फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Jhajjar/Bahadurgarh News ›   exclusive

एसएमओ हैं न विशेषज्ञ चिकित्सक, कैसे लड़ेंगे कोरोना से जंग

Wed, 29 Dec 2021 12:57 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Wed, 29 Dec 2021 12:57 AM IST
विज्ञापन
exclusive
मनोज कौशिक
विज्ञापन

बादली। कोरोना के नए वैरिएंट ओमिक्रॉन के मामले बढ़ने के बाद सरकार लोगों को बचाव के लिए जागरूक कर रही है वहीं अस्पतालों में पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बादली में जरूरत के हिसाब से न तो चिकित्सक हैं और न संसाधन। हालत यह है कि कोई भी विशेषज्ञ चिकित्सक अस्पताल में नहीं है। हर किसी की नजर कोविड की तीसरी आशंकित लहर पर लगी है, लेकिन बादली में कोई तैयारी दिखाई नहीं दे रही।
सीएचसी में एसएमओ का पद खाली है। कोई विशेषज्ञ चिकित्सक नहीं है। ईएनटी के लिए चिकित्सक है लेकिन उनकी सेवाएं झज्जर में ली जा रही हैं। कोविड वार्ड के लिए अलग मेडिकल अफसर की बात करना तो दूर बेड की कमी भी खल रही है। फिजिशियन नियुक्त नहीं है। मात्र आठ बेड का एक वार्ड है जबकि वार्ड में इसके अतिरिक्त कोई सेवाएं नहीं हैं। विभाग की ओर से दो ऑक्सीजन कंसंट्रेटर भेजे गए हैं। दोनों अभी डिब्बे में पैक हैं।
विज्ञापन

कर्मचारियों का कहना है सही जगह के अभाव में कंसंट्रेटर खराब हो रहे हैं। क्योंकि दीवार के जर्जर होने से गली का पानी अंदर पहुंच रहा है। बाथरूम और शौचालय का पानी भी बाहर निकलने के बजाय रिकार्ड रूम में जमा हो जाता है। तीसरी लहर में 75 फीसदी बेड कोरोना पीड़ितों के लिए रिजर्व करने की तैयारी जरूर है लेकिन विभाग के पास संसाधनों की कमी है। कोरोना की तीसरी लहर की संभावना के चलते स्वास्थ्य विभाग तैयारी पूरी होने का दावा कर रहा है। बच्चों के लिए विशेषज्ञ नहीं है। महिला रोग विशेषज्ञ भी नहीं है। कोरोना से बचाव व उपचार के लिए विशेषज्ञ चिकित्सक की नियुक्ति न होने से संसाधनों का भी समुचित उपयोग नहीं हो पाता।
विज्ञापन
विज्ञापन

गोदाम में रखे हैं ऑक्सीजन सिलिंडर
सीएसचसी के गोदाम में छह ऑक्सीजन सिलिंडर और 2 ऑक्सीजन कंसंट्रेटर अंदर रखे हुए हैं। फिलहाल ऑक्सीजन की कोई कमी नहीं है। इसके अतिरिक्त नेताओं की ओर से जरूरत के अनुसार भेजे गए कंसंट्रेटर भी गोदाम में रखे हैं। पर्याप्त जगह और भवन नहीं होने से संसाधन गोदाम की ही शोभा बढ़ा रहे हैं। रोगियों के बेड के पास जगह का अभाव है।
बुखार की दवाइयां भी कम
सीएचसी में बुखार के रोगियों के लिए दवाइयों का टोटा है। पैरासिटामोल जैसी जरूरी दवाई भी रोगियों को नहीं मिल रही। रोगियों को बाहर से दवाई लेने की सलाह दी जाती है। फार्मासिस्ट राजेश गुप्ता के अनुसार वेयर हाउस में पैरासिटामोल की मांग भेजी गई है लेकिन पर्याप्त मात्रा में स्टॉक नहीं मिला है। इसी के चलते जरूरतमंद रोगी को बाहर से दवाई लेनी पड़ रही है।
दूसरी लहर बनी थी कहर
कोरोना की दूसरी लहर ने कहर बरपाया था। विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी से मरीजों की जान खतरे में रही थी। हालत गंभीर होने पर कोरोना के मरीजों को यहां उपचार नहीं मिल सका। विशेषज्ञ चिकित्सक न होने के कारण मरीजों को झज्जर और बहादुरगढ़ रेफर किया गया था। अब कोरोना की तीसरी लहर की आशंका जताई जा रही है, लेकिन चिकित्सकों की कमी पहले से भी ज्यादा है।

वर्जन
जरूरत के अनुसार दवाओं और अन्य तरह की मांग भेजी जाती है। चार दिन पहले ही एसएमओ का तबादला हो गया है। रोगियों की जरूरत और कोरोना की आशंकित लहर को देखते हुए तैयारियों की समीक्षा की जा रही है। भवन की हालत जर्जर होना भी चिंता का विषय बना है। इसके अतिरिक्त पर्याप्त सुविधाएं देने की कोशिश की जा रही है।
- डॉ. संदीप कुमार, सीएचसी बादली।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed