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आसाराम को सजा के ऐलान के बाद बहादुरगढ़ में रही शांति
Updated Thu, 26 Apr 2018 02:04 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
बहादुरगढ़।
जोधपुर कोर्ट द्वारा बुधवार को आसाराम को सजा सुनाए जाने के बाद बहादुरगढ़ में शांति बनी रही। किसी तरह का कोई उत्पात नजर नहीं आया। बामनोली स्थित आसाराम के आश्रम में भी पूरी तरह सन्नाटा पसरा रहा। यहां केवल दो-तीन लोग ही मिले। उनसे जब इस बारे में बातचीत की गई तो उन्होंने किसी भी तरह का हुड़दंग न करने की बात कही।
वर्ष 2013 से न्यायिक हिरासत में जेल में बंद आसाराम को जैसे ही कोर्ट ने सजा का ऐलान किया। उसी दौरान बहादुरगढ़ में पुलिस भी सतर्क हो गई। पुलिस को आशंका थी कि कहीं आसाराम के समर्थक सजा सुनाने के बाद बहादुरगढ़ में किसी तरह का हुड़दंग न मचा दे, लेकिन बहादुरगढ़ में चौतरफा शांति रही। किसी भी समर्थक ने हुड़दंग नहीं किया। बामनोली स्थित आश्रम में भी पूरी तरह सन्नाटा पसरा रहा। वहां पर केवल दो-तीन लोग ही मौजूद थे। जब उनसे आसाराम की सजा के बारे में बताया और बातचीत की तो उन्होंने किसी तरह की कोई टिप्पणी करने से मना कर दिया। यह जरूर बताया कि इस आश्रम में किसी पर्व पर ही समर्थक इकट्ठा होते हैं। बुधवार को कोई समर्थक यहां नहीं पहुंचा। आश्रम में मौजूद रोहित ने आसाराम की सजा पर अफसोस जताया और कहा कि जिस तरह के आरोप संत आसाराम पर लगाए गए हैं, वह निराधार है।
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बहादुरगढ़।
जोधपुर कोर्ट द्वारा बुधवार को आसाराम को सजा सुनाए जाने के बाद बहादुरगढ़ में शांति बनी रही। किसी तरह का कोई उत्पात नजर नहीं आया। बामनोली स्थित आसाराम के आश्रम में भी पूरी तरह सन्नाटा पसरा रहा। यहां केवल दो-तीन लोग ही मिले। उनसे जब इस बारे में बातचीत की गई तो उन्होंने किसी भी तरह का हुड़दंग न करने की बात कही।
वर्ष 2013 से न्यायिक हिरासत में जेल में बंद आसाराम को जैसे ही कोर्ट ने सजा का ऐलान किया। उसी दौरान बहादुरगढ़ में पुलिस भी सतर्क हो गई। पुलिस को आशंका थी कि कहीं आसाराम के समर्थक सजा सुनाने के बाद बहादुरगढ़ में किसी तरह का हुड़दंग न मचा दे, लेकिन बहादुरगढ़ में चौतरफा शांति रही। किसी भी समर्थक ने हुड़दंग नहीं किया। बामनोली स्थित आश्रम में भी पूरी तरह सन्नाटा पसरा रहा। वहां पर केवल दो-तीन लोग ही मौजूद थे। जब उनसे आसाराम की सजा के बारे में बताया और बातचीत की तो उन्होंने किसी तरह की कोई टिप्पणी करने से मना कर दिया। यह जरूर बताया कि इस आश्रम में किसी पर्व पर ही समर्थक इकट्ठा होते हैं। बुधवार को कोई समर्थक यहां नहीं पहुंचा। आश्रम में मौजूद रोहित ने आसाराम की सजा पर अफसोस जताया और कहा कि जिस तरह के आरोप संत आसाराम पर लगाए गए हैं, वह निराधार है।
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