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Jhajjar-Bahadurgarh News: ड्रेन में भरा अधिक पानी, प्रभावित हो सकता है बिजली उत्पादन
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एपीसीपीएल की ड्रेन में भरा आवश्यकता से अधिक पानी।
साल्हावास। पानी की निकासी के लिए एपीसीपीएल स्थित ड्रेन में पानी डालकर जलस्तरकम किया जा रहा था, लेकिन अब ड्रेन में भी पानी का स्तर आवश्यकता से अधिक हो गया है। इसे देखते ही एपीसीपीएल ने ड्रेन में अब पानी और न डालने का अनुरोध बारिश प्रभावित गांवों से किया है ताकि बिजली उत्पादन प्रभावित न हो सके।
एएचपी के अपर महाप्रबंधक संजय सारस्वत ने बताया कि गोरिया गांव से बारिश का पानी प्लांट के ड्रेन में डाला जा रहा था, जिस कारण एपीसीपीएल में पानी का बहाव बहुत बढ़ गया है। प्लांट की राख का डाइक ( ऐश डाइक) में अनुमानित स्तर से ज्यादा पानी जमा हो गया है। इससे बिजली का उत्पादन प्रभावित होने का खतरा बन गया है।
अब बारिश से प्रभावित गांव के सरपंच तथा अन्य उपस्थित लोगों को इससे होने वाले संभावित खतरे से अवगत कराते हुए प्लांट की ड्रेन/ ऐश डाइक में पानी न डालने की अपील की है। इस बारे में एपीसीपीएल ने जिला कार्यालय से पत्र के माध्यम से भी अनुरोध किया है। एपीसीपीएल ने पत्र के माध्यम से जिला प्रशासन को भी इस बात से अवगत कराया है कि अगर प्लांट में पानी को डालने से न रोका गया तो कोल हैंडिलिंग प्लांट (सीएचपी) और स्विचगियर काम करना बंद कर देगा, जिससे बिजली उत्पादन में बाधा आएगी। जिला प्रशाशन, सिंचाई विभाग और गांव के लोगो को इस बात से भी अवगत कराया गया कि डाइक पानी के संग्रहण के लिए डिजाइन नहीं है। अब 48 घंटों बाद स्थिति की जांच की जाएगी।
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एएचपी के अपर महाप्रबंधक संजय सारस्वत ने बताया कि गोरिया गांव से बारिश का पानी प्लांट के ड्रेन में डाला जा रहा था, जिस कारण एपीसीपीएल में पानी का बहाव बहुत बढ़ गया है। प्लांट की राख का डाइक ( ऐश डाइक) में अनुमानित स्तर से ज्यादा पानी जमा हो गया है। इससे बिजली का उत्पादन प्रभावित होने का खतरा बन गया है।
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अब बारिश से प्रभावित गांव के सरपंच तथा अन्य उपस्थित लोगों को इससे होने वाले संभावित खतरे से अवगत कराते हुए प्लांट की ड्रेन/ ऐश डाइक में पानी न डालने की अपील की है। इस बारे में एपीसीपीएल ने जिला कार्यालय से पत्र के माध्यम से भी अनुरोध किया है। एपीसीपीएल ने पत्र के माध्यम से जिला प्रशासन को भी इस बात से अवगत कराया है कि अगर प्लांट में पानी को डालने से न रोका गया तो कोल हैंडिलिंग प्लांट (सीएचपी) और स्विचगियर काम करना बंद कर देगा, जिससे बिजली उत्पादन में बाधा आएगी। जिला प्रशाशन, सिंचाई विभाग और गांव के लोगो को इस बात से भी अवगत कराया गया कि डाइक पानी के संग्रहण के लिए डिजाइन नहीं है। अब 48 घंटों बाद स्थिति की जांच की जाएगी।
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