग ने प्रधानमंत्री से अपील की कि वह अपनी जिद छोड़कर कृषि कानून को तुरंत वापस ले। आज देश में जो किसानों के साथ टकराव की स्थिति सरकार ने बना रखी है उसे खत्म किया जाए, जबकि कृषि कानून से किसान, आढ़ती, मजदूर, मंडी में काम करने वाले मुनीम, ट्रांसपोर्टर बर्बाद हो जाएंगे और देश में पहले से ज्यादा महंगाई बढ़ेगी और लाखों लोग बेरोजगार होंगे। कृषि कानून से सिर्फ बड़ी-बड़ी कंपनियों को लाभ होगा और देश व प्रदेश की आम जनता को बड़ा भारी नुकसान है इसलिए देश का हर वर्ग किसान आंदोलन के साथ मजबूती से खड़ा है। इस अवसर पर व्यापार मंडल प्रदेश महासचिव रमेश खुराना, हरियाणा किसान यूनियन महासचिव डम्पी पहलवान, प्रधान जय सिंह अहलावत, जय भगवान लोघल, सरपंच हंसराज, नरेश अहलावत, मांगेराम सरपंच आदि किसान नेताओं ने अपने विचार रखे।
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उन्होंने काह कि देश और प्रदेश में सबसे ज्यादा किसान दुखी हैं। देश के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है की किसान अपनी जमीन और फसल बचाने के लिए कड़ाके की ठंड में 47 दिन से सड़क पर बैठकर आंदोलन कर रहे हैं, जिसमें काफी किसान अपनी जान भी गंवा चुके हैं। आज तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने जान गंवा चुके किसानों के लिए दुख नहीं प्रकट किया है।
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प्रांतीय अध्यक्ष ने किसान आंदोलन में मृतकों के परिवारों को सरकार की तरफ से कम से कम 50 लाख रुपये मुआवजा व एक सरकारी नौकरी देने की मांग करते हुए किसानों पर दर्ज हुए झूठे मुकदमे के तुरंत वापस लेने की मांग की। गर्ग ने कहा जब किसान और आढ़ती नया कृषि कानून नहीं चाह रहे हैं तो केंद्र सरकार उन पर जबरन क्यों थोपना चाह रही है। इससे साफ है कि प्रधानमंत्री अपने चहेते अंबानी-अडानी और बड़ी-बड़ी कंपनियों को लाभ पहुंचाने के लिए यह कानून बनाएं हैं।
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गर्ग ने प्रधानमंत्री से अपील की कि वह अपनी जिद छोड़कर कृषि कानून को तुरंत वापस ले। आज देश में जो किसानों के साथ टकराव की स्थिति सरकार ने बना रखी है उसे खत्म किया जाए, जबकि कृषि कानून से किसान, आढ़ती, मजदूर, मंडी में काम करने वाले मुनीम, ट्रांसपोर्टर बर्बाद हो जाएंगे और देश में पहले से ज्यादा महंगाई बढ़ेगी और लाखों लोग बेरोजगार होंगे। कृषि कानून से सिर्फ बड़ी-बड़ी कंपनियों को लाभ होगा और देश व प्रदेश की आम जनता को बड़ा भारी नुकसान है इसलिए देश का हर वर्ग किसान आंदोलन के साथ मजबूती से खड़ा है। इस अवसर पर व्यापार मंडल प्रदेश महासचिव रमेश खुराना, हरियाणा किसान यूनियन महासचिव डम्पी पहलवान, प्रधान जय सिंह अहलावत, जय भगवान लोघल, सरपंच हंसराज, नरेश अहलावत, मांगेराम सरपंच आदि किसान नेताओं ने अपने विचार रखे।