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महज रेफर केंद्र बनकर रह गया है जिला मुख्यालय का सिविल अस्पताल

Tue, 01 May 2018 03:00 AM IST
Updated Tue, 01 May 2018 03:00 AM IST
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महज रेफर केंद्र बनकर रह गया है जिला मुख्यालय का सिविल अस्पताल
रेफर केंद्र बनकर रह गया है जिले का सिविल अस्पताल
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चरखी दादरी।
जिले का मुख्य सिविल अस्पताल महज रेफर केंद्र बनकर रह गया है। यहां पर मात्र तीन एंबुलेंस है और कई विशेषज्ञ चिकित्सक और अन्य स्टाफ की कमी है। इसके अलावा अधिक ब्लड की आवश्यकता होने पर भिवानी अस्पताल और पीजीआई की शरण लेनी पड़ती है। एकसाथ किसी हादसे में तीन या इससे अधिक घायल यहां लाए जाते हैं तो चिकित्सकों व एंबुलेंस सेवाओं सहित अन्य सुविधाओं की कमी आड़े आ जाती है। सोमवार को अचीना के समीप स्कूली बस और डंपर की भिंड़त में एक बार फिर से सिविल अस्पताल में बेदम स्वास्थ्य सेवाओं की बानगी देखने को मिली। हादसे में घायल बच्चों में से दो ने सिविल अस्पताल पहुंचने पर दम तोड़ दिया। वहीं, कई घायलों को पीजीआई ले जाते समय जरूरत के मुताबिक ईएमटी भी नहीं मिले।
एक तरफ प्रदेश सरकार स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार करने का दम भर रही है तो वहीं चरखी दादरी जिला मुख्यालय अस्पताल में वास्तविकता इससे कोसों दूर हैं। पिछले दस दिनों में दो बड़े सड़क हादसे हुए हैं और दोनों में ही यहां चिकित्सा सुविधाएं बेदम नजर आई हैं। सोमवार को अचीना सड़क हादसे में घायल स्कूली बच्चे दर्द से कराहते रहे लेकिन चिकित्सकों की कमी के चलते उन्हें नंबर से उपचार मिल पाया। 15 वर्षीय सोनू ने तो सिविल अस्पताल पहुंचकर लोगों की आंखों के सामने दम तोड़ दिया। हादसे के बाद सिविल अस्पताल में महज तीन ही चिकित्सक मौजूद थे जो एक के बाद एक कर बच्चों को उपचार देते नजर आए। वहीं, सिविल अस्पताल में घायल बच्चों के एक्स-रे तक नहीं हो पाए। वहीं, सिविल अस्पताल पहुंचे राजनेताओं ने खामियों का ठीकरा जिला प्रशासन और प्रदेश सरकार के सिर फोड़ दिया। जिला अस्पताल में इस समय एंबुलेंस की कमी भी बनी हुई है और लगभग हर बड़े हादसे के बाद निजी अस्पतालों के साथ-साथ दूसरे जिलों से एंबुलेंस मंगवानी पड़ती हैं और इस प्रक्रिया में अच्छा खासा समय लग जाता है। कई दफा पहले घटनास्थल से अस्पताल पहुंचने तक और फिर यहां से पीजीआई रोहतक पहुंचने पर हादसों में घायल जान तक गंवा देते हैं।
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18 घायलों को संभालने के लिए महज तीन चिकित्सक
अचीना ताल के समीप हुए हादसे में घायल बच्चों व चालक-परिचालकों को सिविल अस्पताल लाया गया जबकि बस परिचालक पप्पी की मौके पर ही मौत हो गई थी। इसके बाद अस्पताल पहुंचे 18 घायलों को उपचार देने के लिए महज तीन ही महिला चिकित्सक मौजूद थीं। हालांकि स्टाफ नर्सें भी तुरंत इमरजेंसी कक्ष में पहुंच गई थी लेकिन इसके बावजूद चिकित्सकों की कमी घायलों के उपचार में आड़े आती नजर आई।
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कम पड़े बेड, स्ट्रेचर पर करहाते रहे घायल
