{"_id":"66f0b692d1d5cee875094864","slug":"cases-of-dry-eyes-allergy-are-increasing-with-weather-change-bahadurgarh-news-c-195-1-jjr1002-113973-2024-09-23","type":"story","status":"publish","title_hn":"Jhajjar-Bahadurgarh News: मौसम परिवर्तन के साथ बढ़ रहे आंखों में सूखी एलर्जी के केस","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Jhajjar-Bahadurgarh News: मौसम परिवर्तन के साथ बढ़ रहे आंखों में सूखी एलर्जी के केस
Mon, 23 Sep 2024 06:00 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
Updated Mon, 23 Sep 2024 06:00 AM IST
विज्ञापन
22jjrp06- झज्जर। सिविल अस्पताल में बच्चों की जांच करती चिकित्सक। संवाद
झज्जर। मौसम में परिर्वतन के कारण बच्चों में सूखी आंखों के (वर्नल केराटोकोनजंक्टिवाइटिस) एलर्जी के मामले आ रहे हैं। इसे स्प्रिंग कैटर भी कहा जाता है। यह एलर्जी चार से दस साल तक के बच्चों में होने ज्यादा संभावना होती है। इस महीने अब तक 180 बच्चोंं एलर्जी से पीड़ित होकर इलाज कराने के लिए सरकारी अस्पताल में आ चुके हैं।
यदि समय पर नहीं इलाज मिलता है तो आंखों की रोशनी तक जा सकती है। हर साल यह बीमारी साल में दो बार आती हैं। इन दिनों में बच्चों की आंखों में एलर्जी के मामले ज्यादा आ रहे हैं। खासकर सूखी आंख के मामले ज्यादा आ रहे हैं। यह बीमारी आंखों को प्रभावित करती है। खासकर लड़कों में यह बीमारी ज्यादा देखने को मिलती है। यह बीमारी आंखों की सतह पर सूजन पैदा करती है।
यह बीमारी साल में अप्रैल, मई और अगस्त-सिंतबर में माह में ज्यादा फैलती है। इस दौरान आंखें लाल रहती है। इसका इलाज करवाने पर 14 साल की आयु होने पर यह बीमारी पूरी तरह खत्म हो सकती है। इस बीमारी में कॉर्निया के पास सफेद दाग बन जाते है, जो बाद में कॉर्निया के पूरे हिस्से को सफेद कर देते हैं। इस कारण कम दिखाई देने लगता है।
विज्ञापन
यदि इसका समय रहते इलाज नहीं करवाया जाता तो आंखों की रोशनी तक जा सकती है। समय से पहले आंखों में मोतियाबिंद और काला मोतियाबिंद हो सकता है। पिछले एक सप्ताह से बारिश होने के कारण इसके मामलों में अचानक वृद्धि हुई है। पहले जहां 5-7 केस आते थे, वहीं अब बारिश के कारण मामले दोगुने आ रहे हैं। एक सप्ताह में करीब 80 मामले आ चुके हैं। वहीं महीने भर में करीब 190 के आसपास केस आए हैं।
लक्षण
-आंखों में खुजली, पानी आना और तार जैसा स्राव होना
-दृष्टि धुंधली होना।
-प्रकाश के प्रति असामान्य रूप से संवेदनशील होना
-जागने के बाद आंखें खोलने में कठिनाई होना।
-ऊपरी पलकों के नीचे कोबलस्टोन के आकार के छोटे-छोटे उभार दिखाई देना।
क्या करें
ठंडे वातावरण में रहना चाहिए।
-बर्फ की सिकाई करनी चाहिए।
वर्जन
स्प्रिंग कैटर एलर्जी साल में दो बार होती है। इसकी चपेट में चार से दस साले के बच्चे आते हैं। आंखों में जलन हाेने पर बार-बार आंखों को नहीं मलना चाहिए। समय रहते ही आंखों के डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। बिना डाॅक्टर के परामर्श के आंखों में दवाई नहीं डालनी चाहिए। इससे आंखों की रोशनी तक जा सकती है। आंखों समय-समय पर साफ करते रहना चाहिए।-डॉ. नविता यादव, नेत्र सर्जन, सिविल अस्पताल, झज्जर
विज्ञापन
यदि समय पर नहीं इलाज मिलता है तो आंखों की रोशनी तक जा सकती है। हर साल यह बीमारी साल में दो बार आती हैं। इन दिनों में बच्चों की आंखों में एलर्जी के मामले ज्यादा आ रहे हैं। खासकर सूखी आंख के मामले ज्यादा आ रहे हैं। यह बीमारी आंखों को प्रभावित करती है। खासकर लड़कों में यह बीमारी ज्यादा देखने को मिलती है। यह बीमारी आंखों की सतह पर सूजन पैदा करती है।
विज्ञापन
यह बीमारी साल में अप्रैल, मई और अगस्त-सिंतबर में माह में ज्यादा फैलती है। इस दौरान आंखें लाल रहती है। इसका इलाज करवाने पर 14 साल की आयु होने पर यह बीमारी पूरी तरह खत्म हो सकती है। इस बीमारी में कॉर्निया के पास सफेद दाग बन जाते है, जो बाद में कॉर्निया के पूरे हिस्से को सफेद कर देते हैं। इस कारण कम दिखाई देने लगता है।
विज्ञापन
यदि इसका समय रहते इलाज नहीं करवाया जाता तो आंखों की रोशनी तक जा सकती है। समय से पहले आंखों में मोतियाबिंद और काला मोतियाबिंद हो सकता है। पिछले एक सप्ताह से बारिश होने के कारण इसके मामलों में अचानक वृद्धि हुई है। पहले जहां 5-7 केस आते थे, वहीं अब बारिश के कारण मामले दोगुने आ रहे हैं। एक सप्ताह में करीब 80 मामले आ चुके हैं। वहीं महीने भर में करीब 190 के आसपास केस आए हैं।
लक्षण
-आंखों में खुजली, पानी आना और तार जैसा स्राव होना
-दृष्टि धुंधली होना।
-प्रकाश के प्रति असामान्य रूप से संवेदनशील होना
-जागने के बाद आंखें खोलने में कठिनाई होना।
-ऊपरी पलकों के नीचे कोबलस्टोन के आकार के छोटे-छोटे उभार दिखाई देना।
क्या करें
ठंडे वातावरण में रहना चाहिए।
-बर्फ की सिकाई करनी चाहिए।
वर्जन
स्प्रिंग कैटर एलर्जी साल में दो बार होती है। इसकी चपेट में चार से दस साले के बच्चे आते हैं। आंखों में जलन हाेने पर बार-बार आंखों को नहीं मलना चाहिए। समय रहते ही आंखों के डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। बिना डाॅक्टर के परामर्श के आंखों में दवाई नहीं डालनी चाहिए। इससे आंखों की रोशनी तक जा सकती है। आंखों समय-समय पर साफ करते रहना चाहिए।-डॉ. नविता यादव, नेत्र सर्जन, सिविल अस्पताल, झज्जर