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कमीशन का चक्कर, अभिभावक पर दोहरी मार
ब्यूरो/अमर उजाला झज्जर
Updated Sat, 08 Apr 2017 12:58 AM IST
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बहादुरगढ़। प्राइवेट स्कूल संचालक बच्चों पर एनसीईआरटी के बजाय निजी प्रकाशकों की महंगी किताबें थोप रहे हैं। ये किताबें एनसीईआरटी की किताबों की बजाये पांच से छह गुना महंगी है। स्कूल संचालक यह सारा खेल मोटा कमीशन वसूलने के लिए कर रहे हैं। फीस बढ़ने के साथ-साथ अभिभावक किताबें महंगी होने से परेशान हैं।
क्षेत्र के निजी स्कूलों में विद्यार्थियों को निजी प्रकाशकों की किताबें लगवाकर 40 से 70 प्रतिशत तक का कमीशन वसूल रहे हैं। इससे अभिभावकों पर काफी आर्थिक बोझ पड़ता है। यदि अभिभावक इसका विरोध करते हैं तो स्कूल संचालक कहते हैं कि किताबें नहीं लेनी हैं तो अपने बच्चों को भी सरकारी स्कूल में पढ़ा लो। सरकारी स्कूलों में पढ़ाई ठीक ढंग से न होने के कारण प्राइवेट स्कूल संचालक अभिभावकों की मजबूरी का फायदा उठाते हैं। साथ ही इन किताबों के चयन के लिए भी किसी तरह की कमेटी का गठन नहीं किया जाता। लगभग सभी स्कूल जो किताबें लगवाते हैं वे बाजार में उपलब्ध होती नहीं।
स्कूलों में स्टॉल लगाकर बेची जा रही हैं किताबें
इन दिनों क्षेत्र के सभी प्राइवेट स्कूलों में हालात यह हैं कि किताबें लेने के लिए विद्यार्थियों के साथ-साथ परिजनों की लंबी कतारें लग रही हैं। कुछ परिजनों ने स्कूल के खिलाफ प्रशासनिक अधिकारियों को भी शिकायत की है। शहर के लगभग सभी प्राइवेट स्कूलों में अभी तक बाकायदा स्टाल लगाकर निजी प्रकाशकों की किताबें ही बेची जा रही हैं। बच्चों का भविष्य देखते हुए परिजनों को महंगे दामों पर यह किताबें खरीदनी पड़ रही है।
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प्राइवेट स्कूल उड़ा रहे नियमों की धज्जियां
सरकारी आदेशों के अनुसार कोई भी सीबीएसई से मान्यता प्राप्त प्राइवेट स्कूल एनसीईआरटी के बजाय निजी प्रकाशकों की किताबें स्कूल में न तो बेच सकता है और न ही लगवा सकता है। जबकि हरियाणा बोर्ड से मान्यता प्राप्त स्कूल एससीईआरटी की किताबों के अलावा प्राइवेट प्रकाशकों की किताबें नहीं बेच सकता, लेकिन इन दिनों सभी निजी स्कूलों में कानून के विपरीत काम हो रहा है। नियमों के अनुसार किसी भी सीबीएसई स्कूल में पहली से बारहवीं कक्षा तक केवल एनसीईआरटी की किताबें ही लगाई जा सकती हैं। लेकिन स्कूल प्रबंधन अपने मुनाफे के लिए नियमों को ताक पर रखकर एनसीईआरटी की बजाय निजी प्रकाशकों की किताबों को अधिक तवज्जो दे रहे हैं क्योंकि निजी प्रकाशकों की किताबें बेचने में स्कूल प्रबंधन को अधिक मुनाफा मिलता है।
क्या कहते हैं अभिभावक
माल गोदाम रोड निवासी डॉ. मोनू का कहना है कि निजी स्कूल संचालक अपने मुनाफे के चक्कर में निजी प्रकाशकों की किताबें लगाते हैं। इससे अभिभावकों पर काफी बोझ बढ़ता है।
बाम्बे वाली गली निवासी मनोज नंदा का कहना है कि सरकारी आदेशों की धज्जियां उड़ाने वाले प्रशासन व शिक्षा विभाग को प्राइवेट स्कूलों के खिलाफ कदम उठाना चाहिए और कार्रवाई करनी चाहिए।
अनाज मंडी निवासी शिव कुमार गुप्ता का कहना है कि जब अभिभावक इसका विरोध करते हैं तो स्कूल संचालकों की ओर से उन्हें धमकी दी जाती है कि या तो किताबें ले लों, अन्यथा अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में पढ़ा लो।
