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Jhajjar-Bahadurgarh News: सांसों को मिली थोड़ी राहत, 231 पर पहुंचा एक्यूआई
Mon, 20 Nov 2023 01:25 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
Updated Mon, 20 Nov 2023 01:25 AM IST
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बहादुरगढ़ में रविवार और साफ हो गया मौसम। संवाद
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संवाद न्यूज एजेंसी
बहादुरगढ़। दो दिनों से प्रदूषण का स्तर लगातार कम हो रहा है। ऐसे में शहरवासियों को साफ हवा में सांस मिल रही है। हालांकि अभी ज्यादा राहत नहीं है, लेकिन प्रदूषण कम होने के बाद से लोगों को हल्की राहत जरूर मिल रही है। प्रदूषण के कम होने का सबसे बड़ा कारण दो दिनों से लगातार चल रही तेज हवा है।
मौसम विभाग के अधिकारियों की मानें तो लोगों को 21 नवंबर तक प्रदूषण से राहत मिलेगी। इसके बाद फिर कोहरा और स्मॉग बढ़ने के आसार हैं। रविवार को एक्यूआई शनिवार के मुकाबले और नीचे आया। एक्यूआई 231 दर्ज किया गया। मौसम विभाग के अधिकारियों का कहना है कि एक्यूआई दो दिनों तक इसी स्तर बना रहेगा।
इसके बाद फिर से बढ़ने की आशंका है। कई दिनों बाद सूर्य देव भी प्रदूषण कम होने के बाद आसमान में चमके। छठ पर्व के समापन आतिशबाजी होगी और एक बार फिर प्रदूषण का असर देखने को मिलेगा। अभी चिकित्सक लोगों को इस मौसम में प्रदूषण से बचने की सलाह दे रहे हैं।
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कौन सा प्रदूषण कितना नुकसान पहुंचाता है
पीएम 10 : यह दस माइक्रोमीटर साइज तक के कण हैं। जब इनका स्तर अधिक हो जाता है तो इनकी वजह से लोगों को एलर्जी, सिरदर्द, सांस लेने में परेशानी, अस्थमा, आंखों में जलन, सूजन जैसी समस्याएं होती हैं। आमतौर पर सांस के साथ नाक इन्हें अंदर जाने से रोक लेती है।
पीएम 2.5 : 2.5 माइक्रोमीटर साइज तक के यह कण सांस के साथ शरीर में चले जाते हैं और अंगों को प्रभावित करते हैं। इससे जकड़न, चक्कर आना, थकावट, चिड़चिड़ापन जैसी समस्या भी हो सकती है। इससे बच्चों का विकास प्रभावित होता है।
एसओ 2 : हवा में सल्फर डाईऑक्साइड का स्तर बढ़ने से फेफड़ों का फंक्शन प्रभावित हो सकता है। आंखों में जलने और लाली के साथ कफ म्यूकस होने का खतरा रहता है। अस्थमा का खतरा भी बढ़ जाता है।
एनओ 2 : यह गाड़ियों और औद्योगिक इकाइयों के धुएं से निकलता है। इसकी वजह से व्यक्ति के दिल पर असर होता है। बच्चों के फेफड़े कम काम करने लगते हैं, सांस संबंधित समस्या होती है।
एनएच 3 : आम बोलचाल में इसे अमोनिया कहा जाता है। इसका स्तर हवा में बढ़ने से व्यक्ति को आंखों व गले में जलन का अहसास होता है। गले के अंदरूनी हिस्से में सूजन की समस्या हो सकती है। सांस की नली में सूजन आ सकती है।
ओजोन : ओजोन का स्तर बढ़ने से कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं। इनमें छाती का दर्द, कफ, गले में खराश, छाती में जकड़न जैसी समस्या शामिल हैं।
