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कर्मचारी संगठनों का सरकार के खिलाफ हल्लाबोल
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कर्मचारियों ने जिला मुख्यालय पर अपनी मांगों को लेकर हल्ला बोला है। अपनी मांगों के साथ-साथ कर्मचारी संगठनों ने कृषि कानून पास करने को भी केंद्र सरकार की तानाशाही बताया है। मंगलवार को सर्व कर्मचारी संघ के बैनर तले विभिन्न विभागों के कर्मचारी यहां लघु सचिवालय के पास स्थित ग्रीन बेल्ट में एकत्रित हुए और बाद में प्रदर्शन करते हुए यहां उन्होंने न सिर्फ लघु सचिवालय परिसर में धरना दिया बल्कि प्रदर्शन भी किया। इस विरोध प्रदर्शन की अध्यक्षता जिला प्रधान रामबीर ने की, जबकि विरोध प्रदर्शन का संचालन विष्णुदत्त जांगड़ा ने किया। कर्मचारियों ने केंद्र एवं राज्य सरकार की मजदूर विरोधी नीतियों और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के निजीकरण के खिलाफ मंगलवार के राष्ट्रीय विरोध दिवस को सफल बनाया।
कर्मचारियों ने अपनी मांगों का एक ज्ञापन सीएम के नाम जिला प्रशासन को सौंपा। ज्ञापन में मुख्य मांगें बर्खास्त पीटीआई को वापस नौकरी पर लेने, ठेकेदारी प्रथा को खत्म करने, पार्ट टाइम कर्मचारियों को नियमित करने, समान काम और समान वेतन लागू करने, एक्स ग्रसिया का लाभ देने सहित कई मांगें शामिल थी। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों का कहना है कि अब तक सरकार कर्मचारी विरोधी नीतियां अपना रही थी, लेकिन अब नए तीन कृषि कानूनों को लोस व राज्यसभा में पास कराकर और इन पर कानून बनवा कर भाजपा सरकार ने यह दिखा दिया है कि वह किसान और मजदूर विरोधी भी है। कर्मचारियों के धरने व प्रदर्शन को देखते हुए पुलिस प्रशासन की तरफ से काफी संख्या में पुलिस के जवान व महिला पुलिस को भी तैनात किया गया था।
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कर्मचारियों ने अपनी मांगों का एक ज्ञापन सीएम के नाम जिला प्रशासन को सौंपा। ज्ञापन में मुख्य मांगें बर्खास्त पीटीआई को वापस नौकरी पर लेने, ठेकेदारी प्रथा को खत्म करने, पार्ट टाइम कर्मचारियों को नियमित करने, समान काम और समान वेतन लागू करने, एक्स ग्रसिया का लाभ देने सहित कई मांगें शामिल थी। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों का कहना है कि अब तक सरकार कर्मचारी विरोधी नीतियां अपना रही थी, लेकिन अब नए तीन कृषि कानूनों को लोस व राज्यसभा में पास कराकर और इन पर कानून बनवा कर भाजपा सरकार ने यह दिखा दिया है कि वह किसान और मजदूर विरोधी भी है। कर्मचारियों के धरने व प्रदर्शन को देखते हुए पुलिस प्रशासन की तरफ से काफी संख्या में पुलिस के जवान व महिला पुलिस को भी तैनात किया गया था।
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