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ई-टेंडर के विरोध में सरपंच एसोसिएशन ने प्रशासन को सौंपा ज्ञापन
Updated Sat, 24 Jun 2017 01:28 AM IST
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ई-टेेंडर के विरोध में सरपंच एसोसिएशन ने प्रशासन को सौंपा ज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
चरखी दादरी।
सरकार द्वारा पंचायत विकास कार्यों के लिए ई-टेंडर जारी करने के विरोध में सरपंच एसोसिएशन के सदस्यों ने उपायुक्त के नाम ज्ञापन देकर रद्द करवाने की मांग की। रद्द न करने पर धरने की चेतावनी दी है। एसोसिएशन सदस्यों ने सीटीएम अमरजीत को सौंपे ज्ञापन में कहा कि गांवों में विकास कार्यों में पारदर्शिता लाने के लिए एक तरफ तो सरकार पंचायतों को 10 से बढ़ाकर कर 20 लाख तक का बजट खर्च करने की पावर दे रही है। वहीं ठेकेदारी प्रथा को बढ़ावा देने के साथ-साथ पंचायतों के विशेषाधिकारों का हनन कर भ्रष्टाचार को पनपने का भी मौका दे रही है। ज्ञापन में इन सरपंचों ने बताया कि ऐसे तो गांवों में होने वाले विकास कार्यों में ठेकेदार मनमानी कर मेटेरियल का प्रयोग कर सरकार को चपत लगाने का कार्य करेंगे वहीं काम में भी पारदर्शिता नहीं आएगी। ज्ञापन में कहा कि जल्द ही पंचायती प्रतिनिधियों की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए इस विरोधी फैसले को वापिस लिया जाए। एसोसिएशन सदस्यों ने कहा कि अगर सरकार ने 30 जून तक उनकी मांगें नहीं मानी तो गांवों में चल रहे सभी विकास कार्यों को बंद करवा दिया जाएगा और सभी सरपंच लघु सचिवालय के बाहर धरने पर बैठने को मजबूर होंगे। इस दौरान मांगेराम, विनोद, सुनील, राजेश, सुरेश कुमार, आकाश, भूपेंद्र सिंह सहित कई गांवों के सरपंच और प्रतिनिधि मौजूद थे।
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अमर उजाला ब्यूरो
चरखी दादरी।
सरकार द्वारा पंचायत विकास कार्यों के लिए ई-टेंडर जारी करने के विरोध में सरपंच एसोसिएशन के सदस्यों ने उपायुक्त के नाम ज्ञापन देकर रद्द करवाने की मांग की। रद्द न करने पर धरने की चेतावनी दी है। एसोसिएशन सदस्यों ने सीटीएम अमरजीत को सौंपे ज्ञापन में कहा कि गांवों में विकास कार्यों में पारदर्शिता लाने के लिए एक तरफ तो सरकार पंचायतों को 10 से बढ़ाकर कर 20 लाख तक का बजट खर्च करने की पावर दे रही है। वहीं ठेकेदारी प्रथा को बढ़ावा देने के साथ-साथ पंचायतों के विशेषाधिकारों का हनन कर भ्रष्टाचार को पनपने का भी मौका दे रही है। ज्ञापन में इन सरपंचों ने बताया कि ऐसे तो गांवों में होने वाले विकास कार्यों में ठेकेदार मनमानी कर मेटेरियल का प्रयोग कर सरकार को चपत लगाने का कार्य करेंगे वहीं काम में भी पारदर्शिता नहीं आएगी। ज्ञापन में कहा कि जल्द ही पंचायती प्रतिनिधियों की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए इस विरोधी फैसले को वापिस लिया जाए। एसोसिएशन सदस्यों ने कहा कि अगर सरकार ने 30 जून तक उनकी मांगें नहीं मानी तो गांवों में चल रहे सभी विकास कार्यों को बंद करवा दिया जाएगा और सभी सरपंच लघु सचिवालय के बाहर धरने पर बैठने को मजबूर होंगे। इस दौरान मांगेराम, विनोद, सुनील, राजेश, सुरेश कुमार, आकाश, भूपेंद्र सिंह सहित कई गांवों के सरपंच और प्रतिनिधि मौजूद थे।