100 बेड के सिविल अस्पताल में इस समय इमरजेंसी कक्ष के अंदर व बाहर करीब 10 से 12 बेड ही हैं। हादसे के बाद यहां बेडों की कमी भी नजर आई। घायलों की संख्या ज्यादा व बेड की संख्या कम होने के चलते एक बेड पर दो-दो बच्चों को लेटाया गया। वहीं, एक घायल स्ट्रेचर पर दर्द से कराहता नजर आया।
अस्पताल में न ईएमटी पर्याप्त न एंबुलेंस
सिविल अस्पताल में इस समय तीन एंबुलेंस ही हैं। हादसों में घायल 16 लोगों को पीजीआई रोहतक रेफर किया गया तो आनन-फानन में निजी अस्पतालों की एंबुलेंस बुलाई गई। इस दौरान अस्पताल पहुंचे कई लोग अपनी गाड़ियों में ही घायलों को लेकर पीजीआई के लिए रवाना हो गए। रेफर किए गए घायलों को रास्ते में संभालने के लिए पर्याप्त संख्या में ईएमटी भी नजर नहीं आए।
हादसे का जिसे पता चला दौड़ा आया अस्पताल
हादसे की खबर कुछ देर में ही शहर व निकटवर्ती गांवों में भी फैल गई। यह खबर जिसके भी कानों में पड़ी वो सिविल अस्पताल चला आया। इस दौरान यहां स्टाफ सहित अन्य सुविधाओं की कमी को देखते हुए पहले एंबुलेंस से घायलों को उतारने में व बाद में पीजीआई रेफर करने के दौरान दोबारा एंबुलेंस तक पहुंचाने में आमजन ने मदद की। पुलिस कर्मियों ने भी घायलों को एंबुलेंस में लेटाने में मदद की। घायलों के सिविल अस्पताल पहुंचने के बाद गांव अचीना के ग्रामीणों सहित शहर के विभिन्न सामाजिक व धार्मिक संगठनों सहित राजनैतिक पार्टियों से जुड़े लोग सिविल अस्पताल पहुंचे।
वर्जन
यह हादसा बेहद दुखद है। प्रदेश सरकार की स्वास्थ्य सेवाओं में जिले की अनदेखी ऐसे हादसों के दर्द को और बढ़ा देती है। कई दफा मैं खुद स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज सहित मुख्यमंत्री को दादरी सिविल अस्पताल में चिकित्सकों की नियुक्ति के लिए पत्र लिख चुका हूं लेकिन हालात बद से बदत्तर होते जा रहे हैं। जिला मुख्यालय अस्पताल में चिकित्सकों की कमी के साथ-साथ अन्य सुविधाएं भी नाममात्र ही हैं।
सतपाल सांगवान, पूर्व कैबिनेट मंत्री
वर्जन::
सिविल अस्पताल में चिकित्सकों सहित अन्य सुविधाएं मुहैया कराने के लिए मैं मुख्यमंत्री से मांग कर चुका हूं। बड़े हादसों के बाद अस्पताल की अव्यवस्थाएं लगातार उजागर हो रही हैं और अब सरकार को जल्द से जल्द यहां चिकित्सा सेवाओं सहित अन्य सुविधाएं मुहैया करानी चाहिए। इस संबंध में मैं दोबारा मुख्यमंत्री सहित स्वास्थ्य मंत्री से बात करूंगा।
सोमबीर सांगवान, भाजपा वरिष्ठ नेता
वर्जन::
अचीना के समीप सोमवार को दर्दनाक हादसा हुआ। सिविल अस्पताल में अव्यवस्थाओं के चलते घायलों को काफी परेशानियां भी हुई। प्रदेश सरकार दादरी जिले की चिकित्सा सेवाओं को लेकर जमकर उपेक्षा का रही है। कई दफा यह मुद्दा मैं उठा चुका हूं और हर बार सरकार झूठा आश्वासन दे देती है। भाजपा सरकार जिले की जनता की भावनाओं के साथ खिलवाड़ कर रही है।

राजदीप फौगाट, इनेलो विधायक दादरी
वर्जन::
सिविल अस्पतल में चिकित्सकों व अन्य सुविधाएं मुुहैया कराने के लिए जिला प्रशासन कई दफा पत्र लिख चुका है। खुद डीसी साहब भी यह मुद्दा उठा चुके हैं लेकिन अब तक डिमांड पूरी नहीं हुई है। जल्द से जल्द अस्पताल में चिकित्सकों की कमी को पूरा कराने के लिए प्रशासन प्रयास करेगा।
ओमप्रकाश देवराला, एसडीएम
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