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Jhajjar-Bahadurgarh News: कीपैड फोन में कनेक्टिविटी की समस्या, ग्रामीण परेशान
Sun, 17 May 2026 02:11 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
Updated Sun, 17 May 2026 02:11 AM IST
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16jjrp11-मोबाइल नहीं चलने की शिकायत की जानकारी देते गोरिया गांव के ग्रामीण। स्रोत : ग्रामीण
साल्हावास। मातनहेल ब्लॉक के गांव गोरिया में दो दिनों से निजी कंपनियों के मोबाइल कनेक्टिविटी न मिलने से ग्रामीण परेशान हैं।
सोशल मीडिया और संचार क्रांति के इस दौर में मोबाइल नेटवर्क के अभाव में शासन की ऑनलाइन योजनाओं और सुविधाओं का लाभ भी ग्रामीणों को नहीं मिल पा रहा है। महावीर सेक्रेटरी, दलबीर, प्रकाश, महावीर, राम पवार, रामपाल, धर्मवीर का कहना है कि पिछले दो दिनों से उनके फोन पर मोबाइल नेटवर्क तो शो हो रहा है, लेकिन मोबाइल कनेक्टिविटी नहीं हो पा रही है।
गांव से बाहर जाकर फोन मिलाने पर कभी कभार एक दो मिनट फोन मिलता है, लेकिन आवाज क्लीयर नहीं आती। शिकायतकर्ता अधिकतर ग्रामीण कीपैड का फोन प्रयोग करने वाले हैं। बुजुर्गों को इससे काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि वे डिजिटल फोन न रखकर कीपैड का फोन सबसे ज्यादा प्रयोग में ला रहे हैं।
उन्होंने बताया कि इमरजेंसी सेवाओं की जरूरत पड़ने पर ग्रामीणों को नेटवर्क की तलाश में भटकना पड़ता है। मोबाइल कंपनियों के टावर भी आए दिन बंद होने से मोबाइल उपभोक्ता परेशान होते हैं। मातनहेल, साल्हावास के ज्यादातर गांवों में मोबाइल नेटवर्क इन दिनों चुनौती बना हुआ है। आधुनिकता के इस दौर में गांव-गांव मोबाइल नेटवर्क पहुंचाने के सरकार के दावे यहां खोखले साबित हो रहे हैं। यदि किसी को बहुत जरूरी बात करनी हो तो गांव से बाहर नहर की तरफ जाना पड़ता है। इमरजेंसी होने पर सुबह का इंतजार करना पड़ता है या फिर किसी डिजिटल फोन रखने वाले के पास सहायता के लिए जाना पड़ता है।
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सोशल मीडिया और संचार क्रांति के इस दौर में मोबाइल नेटवर्क के अभाव में शासन की ऑनलाइन योजनाओं और सुविधाओं का लाभ भी ग्रामीणों को नहीं मिल पा रहा है। महावीर सेक्रेटरी, दलबीर, प्रकाश, महावीर, राम पवार, रामपाल, धर्मवीर का कहना है कि पिछले दो दिनों से उनके फोन पर मोबाइल नेटवर्क तो शो हो रहा है, लेकिन मोबाइल कनेक्टिविटी नहीं हो पा रही है।
गांव से बाहर जाकर फोन मिलाने पर कभी कभार एक दो मिनट फोन मिलता है, लेकिन आवाज क्लीयर नहीं आती। शिकायतकर्ता अधिकतर ग्रामीण कीपैड का फोन प्रयोग करने वाले हैं। बुजुर्गों को इससे काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि वे डिजिटल फोन न रखकर कीपैड का फोन सबसे ज्यादा प्रयोग में ला रहे हैं।
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उन्होंने बताया कि इमरजेंसी सेवाओं की जरूरत पड़ने पर ग्रामीणों को नेटवर्क की तलाश में भटकना पड़ता है। मोबाइल कंपनियों के टावर भी आए दिन बंद होने से मोबाइल उपभोक्ता परेशान होते हैं। मातनहेल, साल्हावास के ज्यादातर गांवों में मोबाइल नेटवर्क इन दिनों चुनौती बना हुआ है। आधुनिकता के इस दौर में गांव-गांव मोबाइल नेटवर्क पहुंचाने के सरकार के दावे यहां खोखले साबित हो रहे हैं। यदि किसी को बहुत जरूरी बात करनी हो तो गांव से बाहर नहर की तरफ जाना पड़ता है। इमरजेंसी होने पर सुबह का इंतजार करना पड़ता है या फिर किसी डिजिटल फोन रखने वाले के पास सहायता के लिए जाना पड़ता है।
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