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चार भाईयों में तीसरा था रोहित, सदमे में दोस्त
Updated Thu, 05 Apr 2018 01:24 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
बादली (बहादुरगढ़)।
नहर में नहाने का गुरुग्राम जिले के गांव खंडेवला निवासी युवाओं का इरादा उनके लिए भारी पड़ गया। रोते-रोते युवा बोले कि अनमने ढंग से बने नहर में नहाने के इरादे ने उन्हें रुलाने पर मजबूर कर दिया। इन दोस्तों ने अपने गांव खंडेवला से एक्सयूवी कार किराए पर ली थी और गांव कानोन्दा में एक साथी दोस्त को उसकी बहन की मौत पर सांत्वना देने के बाद खंडेवला लौट रहे थे।
एनसीआर माइनर के किनारे अपने दोस्त रोहित के पानी से निकलने का इंतजार कर रहे उत्तम, विजयपाल, ललित, नितिन, अंकित, सूर्यकांत, योगेंद्र और योगेश से रोहित के डूबने की बात सहन नहीं हो रही। वे बुरी तरह से सदमे में नजर आए और कुछ भी कहने से बचते रहे। उनका साथी एक निजी स्कूल में 12वीं कक्षा का छात्र अपने हमउम्र चाचा ललित के साथ कानोन्दा गांव आया था। वापसी में नहर में नहाने के लिए उतरने के बाद रोहित लौटा ही नहीं। चार भाइयों में तीसरे रोहित के पिता अपने गांव में इलेक्ट्रिशियन का काम करते हैं।
एनसीआर माइनर में पहले भी इस तरह की घटनाएं होती रही हैं। इस नहर में 10-12 फुट तक गहरा पानी तेजी से बहता है। पुल की ऊंचाई करीब 15 फुट तक है। नहर में पानी लगातार चलता रहता है इसलिए माइनर की सफाई न होने के कारण घास-फूस ज्यादा है। नहाने के लिए नहर में छलांग लगाने वाले कई लोग घास-फूस में फंसकर रह जाते हैं और डूब जाते हैं। हर साल ऐसी कई घटनाएं हो जाती हैं। गर्मी के मौसम में इस नहर में नहाने वालों की संख्या बढ़ जाती है। अधिकतर घटनाओं में छात्र या कम उम्र के युवा ही काल का ग्रास बनते हैं।
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क्या कहती है पुलिस
सदर थाना प्रभारी जसबीर का कहना है कि इस गहरी नहर में नहाने वालों को कई बार चेताया जाता है। कई के खिलाफ कार्रवाई भी की जाती है। माइनर में न नहाने के लिए जागरूक भी किया जाता है। जगह-जगह निर्देशात्मक बोर्ड भी लगाए गए हैं कि इस गहरी नहर में नहाना खतरनाक है।
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बादली (बहादुरगढ़)।
नहर में नहाने का गुरुग्राम जिले के गांव खंडेवला निवासी युवाओं का इरादा उनके लिए भारी पड़ गया। रोते-रोते युवा बोले कि अनमने ढंग से बने नहर में नहाने के इरादे ने उन्हें रुलाने पर मजबूर कर दिया। इन दोस्तों ने अपने गांव खंडेवला से एक्सयूवी कार किराए पर ली थी और गांव कानोन्दा में एक साथी दोस्त को उसकी बहन की मौत पर सांत्वना देने के बाद खंडेवला लौट रहे थे।
एनसीआर माइनर के किनारे अपने दोस्त रोहित के पानी से निकलने का इंतजार कर रहे उत्तम, विजयपाल, ललित, नितिन, अंकित, सूर्यकांत, योगेंद्र और योगेश से रोहित के डूबने की बात सहन नहीं हो रही। वे बुरी तरह से सदमे में नजर आए और कुछ भी कहने से बचते रहे। उनका साथी एक निजी स्कूल में 12वीं कक्षा का छात्र अपने हमउम्र चाचा ललित के साथ कानोन्दा गांव आया था। वापसी में नहर में नहाने के लिए उतरने के बाद रोहित लौटा ही नहीं। चार भाइयों में तीसरे रोहित के पिता अपने गांव में इलेक्ट्रिशियन का काम करते हैं।
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एनसीआर माइनर में पहले भी इस तरह की घटनाएं होती रही हैं। इस नहर में 10-12 फुट तक गहरा पानी तेजी से बहता है। पुल की ऊंचाई करीब 15 फुट तक है। नहर में पानी लगातार चलता रहता है इसलिए माइनर की सफाई न होने के कारण घास-फूस ज्यादा है। नहाने के लिए नहर में छलांग लगाने वाले कई लोग घास-फूस में फंसकर रह जाते हैं और डूब जाते हैं। हर साल ऐसी कई घटनाएं हो जाती हैं। गर्मी के मौसम में इस नहर में नहाने वालों की संख्या बढ़ जाती है। अधिकतर घटनाओं में छात्र या कम उम्र के युवा ही काल का ग्रास बनते हैं।
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क्या कहती है पुलिस
सदर थाना प्रभारी जसबीर का कहना है कि इस गहरी नहर में नहाने वालों को कई बार चेताया जाता है। कई के खिलाफ कार्रवाई भी की जाती है। माइनर में न नहाने के लिए जागरूक भी किया जाता है। जगह-जगह निर्देशात्मक बोर्ड भी लगाए गए हैं कि इस गहरी नहर में नहाना खतरनाक है।