नई बस्ती निवासी सुनील कुमार कहते हैं कि एनसीईआरटी व एससीईआरटी की किताबों के दामों में काफी अंतर होता है। यदि हर स्कूल संचालक वही किताबें लगवा दे तो अभिभावकों को भी काफी राहत मिलेगी।
क्या कहते हैं स्कूल संचालक
स्कूल संचालक सुनील कुमार और राधेश्याम ने इस बारे में कहा कि उन्होंने अपने स्कूलों में निजी स्कूलों की जो पुस्तकें लगवाई हैं उनका स्तर एनसीईआरटी की पुस्तकों से बेहतर है। पाठ्य सामग्री, पेपर और बाइंडिग की लिहाज से भी वे सही हैं। वे कमीशन के लालच में अभिभावकों पर बोझ भी नहीं लादते।
क्या कहते हैं डीईओ
जिला शिक्षा अधिकारी सतबीर सिवाच का कहना है कि अभी इस मामले में उनके पास किसी तरह की कोई शिकायत नहीं पहुंची है। शिकायत मिलते ही प्राइवेट स्कूल संचालकों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
एनसीईआरटी की किताबों की कीमत
12वीं नॉन मेडिकल साइंस
गणित भाग-1 : 85 रुपये
गणित भाग-2 : 110 रुपये
फिजिक्स - 1 : 120
फिजिक्स - 2 : 120
अंग्रेजी फ्लेमिंगो : 55
अंग्रेजी विस्ता : 45
केमिस्ट्री भाग-1 : 95
केमिस्ट्री भाग-2 : 100
एनसीईआरटी की किताबों की कीमत
10वीं कक्षा की
गणित : 140
अंग्रेजी : 65
विज्ञान : 165
हिंदी स्पर्श : 55
हिंदी संचयन : 25
भूगोल : 55
राजनीतिक विज्ञान : 65
अर्थ शास्त्र : 50
इतिहास : 100
दूसरी ओर निजी प्रकाशकों की पुस्तकें एनसीईआरटी की पुस्तकों से अत्यधिक महंगी है। कई पुस्तकें तो पांच गुना तक अधिक कीमत में मिलती हैं। उदाहरण के तौर पर एससीईआरटी की भौतिकी विज्ञान की पुस्तक के दोनों भाग 240 रुपये के हैं। जबकि एक प्रकाशक की इन दोनों पुस्तकों पर अधिकतम खुदरा मूल्य 1200 रुपये लिखा है। इसी तरह एससीईआरटी की रसायन विज्ञान की दोनों पुस्तकों का मूल्य 195 रुपये बनता है। जबकि एक निजी प्रकाशक इन्हीं किताबों को पांच गुना दामों पर बेच रहा है।
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क्षेत्र के निजी स्कूलों में विद्यार्थियों को निजी प्रकाशकों की किताबें लगवाकर 40 से 70 प्रतिशत तक का कमीशन वसूल रहे हैं। इससे अभिभावकों पर काफी आर्थिक बोझ पड़ता है। यदि अभिभावक इसका विरोध करते हैं तो स्कूल संचालक कहते हैं कि किताबें नहीं लेनी हैं तो अपने बच्चों को भी सरकारी स्कूल में पढ़ा लो। सरकारी स्कूलों में पढ़ाई ठीक ढंग से न होने के कारण प्राइवेट स्कूल संचालक अभिभावकों की मजबूरी का फायदा उठाते हैं। साथ ही इन किताबों के चयन के लिए भी किसी तरह की कमेटी का गठन नहीं किया जाता। लगभग सभी स्कूल जो किताबें लगवाते हैं वे बाजार में उपलब्ध होती नहीं।
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स्कूलों में स्टॉल लगाकर बेची जा रही हैं किताबें
इन दिनों क्षेत्र के सभी प्राइवेट स्कूलों में हालात यह हैं कि किताबें लेने के लिए विद्यार्थियों के साथ-साथ परिजनों की लंबी कतारें लग रही हैं। कुछ परिजनों ने स्कूल के खिलाफ प्रशासनिक अधिकारियों को भी शिकायत की है। शहर के लगभग सभी प्राइवेट स्कूलों में अभी तक बाकायदा स्टाल लगाकर निजी प्रकाशकों की किताबें ही बेची जा रही हैं। बच्चों का भविष्य देखते हुए परिजनों को महंगे दामों पर यह किताबें खरीदनी पड़ रही है।
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प्राइवेट स्कूल उड़ा रहे नियमों की धज्जियां
