{"_id":"5c6da625bdec22737e6b0a8c","slug":"111550689829-jhajjar-bahadurgarh-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"पहले की पंचायत फिर झज्जर-बहादुरगढ़ मार्ग किया एक घंटे जाम","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
पहले की पंचायत फिर झज्जर-बहादुरगढ़ मार्ग किया एक घंटे जाम
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अमर उजाला ब्यूरो
बहादुरगढ़। बदमाशों द्वारा लूटपाट करके अधमरे हालत में छोड़े गए डाबोदा निवासी सुरेंद्र की मंगलवार रात पीजीआई रोहतक में मौत हो गई। उसकी मौत से परिजनों और गांव के लोगों में रोष पनप गया। इस दौरान गुस्साए लोगों ने बुधवार की दोपहर बहादुरगढ़-झज्जर मार्ग पर जाम लगा दिया और पुलिस प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। पुलिस की कार्रवाई से असंतुष्ट लोगों ने कहा कि वारदात को लगभग एक माह बीत जाने के बाद भी आरोपी पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं। जब तक लूटपाट करने वाले बदमाश नहीं पकड़े जाते वे जाम नहीं खोलेंगे। हालांकि पुलिस अधिकारियों के आश्वासन पर लोगों ने करीब एक घंटे बाद जाम तो खोल दिया लेकिन ये चेतावनी भी दी कि यदि दो दिनों में इस मामले में पुलिस कोई ठोस कार्रवाई नहीं करती है तो नेशनल हाईवे और केएमपी एक्सप्रेस (कुंडली-मानेसर-पलवल) वे को भी जाम कर दिया जाएगा।
ये है मामला
डाबोदा खुर्द का निवासी सुरेंद्र मलिक (38) 22 जनवरी को कबलाना स्थित अपने ईंट भट्ठे पर गया था। रात करीब 9 बजे वह पांच लाख रुपये लेकर अपने घर की ओर चल दिया। बाइक सवार सुरेंद्र गांव कबलाना के श्मशान घाट के पास पहुंचा ही था कि वहां मौजूद दो अज्ञात युवकों ने डंडों से मारकर उसे बाइक से गिरा दिया। इसके बाद लाठी-डंडों से उस पर वार किए और 5 लाख रुपये लेकर फरार हो गए। गंभीर रूप से घायल सुरेंद्र को अस्पताल में भर्ती कराया गया। इसके बाद सुरेंद्र कोमा में चला गया था। डॉक्टरों ने रेफर किया तो परिजन उसे गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में ले गए लेकिन हालत में सुधार नहीं आया। अभी कुछ दिन पहले ही परिजन उसे पीजीआई रोहतक में ले आए। इलाज के दौरान मंगलवार की रात को सुरेंद्र ने दम तोड़ दिया। सुरेंद्र दो बच्चों का पिता था।
उपायुक्त से भी मिले थे
इस मामले में 23 जनवरी को केस दर्ज हुआ था। केस दर्ज तो हुआ लेकिन लूटपाट करने वाले बदमाशों तक पुलिस नहीं पहुंच पाई। सरपंच प्रतिनिधि जयंत तंवर ने बताया कि आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए उनकी अगुवाई में चंद दिनों पूर्व ही ग्रामीणों का एक प्रतिनिधिमंडल उपायुक्त से मिला था। उपायुक्त के समक्ष आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग रखी। 72 घंटे में उचित कार्रवाई न होने पर जाम करने की चेतावनी भी दी गई थी।
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पहले की पंचायत, फिर लगाया जाम
रात को सुरेंद्र की मौत हुई तो परिजनों समेत पूरे गांव में रोष पनप गया। बुधवार की सुबह गांव में पंचायत हुई। पंचायत में जाम लगाने की योजना बनाई गई। साथ ही ये भी फैसला लिया कि जाम के दौरान गांव का कोई भी व्यक्ति फोटो या वीडियो नहीं बनाएगा। यदि कोई ऐसा करता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। पंचायत समाप्त होने के बाद 12: 40 बजे लोग झज्जर-बहादुरगढ़ मार्ग पर जुट गए और जाम लगा दिया। लोगों ने पुलिस प्रशासन पर मामले में ढीली कार्रवाई करने का आरोप लगाया। ग्रामीणों ने कहा कि उनके गांव के युवक को लुटेरों ने मारा डाला और पुलिस बस केवल एफआईआर दर्ज करने तक सीमित रह गई। 28 दिन तक जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष करते सुरेंद्र ने दम तोड़ दिया लेकिन पुलिस लुटेरों को पकड़ना तो दूर उनकी पहचान भी नहीं कर पाई है।
