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Jhajjar-Bahadurgarh News: नूना माजरा पीएचसी में 5 कर्मचारी मिले नदारद
Sat, 22 Mar 2025 01:12 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
Updated Sat, 22 Mar 2025 01:12 AM IST
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-फोटो 63 : नूना माजरा पीएचसी में अधिकारियों से बातचीत करते विधायक राजेश जून। कार्यालय
बहादुरगढ़। बहादुरगढ़ के विधायक राजेश जून ने नूना माजरा में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान यहां पर तैनात 13 में से 5 डॉक्टर और अन्य मेडिकल स्टाफ गैर हाजिर मिला।
विधायक जून ने गैर हाजिर कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए सरकार को पत्र लिखने की बात कही है। स्वास्थ्य मंत्री आरती राव से भी अनुपस्थित कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की है।
विधायक का कहना है कि सरकार ने 2009 में करोड़ों की लागत से नूना माजरा गांव में पीएचसी बनाया था। यहां सरकार की ओर से अत्याधुनिक मशीन पहुंचाई गई। इसके बावजूद 16 साल के अंतराल में किसी भी मरीज को यहां दाखिल करके इलाज नहीं किया गया। यहां 13 कर्मचारी सरकार ने नियुक्त किए गए हैं। इनमें से चार कर्मचारी ऐसे हैं जिन्होंने शुक्रवार को ना तो किसी तरह की छुट्टी की एप्लीकेशन भेजी है और ना ही अपने सीनियर डॉक्टरों को नहीं आने के लिए अवगत करवाया है। जिस महिला डॉक्टर को पीएचसी की जिम्मेदारी सौंपी गई है वह भी अनुपस्थिति मिली हैं। इसके साथ ही दो महीने पहले सोमवार के दिन एक स्पेशलिस्ट डॉक्टर की ड्यूटी भी सीएमओ ऑफिस की तरफ से पीएचसी में लगाई गई है। पिछले दो महीने से वह डॉक्टर एक बार भी नहीं आए हैं।
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ग्रामीण बोले- इलाज के लिए करना पड़ता है शहर का रुख
ग्रामीण जगदीश कुमार, जय सिंह, दयानंद, सुखबीर ने बताया कि लोग यहां इलाज के लिए आते हैं तो उन्हें डॉक्टर नहीं मिलता। कर्मचारी बिना बताए यहां गैर हाजिर रहते हैं। उन्हें इलाज के लिए भी शहर की तरफ भागना पड़ता है। जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने के लिए भी डॉक्टर के कार्यालय के कई चक्कर काटने पड़ते हैं मगर यहां स्टाफ नहीं मिलता।
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विधायक जून ने गैर हाजिर कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए सरकार को पत्र लिखने की बात कही है। स्वास्थ्य मंत्री आरती राव से भी अनुपस्थित कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की है।
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विधायक का कहना है कि सरकार ने 2009 में करोड़ों की लागत से नूना माजरा गांव में पीएचसी बनाया था। यहां सरकार की ओर से अत्याधुनिक मशीन पहुंचाई गई। इसके बावजूद 16 साल के अंतराल में किसी भी मरीज को यहां दाखिल करके इलाज नहीं किया गया। यहां 13 कर्मचारी सरकार ने नियुक्त किए गए हैं। इनमें से चार कर्मचारी ऐसे हैं जिन्होंने शुक्रवार को ना तो किसी तरह की छुट्टी की एप्लीकेशन भेजी है और ना ही अपने सीनियर डॉक्टरों को नहीं आने के लिए अवगत करवाया है। जिस महिला डॉक्टर को पीएचसी की जिम्मेदारी सौंपी गई है वह भी अनुपस्थिति मिली हैं। इसके साथ ही दो महीने पहले सोमवार के दिन एक स्पेशलिस्ट डॉक्टर की ड्यूटी भी सीएमओ ऑफिस की तरफ से पीएचसी में लगाई गई है। पिछले दो महीने से वह डॉक्टर एक बार भी नहीं आए हैं।
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ग्रामीण बोले- इलाज के लिए करना पड़ता है शहर का रुख
ग्रामीण जगदीश कुमार, जय सिंह, दयानंद, सुखबीर ने बताया कि लोग यहां इलाज के लिए आते हैं तो उन्हें डॉक्टर नहीं मिलता। कर्मचारी बिना बताए यहां गैर हाजिर रहते हैं। उन्हें इलाज के लिए भी शहर की तरफ भागना पड़ता है। जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने के लिए भी डॉक्टर के कार्यालय के कई चक्कर काटने पड़ते हैं मगर यहां स्टाफ नहीं मिलता।

-फोटो 63 : नूना माजरा पीएचसी में अधिकारियों से बातचीत करते विधायक राजेश जून। कार्यालय