सरकारी आदेशों के अनुसार कोई भी सीबीएसई से मान्यता प्राप्त प्राइवेट स्कूल एनसीईआरटी के बजाय निजी प्रकाशकों की किताबें स्कूल में न तो बेच सकता है और न ही लगवा सकता है। जबकि हरियाणा बोर्ड से मान्यता प्राप्त स्कूल एससीईआरटी की किताबों के अलावा प्राइवेट प्रकाशकों की किताबें नहीं बेच सकता, लेकिन इन दिनों सभी निजी स्कूलों में कानून के विपरीत काम हो रहा है। नियमों के अनुसार किसी भी सीबीएसई स्कूल में पहली से बारहवीं कक्षा तक केवल एनसीईआरटी की किताबें ही लगाई जा सकती हैं। लेकिन स्कूल प्रबंधन अपने मुनाफे के लिए नियमों को ताक पर रखकर एनसीईआरटी की बजाय निजी प्रकाशकों की किताबों को अधिक तवज्जो दे रहे हैं क्योंकि निजी प्रकाशकों की किताबें बेचने में स्कूल प्रबंधन को अधिक मुनाफा मिलता है।
क्या कहते हैं अभिभावक
माल गोदाम रोड निवासी डॉ. मोनू का कहना है कि निजी स्कूल संचालक अपने मुनाफे के चक्कर में निजी प्रकाशकों की किताबें लगाते हैं। इससे अभिभावकों पर काफी बोझ बढ़ता है।
बाम्बे वाली गली निवासी मनोज नंदा का कहना है कि सरकारी आदेशों की धज्जियां उड़ाने वाले प्रशासन व शिक्षा विभाग को प्राइवेट स्कूलों के खिलाफ कदम उठाना चाहिए और कार्रवाई करनी चाहिए।
अनाज मंडी निवासी शिव कुमार गुप्ता का कहना है कि जब अभिभावक इसका विरोध करते हैं तो स्कूल संचालकों की ओर से उन्हें धमकी दी जाती है कि या तो किताबें ले लों, अन्यथा अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में पढ़ा लो।
नई बस्ती निवासी सुनील कुमार कहते हैं कि एनसीईआरटी व एससीईआरटी की किताबों के दामों में काफी अंतर होता है। यदि हर स्कूल संचालक वही किताबें लगवा दे तो अभिभावकों को भी काफी राहत मिलेगी।
क्या कहते हैं स्कूल संचालक
स्कूल संचालक सुनील कुमार और राधेश्याम ने इस बारे में कहा कि उन्होंने अपने स्कूलों में निजी स्कूलों की जो पुस्तकें लगवाई हैं उनका स्तर एनसीईआरटी की पुस्तकों से बेहतर है। पाठ्य सामग्री, पेपर और बाइंडिग की लिहाज से भी वे सही हैं। वे कमीशन के लालच में अभिभावकों पर बोझ भी नहीं लादते।
क्या कहते हैं डीईओ
जिला शिक्षा अधिकारी सतबीर सिवाच का कहना है कि अभी इस मामले में उनके पास किसी तरह की कोई शिकायत नहीं पहुंची है। शिकायत मिलते ही प्राइवेट स्कूल संचालकों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
एनसीईआरटी की किताबों की कीमत
12वीं नॉन मेडिकल साइंस
गणित भाग-1 : 85 रुपये
गणित भाग-2 : 110 रुपये
फिजिक्स - 1 : 120
फिजिक्स - 2 : 120
अंग्रेजी फ्लेमिंगो : 55
अंग्रेजी विस्ता : 45
केमिस्ट्री भाग-1 : 95
केमिस्ट्री भाग-2 : 100
एनसीईआरटी की किताबों की कीमत
10वीं कक्षा की
गणित : 140
अंग्रेजी : 65
विज्ञान : 165
हिंदी स्पर्श : 55
हिंदी संचयन : 25
भूगोल : 55
राजनीतिक विज्ञान : 65
अर्थ शास्त्र : 50
इतिहास : 100
दूसरी ओर निजी प्रकाशकों की पुस्तकें एनसीईआरटी की पुस्तकों से अत्यधिक महंगी है। कई पुस्तकें तो पांच गुना तक अधिक कीमत में मिलती हैं। उदाहरण के तौर पर एससीईआरटी की भौतिकी विज्ञान की पुस्तक के दोनों भाग 240 रुपये के हैं। जबकि एक प्रकाशक की इन दोनों पुस्तकों पर अधिकतम खुदरा मूल्य 1200 रुपये लिखा है। इसी तरह एससीईआरटी की रसायन विज्ञान की दोनों पुस्तकों का मूल्य 195 रुपये बनता है। जबकि एक निजी प्रकाशक इन्हीं किताबों को पांच गुना दामों पर बेच रहा है।