जाम खुलवाने में पुलिस को करनी पड़ी मशक्कत
जाम की सूचना मिलते ही सदर थाना प्रभारी सज्जन सिंह, डीएसपी अजायब सिंह सहित अन्य पुलिस अधिकारी दल बल सहित मौके पर पहुंचे। पुलिस ने लोगों को शांत कराने का प्रयास किया लेकिन ग्रामीण अपनी बात पर अड़े रहे। ग्रामीणों ने कहा कि जब तक लुटेरे नहीं पकड़े जाते वे जाम नहीं खोलेंगे। बाद में डीएसपी अजायब सिंह के आश्वासन व गांव के कुछ मौजिज लोगों के समझाने पर लोग शांत हुए और 1:45 बजे जाम खुला। करीब एक घंटे बाद मार्ग खुला तो जाम में फंसे लोगों की भी जान में जान आई।
पुलिस को दिया दो दिन का समय
जाम खोले जाने के बाद ग्रामीणों और पुलिस के बीच बैठक हुई। इस बैठक में ग्रामीणों ने पुलिस अधिकारियों को दो दिन का समय दिया और कहा कि यदि इस अवधि में पुलिस आरोपियों को पकड़ लेती है या फिर इस मामले में ठोस कार्रवाई करती है तो ठीक, वरना इसके बाद वे केएमपी व नेशनल हाईवे जाम कर देंगे। ग्रामीणों ने पुलिस से इलाके में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की भी बात कही। उधर, ग्राम सरपंच प्रतिनिधि एवं प्रदेश सरपंच एसोसिएशन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष जयंत तंवर ने कहा कि गांव ने एक युवक खोया है, पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए पूरा गांव एकजुट है। पुलिस जल्द से जल्द लुटेरों को गिरफ्तार करे।
सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंच गई थी। लोगों को समझाकर जाम खुलवा दिया गया। उक्त मामले में जांच की जा रही है। जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
अजायब सिंह, डीएसपी, बहादुरगढ़।
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बहादुरगढ़। बदमाशों द्वारा लूटपाट करके अधमरे हालत में छोड़े गए डाबोदा निवासी सुरेंद्र की मंगलवार रात पीजीआई रोहतक में मौत हो गई। उसकी मौत से परिजनों और गांव के लोगों में रोष पनप गया। इस दौरान गुस्साए लोगों ने बुधवार की दोपहर बहादुरगढ़-झज्जर मार्ग पर जाम लगा दिया और पुलिस प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। पुलिस की कार्रवाई से असंतुष्ट लोगों ने कहा कि वारदात को लगभग एक माह बीत जाने के बाद भी आरोपी पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं। जब तक लूटपाट करने वाले बदमाश नहीं पकड़े जाते वे जाम नहीं खोलेंगे। हालांकि पुलिस अधिकारियों के आश्वासन पर लोगों ने करीब एक घंटे बाद जाम तो खोल दिया लेकिन ये चेतावनी भी दी कि यदि दो दिनों में इस मामले में पुलिस कोई ठोस कार्रवाई नहीं करती है तो नेशनल हाईवे और केएमपी एक्सप्रेस (कुंडली-मानेसर-पलवल) वे को भी जाम कर दिया जाएगा।
ये है मामला
डाबोदा खुर्द का निवासी सुरेंद्र मलिक (38) 22 जनवरी को कबलाना स्थित अपने ईंट भट्ठे पर गया था। रात करीब 9 बजे वह पांच लाख रुपये लेकर अपने घर की ओर चल दिया। बाइक सवार सुरेंद्र गांव कबलाना के श्मशान घाट के पास पहुंचा ही था कि वहां मौजूद दो अज्ञात युवकों ने डंडों से मारकर उसे बाइक से गिरा दिया। इसके बाद लाठी-डंडों से उस पर वार किए और 5 लाख रुपये लेकर फरार हो गए। गंभीर रूप से घायल सुरेंद्र को अस्पताल में भर्ती कराया गया। इसके बाद सुरेंद्र कोमा में चला गया था। डॉक्टरों ने रेफर किया तो परिजन उसे गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में ले गए लेकिन हालत में सुधार नहीं आया। अभी कुछ दिन पहले ही परिजन उसे पीजीआई रोहतक में ले आए। इलाज के दौरान मंगलवार की रात को सुरेंद्र ने दम तोड़ दिया। सुरेंद्र दो बच्चों का पिता था।