सीओ : हवा में इस जहरीली गैस का स्तर बढ़ने से व्यक्ति को सिरदर्द, बेहोशी, कमजोरी, पेट से जुड़ी समस्या, उल्टी, छाती दर्द और भ्रम की समस्या भी हो सकती है।
-डॉ. मनीष शर्मा, निदेशक, ब्रह्मशक्ति संजीवनी अस्पताल बहादुरगढ़।
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बहादुरगढ़। दो दिनों से प्रदूषण का स्तर लगातार कम हो रहा है। ऐसे में शहरवासियों को साफ हवा में सांस मिल रही है। हालांकि अभी ज्यादा राहत नहीं है, लेकिन प्रदूषण कम होने के बाद से लोगों को हल्की राहत जरूर मिल रही है। प्रदूषण के कम होने का सबसे बड़ा कारण दो दिनों से लगातार चल रही तेज हवा है।
मौसम विभाग के अधिकारियों की मानें तो लोगों को 21 नवंबर तक प्रदूषण से राहत मिलेगी। इसके बाद फिर कोहरा और स्मॉग बढ़ने के आसार हैं। रविवार को एक्यूआई शनिवार के मुकाबले और नीचे आया। एक्यूआई 231 दर्ज किया गया। मौसम विभाग के अधिकारियों का कहना है कि एक्यूआई दो दिनों तक इसी स्तर बना रहेगा।
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इसके बाद फिर से बढ़ने की आशंका है। कई दिनों बाद सूर्य देव भी प्रदूषण कम होने के बाद आसमान में चमके। छठ पर्व के समापन आतिशबाजी होगी और एक बार फिर प्रदूषण का असर देखने को मिलेगा। अभी चिकित्सक लोगों को इस मौसम में प्रदूषण से बचने की सलाह दे रहे हैं।
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कौन सा प्रदूषण कितना नुकसान पहुंचाता है
पीएम 10 : यह दस माइक्रोमीटर साइज तक के कण हैं। जब इनका स्तर अधिक हो जाता है तो इनकी वजह से लोगों को एलर्जी, सिरदर्द, सांस लेने में परेशानी, अस्थमा, आंखों में जलन, सूजन जैसी समस्याएं होती हैं। आमतौर पर सांस के साथ नाक इन्हें अंदर जाने से रोक लेती है।
पीएम 2.5 : 2.5 माइक्रोमीटर साइज तक के यह कण सांस के साथ शरीर में चले जाते हैं और अंगों को प्रभावित करते हैं। इससे जकड़न, चक्कर आना, थकावट, चिड़चिड़ापन जैसी समस्या भी हो सकती है। इससे बच्चों का विकास प्रभावित होता है।
एसओ 2 : हवा में सल्फर डाईऑक्साइड का स्तर बढ़ने से फेफड़ों का फंक्शन प्रभावित हो सकता है। आंखों में जलने और लाली के साथ कफ म्यूकस होने का खतरा रहता है। अस्थमा का खतरा भी बढ़ जाता है।
एनओ 2 : यह गाड़ियों और औद्योगिक इकाइयों के धुएं से निकलता है। इसकी वजह से व्यक्ति के दिल पर असर होता है। बच्चों के फेफड़े कम काम करने लगते हैं, सांस संबंधित समस्या होती है।
एनएच 3 : आम बोलचाल में इसे अमोनिया कहा जाता है। इसका स्तर हवा में बढ़ने से व्यक्ति को आंखों व गले में जलन का अहसास होता है। गले के अंदरूनी हिस्से में सूजन की समस्या हो सकती है। सांस की नली में सूजन आ सकती है।
ओजोन : ओजोन का स्तर बढ़ने से कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं। इनमें छाती का दर्द, कफ, गले में खराश, छाती में जकड़न जैसी समस्या शामिल हैं।
सीओ : हवा में इस जहरीली गैस का स्तर बढ़ने से व्यक्ति को सिरदर्द, बेहोशी, कमजोरी, पेट से जुड़ी समस्या, उल्टी, छाती दर्द और भ्रम की समस्या भी हो सकती है।
-डॉ. मनीष शर्मा, निदेशक, ब्रह्मशक्ति संजीवनी अस्पताल बहादुरगढ़।