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नगर परिषद बहादुरगढ़ के ईओ, बीआई और तत्कालीन एटीपी निलंबित
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बहादुरगढ़। बेशकीमती सरकारी जमीन पर निजी आवेदक का बिल्डिंग प्लान पास करने के आरोप में नगर परिषद के तीन अधिकारियों पर गाज गिरी है। नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी अतर सिंह, तत्कालीन सहायक नगर योजनाकार जयपाल और भवन निरीक्षक विवेक जैन को शहरी स्थानीय निकाय विभाग ने निलंबित कर दिया है। इनके निलंबन के आदेश शहरी स्थानीय निकाय विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव एसएन राय ने गत मंगलवार को जारी किए। ईओ अतर सिंह कलानौर की कांग्रेस विधायक शकुंतला खटक के पति हैं।
इन तीनों पर बहादुरगढ़ के मेन बाजार स्थित विवादित जमीन पर नक्शा पास करने का आरोप था। यह नक्शा फरवरी माह में पास किया गया था। हालांकि शिवा मार्केट की इस जमीन पर अब दुकानों का निर्माण भी हो चुका है। एक माह बाद जब यह मामला प्रकाश में आया था तो उस समय यहां की नगर परिषद की चेयरपर्सन शीला राठी ने तीनों अधिकारियों पर मिलीभगत का आरोप लगाकर सीएम से लेकर सभी उच्च अधिकारियों को शिकायत दी थी और इन अधिकारियों पर कार्रवाई करने की मांग की थी। अब इन तीनों अधिकारियों को सस्पेंड किया गया है। बता दें कि इस मुद्दे को अमर उजाला ने प्रमुखता से उठाया था।
मेन बाजार में पूर्व विधायक सूरजमल वाली गली में जिस जमीन को सरकारी बताकर नगर परिषद ने यहां किए जा रहे निर्माण को जनवरी 2019 में तोड़ दिया था उसी जमीन पर कुछ सप्ताह बाद अधिकारियों ने एक निजी आवेदक का नक्शा पास कर दिया। नक्शा पास करने वाले कार्यकारी अधिकारी अतर सिंह ने अपनी कार्यवाही को जायज बताया था। उन्होंने कहा था कि उक्त जमीन की मलकियत वक्फ बोर्ड की है, जिस समय नप ने निर्माण तोड़ा था उस समय नक्शा पास करवाए बिना ही निर्माण किया जा रहा था। बाद में वक्फ बोर्ड की एनओसी मिलने पर नक्शा पास कर दिया गया। जमीन को लेकर हाईकोर्ट में चल रहे केस के बारे में ईओ ने कहा था कि केस 750 वर्ग गज जमीन को लेकर चल रहा है, जबकि मौके पर 912 वर्ग गज जमीन है। जिस 152 गज जमीन पर निर्माण के लिए नक्शा पास किया गया उस जमीन का केस से कोई संबंध नहीं है।
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यहां खास बात ये है कि नगर परिषद के कानूनी सलाहकार ने भी इस जमीन पर नक्शा पास नहीं करने की सलाह दी थी, लेकिन इसके बावजूद पास कर दिया गया। मामले का खुलासा होने पर नप अध्यक्ष शीला राठी ने ईओ अतर सिंह ने स्पष्टीकरण मांगा और एटीपी से चार्ज वापस लेने के निर्देश दिए। जिला नगर आयुक्त आशिमा सांगवान को भी उन्होंने सारी स्थिति से अवगत करवाया। जिला नगर आयुक्त ने अपने कार्यालय के नोडल अधिकारी और नगर परिषद झज्जर के कार्यकारी अधिकारी अरुण नांदल को इस मामले की जांच करने के आदेश दिए।
सरकार की कार्रवाई जायज है। इन अधिकारियों ने नियमों को दरकिनार कर विवादित जमीन पर नक्शा पास कर दिया था। मैंने भी इसकी शिकायत की थी। जब तक मैं नप चेयरपर्सन के पद पर हूं, सरकारी जमीन पर किसी का भी कब्जा नहीं होने दिया जाएगा। रही बात विवादित जमीन पर बने निर्माण की तो उसे कानूनी राय लेकर तोड़ने की कार्रवाई की जाएगी।
-शीला राठी, चेयरपर्सन, नगर परिषद, बहादुरगढ़
इन तीनों अधिकारियों को निलंबित नहीं बर्खास्त करना चाहिए था। पैसे के दम व राजनीतिक रसूख से ये फिर बहाल हो सकते हैं। पूरे शहर में पिछले छह महीनों में जितने भी अवैध कब्जे हुए वो इनकी देन हैं। आम आदमी छोटे-छोटे कामों के लिए भी इन्हीं के कारण दर-दर भटकता था। परिषद में अभी एक-दो अन्य लोग नौकरी कम परिषद की राजनीति ज्यादा करते हैं। जिस कारण महीनों से वार्डों में विकास कार्य रुके हुए हैं।
-जसबीर सैनी, नगर पार्षद, वार्ड नंबर-14 बहादुरगढ़
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इन तीनों पर बहादुरगढ़ के मेन बाजार स्थित विवादित जमीन पर नक्शा पास करने का आरोप था। यह नक्शा फरवरी माह में पास किया गया था। हालांकि शिवा मार्केट की इस जमीन पर अब दुकानों का निर्माण भी हो चुका है। एक माह बाद जब यह मामला प्रकाश में आया था तो उस समय यहां की नगर परिषद की चेयरपर्सन शीला राठी ने तीनों अधिकारियों पर मिलीभगत का आरोप लगाकर सीएम से लेकर सभी उच्च अधिकारियों को शिकायत दी थी और इन अधिकारियों पर कार्रवाई करने की मांग की थी। अब इन तीनों अधिकारियों को सस्पेंड किया गया है। बता दें कि इस मुद्दे को अमर उजाला ने प्रमुखता से उठाया था।
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मेन बाजार में पूर्व विधायक सूरजमल वाली गली में जिस जमीन को सरकारी बताकर नगर परिषद ने यहां किए जा रहे निर्माण को जनवरी 2019 में तोड़ दिया था उसी जमीन पर कुछ सप्ताह बाद अधिकारियों ने एक निजी आवेदक का नक्शा पास कर दिया। नक्शा पास करने वाले कार्यकारी अधिकारी अतर सिंह ने अपनी कार्यवाही को जायज बताया था। उन्होंने कहा था कि उक्त जमीन की मलकियत वक्फ बोर्ड की है, जिस समय नप ने निर्माण तोड़ा था उस समय नक्शा पास करवाए बिना ही निर्माण किया जा रहा था। बाद में वक्फ बोर्ड की एनओसी मिलने पर नक्शा पास कर दिया गया। जमीन को लेकर हाईकोर्ट में चल रहे केस के बारे में ईओ ने कहा था कि केस 750 वर्ग गज जमीन को लेकर चल रहा है, जबकि मौके पर 912 वर्ग गज जमीन है। जिस 152 गज जमीन पर निर्माण के लिए नक्शा पास किया गया उस जमीन का केस से कोई संबंध नहीं है।
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यहां खास बात ये है कि नगर परिषद के कानूनी सलाहकार ने भी इस जमीन पर नक्शा पास नहीं करने की सलाह दी थी, लेकिन इसके बावजूद पास कर दिया गया। मामले का खुलासा होने पर नप अध्यक्ष शीला राठी ने ईओ अतर सिंह ने स्पष्टीकरण मांगा और एटीपी से चार्ज वापस लेने के निर्देश दिए। जिला नगर आयुक्त आशिमा सांगवान को भी उन्होंने सारी स्थिति से अवगत करवाया। जिला नगर आयुक्त ने अपने कार्यालय के नोडल अधिकारी और नगर परिषद झज्जर के कार्यकारी अधिकारी अरुण नांदल को इस मामले की जांच करने के आदेश दिए।
सरकार की कार्रवाई जायज है। इन अधिकारियों ने नियमों को दरकिनार कर विवादित जमीन पर नक्शा पास कर दिया था। मैंने भी इसकी शिकायत की थी। जब तक मैं नप चेयरपर्सन के पद पर हूं, सरकारी जमीन पर किसी का भी कब्जा नहीं होने दिया जाएगा। रही बात विवादित जमीन पर बने निर्माण की तो उसे कानूनी राय लेकर तोड़ने की कार्रवाई की जाएगी।
-शीला राठी, चेयरपर्सन, नगर परिषद, बहादुरगढ़
इन तीनों अधिकारियों को निलंबित नहीं बर्खास्त करना चाहिए था। पैसे के दम व राजनीतिक रसूख से ये फिर बहाल हो सकते हैं। पूरे शहर में पिछले छह महीनों में जितने भी अवैध कब्जे हुए वो इनकी देन हैं। आम आदमी छोटे-छोटे कामों के लिए भी इन्हीं के कारण दर-दर भटकता था। परिषद में अभी एक-दो अन्य लोग नौकरी कम परिषद की राजनीति ज्यादा करते हैं। जिस कारण महीनों से वार्डों में विकास कार्य रुके हुए हैं।
-जसबीर सैनी, नगर पार्षद, वार्ड नंबर-14 बहादुरगढ़