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उपायुक्त से भी मिले थे
इस मामले में 23 जनवरी को केस दर्ज हुआ था। केस दर्ज तो हुआ लेकिन लूटपाट करने वाले बदमाशों तक पुलिस नहीं पहुंच पाई। सरपंच प्रतिनिधि जयंत तंवर ने बताया कि आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए उनकी अगुवाई में चंद दिनों पूर्व ही ग्रामीणों का एक प्रतिनिधिमंडल उपायुक्त से मिला था। उपायुक्त के समक्ष आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग रखी। 72 घंटे में उचित कार्रवाई न होने पर जाम करने की चेतावनी भी दी गई थी।
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पहले की पंचायत, फिर लगाया जाम
रात को सुरेंद्र की मौत हुई तो परिजनों समेत पूरे गांव में रोष पनप गया। बुधवार की सुबह गांव में पंचायत हुई। पंचायत में जाम लगाने की योजना बनाई गई। साथ ही ये भी फैसला लिया कि जाम के दौरान गांव का कोई भी व्यक्ति फोटो या वीडियो नहीं बनाएगा। यदि कोई ऐसा करता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। पंचायत समाप्त होने के बाद 12: 40 बजे लोग झज्जर-बहादुरगढ़ मार्ग पर जुट गए और जाम लगा दिया। लोगों ने पुलिस प्रशासन पर मामले में ढीली कार्रवाई करने का आरोप लगाया। ग्रामीणों ने कहा कि उनके गांव के युवक को लुटेरों ने मारा डाला और पुलिस बस केवल एफआईआर दर्ज करने तक सीमित रह गई। 28 दिन तक जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष करते सुरेंद्र ने दम तोड़ दिया लेकिन पुलिस लुटेरों को पकड़ना तो दूर उनकी पहचान भी नहीं कर पाई है।
जाम खुलवाने में पुलिस को करनी पड़ी मशक्कत
जाम की सूचना मिलते ही सदर थाना प्रभारी सज्जन सिंह, डीएसपी अजायब सिंह सहित अन्य पुलिस अधिकारी दल बल सहित मौके पर पहुंचे। पुलिस ने लोगों को शांत कराने का प्रयास किया लेकिन ग्रामीण अपनी बात पर अड़े रहे। ग्रामीणों ने कहा कि जब तक लुटेरे नहीं पकड़े जाते वे जाम नहीं खोलेंगे। बाद में डीएसपी अजायब सिंह के आश्वासन व गांव के कुछ मौजिज लोगों के समझाने पर लोग शांत हुए और 1:45 बजे जाम खुला। करीब एक घंटे बाद मार्ग खुला तो जाम में फंसे लोगों की भी जान में जान आई।
पुलिस को दिया दो दिन का समय
जाम खोले जाने के बाद ग्रामीणों और पुलिस के बीच बैठक हुई। इस बैठक में ग्रामीणों ने पुलिस अधिकारियों को दो दिन का समय दिया और कहा कि यदि इस अवधि में पुलिस आरोपियों को पकड़ लेती है या फिर इस मामले में ठोस कार्रवाई करती है तो ठीक, वरना इसके बाद वे केएमपी व नेशनल हाईवे जाम कर देंगे। ग्रामीणों ने पुलिस से इलाके में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की भी बात कही। उधर, ग्राम सरपंच प्रतिनिधि एवं प्रदेश सरपंच एसोसिएशन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष जयंत तंवर ने कहा कि गांव ने एक युवक खोया है, पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए पूरा गांव एकजुट है। पुलिस जल्द से जल्द लुटेरों को गिरफ्तार करे।
सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंच गई थी। लोगों को समझाकर जाम खुलवा दिया गया। उक्त मामले में जांच की जा रही है। जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
अजायब सिंह, डीएसपी, बहादुरगढ़।