फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Jhajjar/Bahadurgarh News ›   Children becoming skilled with hands, knowing the specialty of Haryanvi culture

Jhajjar-Bahadurgarh News: .हाथों के हुनरमंद बन रहे बच्चे, जान रहे हरियाणवी संस्कृति की खासियत

Thu, 15 Jun 2023 01:36 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़ Updated Thu, 15 Jun 2023 01:36 AM IST
विज्ञापन
Children becoming skilled with hands, knowing the specialty of Haryanvi culture
झज्जर। शहर के रमेश कुमार मॉडल संस्कृति स्कूल में टॉबर उत्सव के तहत चल रहे ग्रीष्मकालीन शिविर में बच्चे मूर्तिकला, क्ले मॉडलिंग,चित्रकला, पीओपी सीखकर हुनरमंद बन रहे हैं। अपने हाथ से एक से बढ़कर एक खिलौने और अन्य सामान तैयार कर रहे हैं। हरियाणवी सभ्यता संस्कृति व कलाओं से बच्चों को रूबरू कराया जा रहा है।
विज्ञापन

शिविर में प्रशिक्षण दे रहीं प्रशिक्षक सुनीता छिल्लर पुष्कर ने बताया कि कला एवं संस्कृति कार्य विभाग हरियाणा एवं शिक्षा विभाग के संयुक्त तत्वाधान में स्कूल स्तर पर बच्चों के लिए टाबर उत्सव 2023 का आयोजन हो रहा है। शहर के शहीद रमेश कुमार मॉडल संस्कृति स्कूल परिसर में सुबह 9 बजे से लेकर 12 बजे तक इसमें बच्चों को विभिन्न कलाओं का प्रशिक्षण देने का काम किया जा रहा है।
विज्ञापन




उन्होंने बताया कि बच्चों के लिए मूर्तिकला, क्ले मॉडलिंग,चित्रकला, पीओपी व अन्य सीखना उनके बौद्धिक विकास के लिए काफी महत्वपूर्ण साबित हो रही हैं। उन्होंने बताया कि बच्चे लगातार मोबाइल से चिपके रहते हैं जिससे बच्चों की आंखों व उनके स्वास्थ्य पर सीधा प्रभाव पड़ रहा है और बच्चे चिड़चिडे़, जिद्दी हो गए हैं, उनका शारीरिक मानसिक विकास रुक गया हैं। बच्चे आजकल काॅर्टूनों की ख्याली दुनिया में विचरण करते रहते हैं। कार्टून के सुपर हीरो उनके आदर्श बन गए है जोकि बच्चों के लिए आगे जाकर घातक साबित हो सकता रहा हैं। इसीलिए बच्चों को समाज के संस्कार, सभ्यता, संस्कृति की कलाएं सिखानी चाहिए ताकि बच्चे बनावटी दुनिया में न रहकर धरातल से जुड़ा रहे। उन्होंने बताया कि बच्चों को सकारात्मक माहौल देने के लिए सरकार की ओर से चलाई गई है विविध कलाओं को सिखाने की पहल शानदार है और बच्चे खुशी-खुशी विभिन्न कलाओं का प्रशिक्षण ले रहे हैं। उन्होंने बताया कि सभी विद्यार्थियों को मूर्तिकला विद्या में प्रयोग होने वाली सामग्री जैसे पीओपी व सामग्री से लघु मूर्ति बनाकर रंगों से हुनर सिखाए जा रहे हैं। जिससे भविष्य में उनको मूर्ति क्षेत्र में शिक्षा के साथ-साथ मूर्तिकला क्षेत्र में भी अपना बनाने के लिए मददगार साबित होगा। उन्होंने बताया कि किसी भी आयु वर्ग के बच्चे इसमें भाग ले सकते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


- प्रशिक्षण ले रहे बच्चों की प्रतिक्रियाएं:


मैं प्रतिदिन शिविर में आ रहा हूं। माता-पिता भी बेहद सहयोग कर रहे हैं और उन्हें अच्छे प्रकार से प्रशिक्षण दिया जा रहा है। उन्हें अच्छा लग रहा है।

- मानवी।



मूर्तिकला, क्ले मॉडलिंग, रंगों का हुनर सीखने में बहुत अच्छा लग रहा है। उन्हें उन्होंने कई अच्छे मॉडल भी बनाए हैं।

- मुकुल।



गर्मी की छुट्टियों में मूर्तिकला, क्ले मॉडलिंग हुए अन्य कलाएं सीखने के लिए उत्साहित हूं और उन्हें काफी कलाएं सीखी हैं वे आगे भी प्रयास सीखने का करता रहेगा।

- हिमांशी।



मूर्तिकला क्ले मॉडलिंग को सिखने में काफी रुचि बनी है। कई खिलौने बनाने आ गए हैं। अच्छे माहौल में कई कला सीखने को मिल रही हैं।

- वासु।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed