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Jhajjar-Bahadurgarh News: नहाय-खाय के साथ कल से शुरू होगा आस्था का महापर्व छठ
Mon, 04 Nov 2024 04:17 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
Updated Mon, 04 Nov 2024 04:17 AM IST
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-फोटो 59 : शहर के रेलवे रोड बाजार में छठ पूजा के लिए वस्तुएं खरीदते श्रद्धालु। संवाद
बहादुरगढ़। सूर्य उपासना के प्रतीक चार दिवसीय छठ महापर्व की शुरुआत मंगलवार 5 नवंबर से हो रही है। इस पर्व को उमंग, श्रद्धा व परंपरागत तरीके से मनाने के लिए पूर्वांचल वासियों में काफी उत्साह है। राष्ट्रीय राजधानी से सटे औद्योगिक नगर के रूप में खास पहचान रखने वाले बहादुरगढ़ में भी इस पर्व को मनाने की तैयारी जोरों पर हैं।
बहादुरगढ़ शहर में 70 हजार से अधिक संख्या में पूर्वांचल के लोग रहते हैं। ये पर्व मनाने को पूरी तरह तैयारी कर चुके हैं। पूर्वांचल परिवार के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रदीप सिन्हा ने बताया कि संतान की सुख-समृद्धि और दीर्घायु की कामना के लिए छठ महापर्व मनाया जाता है। सूर्यदेव व षष्ठी मैया की पूजा की जाती है। नहाय-खाय के साथ यह महापर्व शुरु होता है। इस बार इस पर्व की शुरुआत 5 नवंबर से हो रही है और समापन 8 नवंबर को होगा। इस दौरान 36 घंटे का निर्जला व्रत रखा जाता है। नहाय-खाय से इस पर्व की शुरुआत होती है। इस दिन पूरे घर की साफ-सफाई की जाती है और स्नान करने के बाद व्रत का संकल्प लिया जाता है। इस दिन चना दाल, कद्दू की सब्जी और चावल का प्रसाद ग्रहण किया जाता है। अगले दिन (लोहंडा) खरना से व्रत की शुरुआत होती है। इसके अगले दिन भगवान भास्कर को पहला अर्घ्य शाम को दिया जाता है और छठ के अंतिम दिन सुबह उदीयमान सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। इसके साथ ही यह चार दिवसीय अनुष्ठान पूरा हो जाता है।
बाजार में खरीदारी बढ़ी
बहादुरगढ़ में वर्षों से यह पर्व मनाया जा रहा है। ऐसेे में रविवार को ही बाजारों में पूजा पाठ से संबंधित सामान खरीदने वालाें की भीड़ जमा रही। बहादुरगढ़ के रेलवे रोड, मेन बाजार, झज्जर रोड पर सब्जी मंडी के आसपास काफी भीड़भाड़ रही।
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बहादुरगढ़ शहर में 70 हजार से अधिक संख्या में पूर्वांचल के लोग रहते हैं। ये पर्व मनाने को पूरी तरह तैयारी कर चुके हैं। पूर्वांचल परिवार के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रदीप सिन्हा ने बताया कि संतान की सुख-समृद्धि और दीर्घायु की कामना के लिए छठ महापर्व मनाया जाता है। सूर्यदेव व षष्ठी मैया की पूजा की जाती है। नहाय-खाय के साथ यह महापर्व शुरु होता है। इस बार इस पर्व की शुरुआत 5 नवंबर से हो रही है और समापन 8 नवंबर को होगा। इस दौरान 36 घंटे का निर्जला व्रत रखा जाता है। नहाय-खाय से इस पर्व की शुरुआत होती है। इस दिन पूरे घर की साफ-सफाई की जाती है और स्नान करने के बाद व्रत का संकल्प लिया जाता है। इस दिन चना दाल, कद्दू की सब्जी और चावल का प्रसाद ग्रहण किया जाता है। अगले दिन (लोहंडा) खरना से व्रत की शुरुआत होती है। इसके अगले दिन भगवान भास्कर को पहला अर्घ्य शाम को दिया जाता है और छठ के अंतिम दिन सुबह उदीयमान सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। इसके साथ ही यह चार दिवसीय अनुष्ठान पूरा हो जाता है।
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बाजार में खरीदारी बढ़ी
बहादुरगढ़ में वर्षों से यह पर्व मनाया जा रहा है। ऐसेे में रविवार को ही बाजारों में पूजा पाठ से संबंधित सामान खरीदने वालाें की भीड़ जमा रही। बहादुरगढ़ के रेलवे रोड, मेन बाजार, झज्जर रोड पर सब्जी मंडी के आसपास काफी भीड़भाड़ रही।
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