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बीएसएफ के जवान की श्रीनगर में हृदयगति रुकने से मौत, सैनिक सम्मान के साथ किया अंतिम संस्कार
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अरुण चौहान के पुत्र को तिरंगा सौंपते बीएसएफ के अधिकारी।
- फोटो : Jhjhar
झज्जर। गिजाड़ौध गांव निवासी व बीएसएफ के हवलदार अरुण चौहान का हृदयगति रुकने से 26 फरवरी वीरवार को निधन हो गया था। जिसके बाद रविवार को उनका पार्थिव शरीर पैतृक गांव में पहुंचा। जिस समय उनका पार्थिव शरीर गांव में पहुंचा तो भारत माता की जय, अरुण चौहान अमर रहे के जयकारों से गुंजायमान हो गया।
गिजाड़ौध गांव निवासी अरुण चौहान पुत्र जगदीश चौहान 18 वर्ष 1 महीने की आयु में बीएसएफ में सिपाही के पद पर भर्ती हुए थे। करीब 20 वर्ष उन्होंने पश्चिमी बंगाल, राजस्थान, छत्तीसगढ़, पंजाब, जम्मू कश्मीर में देश को सेवाएं दी। उनकी यूनिट फिलहाल जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर में तैनात थी। 26 फरवरी को ड्यूटी के दौरान उनका हृदयगति रुकने से निधन हो गया। बीएसएफ की गाड़ी से उनका पार्थिव शरीर रविवार को गांव में लाया गया। जहां पर जिला प्रशासन की तरफ से सहायक पुलिस अधीक्षक विक्रांत भूषण की अगुवाई में सलामी दी गई। वहीं बीएसएफ की तरफ से पार्थिव शरीर के साथ आए एएसआई जितेंद्र सिंह व बीएसएफ की सलामी गार्द ने मातमी धुन बजाते हुए उन्हें सलामी दी। अरुण चौहान के 7 वर्षीय पुत्र तनिष्क ने अपने पिता को मुखाग्नि दी और बीएसएफ के अधिकारियों ने उनके पुत्र को ही तिरंगा सौंपा। उनकी अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में गांव व आसपास क्षेत्र के लोग शामिल हुए।
- पिता भी बीएसएफ से हैं डीएसपी पद से सेवानिवृत्त
अरुण चौहान के पिता जगदीश चौहान भी बीएसएफ में कार्यरत रहे हैं। फिलहाल वे डीएसपी पद से सेवानिवृत्त हो चुके हैं। अरुण अपने पीछे माता-पिता, पत्नी व 7 वर्षीय पुत्र व 4 वर्षीय पुत्री को छोड़ गए हैं। अरुण की दो बहनें हैं जो कि शादी हैं।
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गिजाड़ौध गांव निवासी अरुण चौहान पुत्र जगदीश चौहान 18 वर्ष 1 महीने की आयु में बीएसएफ में सिपाही के पद पर भर्ती हुए थे। करीब 20 वर्ष उन्होंने पश्चिमी बंगाल, राजस्थान, छत्तीसगढ़, पंजाब, जम्मू कश्मीर में देश को सेवाएं दी। उनकी यूनिट फिलहाल जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर में तैनात थी। 26 फरवरी को ड्यूटी के दौरान उनका हृदयगति रुकने से निधन हो गया। बीएसएफ की गाड़ी से उनका पार्थिव शरीर रविवार को गांव में लाया गया। जहां पर जिला प्रशासन की तरफ से सहायक पुलिस अधीक्षक विक्रांत भूषण की अगुवाई में सलामी दी गई। वहीं बीएसएफ की तरफ से पार्थिव शरीर के साथ आए एएसआई जितेंद्र सिंह व बीएसएफ की सलामी गार्द ने मातमी धुन बजाते हुए उन्हें सलामी दी। अरुण चौहान के 7 वर्षीय पुत्र तनिष्क ने अपने पिता को मुखाग्नि दी और बीएसएफ के अधिकारियों ने उनके पुत्र को ही तिरंगा सौंपा। उनकी अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में गांव व आसपास क्षेत्र के लोग शामिल हुए।
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- पिता भी बीएसएफ से हैं डीएसपी पद से सेवानिवृत्त
अरुण चौहान के पिता जगदीश चौहान भी बीएसएफ में कार्यरत रहे हैं। फिलहाल वे डीएसपी पद से सेवानिवृत्त हो चुके हैं। अरुण अपने पीछे माता-पिता, पत्नी व 7 वर्षीय पुत्र व 4 वर्षीय पुत्री को छोड़ गए हैं। अरुण की दो बहनें हैं जो कि शादी हैं।
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