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श्रद्धापूर्वक दिया सूर्य देव को शाम का अर्घ्य
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faithfully given sun god is a part of evening
- फोटो : Bahadurgarh
छठ पर्व के तीसरे दिन पूजन स्थलों/घाटों पर जबरदस्त रौनक रही। व्रतधारियों ने दोपहर तक पूजा आदि के सामान की खरीददारी की और दोपहर बाद पूजा घाटों पर लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा। पानी में खड़े होकर व्रतियों ने डूबते सूर्य को अर्घ्य देकर धन-धान्य, समृद्धि की मंगल कामना की। अब रविवार को सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य देकर पर्व संपन्न किया जाएगा।
नहाय-खाय और खरना के बाद तीसरे दिन व्रतधारियों को सूर्य देव को शाम का अर्घ्य देना था। इसलिए सुबह से ही बाजार में पूजा-पाठ और प्रसाद आदि के सामान की खरीददारी जोरों पर रही। रेलवे रोड, नाहरा नाहरी रोड और मेन बाजार में सजी दुकानों पर दोपहर तक लोगों ने जमकर खरीदारी की। इसके बाद व्रतधारियों ने पूजा स्थल/घाट जाने की तैयारी शुरू कर दी। ढोल-बाजे के साथ, पारंपरिक गीत गाती हुई व्रतधारी महिलाएं पूजा स्थल पर पहुंची। बांस की टोकरी में पूजन सामग्री और प्रसाद एवं ईख के साथ व्रती पानी में खड़े हो गए। घंटों तक व्रतधारी पानी में खड़े होकर सूर्य देव के अस्त होने का इंतजार करते रहे। जैसे ही सूर्य देव अस्त होने लगे तो महिलाओं ने गीत गाने शुरू कर दिए और सूर्य पूजा शुरू कर दी।
आज सूर्योदय पूजा
आज (रविवार की अलसुबह) व्रतधारी स्नान आदि करके पूजा की तैयारियां शुरू कर देंगे। टोकरियों में पूजन-सामग्री और फल, प्रसाद आदि सजाकर व्रती पानी में उतरेंगे। व्रती महिलाएं गीत गाकर सूर्य देव का स्वागत करेंगी। सूर्य देव उदय होते ही पूजा शुरू हो जाएगी। इसी के साथ चार दिन तक चलने वाला यह पर्व संपन्न हो जाएगा। व्रती गुड़ और आटे से बने ठेकुआ (प्रसाद) को खाकर अपना व्रत तोड़ेंगे।
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नहाय-खाय और खरना के बाद तीसरे दिन व्रतधारियों को सूर्य देव को शाम का अर्घ्य देना था। इसलिए सुबह से ही बाजार में पूजा-पाठ और प्रसाद आदि के सामान की खरीददारी जोरों पर रही। रेलवे रोड, नाहरा नाहरी रोड और मेन बाजार में सजी दुकानों पर दोपहर तक लोगों ने जमकर खरीदारी की। इसके बाद व्रतधारियों ने पूजा स्थल/घाट जाने की तैयारी शुरू कर दी। ढोल-बाजे के साथ, पारंपरिक गीत गाती हुई व्रतधारी महिलाएं पूजा स्थल पर पहुंची। बांस की टोकरी में पूजन सामग्री और प्रसाद एवं ईख के साथ व्रती पानी में खड़े हो गए। घंटों तक व्रतधारी पानी में खड़े होकर सूर्य देव के अस्त होने का इंतजार करते रहे। जैसे ही सूर्य देव अस्त होने लगे तो महिलाओं ने गीत गाने शुरू कर दिए और सूर्य पूजा शुरू कर दी।
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आज सूर्योदय पूजा
आज (रविवार की अलसुबह) व्रतधारी स्नान आदि करके पूजा की तैयारियां शुरू कर देंगे। टोकरियों में पूजन-सामग्री और फल, प्रसाद आदि सजाकर व्रती पानी में उतरेंगे। व्रती महिलाएं गीत गाकर सूर्य देव का स्वागत करेंगी। सूर्य देव उदय होते ही पूजा शुरू हो जाएगी। इसी के साथ चार दिन तक चलने वाला यह पर्व संपन्न हो जाएगा। व्रती गुड़ और आटे से बने ठेकुआ (प्रसाद) को खाकर अपना व्रत तोड़ेंगे।
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