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Jhajjar-Bahadurgarh News: मोमोज, चाऊमीन, बर्गर खाने से करें परहेज
Thu, 20 Nov 2025 01:52 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
Updated Thu, 20 Nov 2025 01:52 AM IST
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-फोटो 55 : अस्पताल में इलाज के लिए पहुंचे लोग। संवाद
- फोटो : reasi news
बहादुरगढ़। यदि आपके बच्चे हफ्ते में तीन-चार दिन मोमोज, चाऊमीन, बर्गर, तली-भुनी चीजें खाते हैं और शौच अनियमित है, शारीरिक व्यायाम नहीं करते हैं तो सजग हो जाएं। यही हाल रहा तो उन्हें आगे चलकर बवासीर की दिक्कत हो सकती है।
नागरिक अस्पताल के चिकित्सक बताते हैं कि 12 से 17 साल तक के पांच फीसदी में परेशानी मिलने लगी है। हालांकि समय रहते दवा और खानपान में सुधार से यह ठीक हो जाते हैं। नागरिक अस्पताल के फिजिशयन डॉ. सुंदरम ने बताया कि 15 साल पहले तक 12 से 18 साल तक के कुछ लोगों को ही बवासीर की शिकायत होती थी। अब इनकी संख्या करीब पांच फीसदी है।
पूछताछ में पता चला है कि ये लोग सप्ताह में तीन-चार दिन फास्ट फूड और बाजार का तला भोजन खाते हैं। शारीरिक गतिविधियां कम करते हैं। डॉ. सुंदरम का कहना है कि पौष्टिक भोजन और खेलकूद अधिक करने से इसे नियंत्रित किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि देर तक बैठकर कार्य करने, नॉनवेज खाने, तंबाकू-शराब के कारण भी बवासीर तेजी से बढ़ रहा है। मोमोज में कई तरह के केमिकल का प्रयोग किया जाता है। इसे खाने से शरीर का संतुलन बिगड़ रहा है और बीमारियां घेर रही हैं।
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इंसेट
मैदा पहुंचाता है अग्नाश्य को नुकसान
मोमोज के ऊपर की लेयर मैदे से बनाई जाती है। जो अनाज का रेशेदार चोकर हटाने के बाद बचा हुआ स्टार्च वाला हिस्सा होता है। इस स्टार्च वाले हिस्से में कुछ ब्लीच वाले केमिकल मिलाए जाते हैं। दावा है कि मैदा में एलोक्सन होता है। यह केमिकल मैदा को काफी समय तक नरम बनाए रखता है। मैदा में मिलाए जाने वाले ब्लीच केमिकल अग्नाश्य को नुकसान पहुंचाते हैं। एलोक्सन केमिकल अग्नाश्य के लिए हानिकारक होता है और यह न केवल बवासीर बल्कि डायबिटीज के लिए जिम्मेदार हो सकता है।
इइंसेट
तीखी चटनी है खतरनाक
लाल मिर्च को स्वास्थ्य के लिए काफी फायदेमंद माना जाता है लेकिन मिर्च में प्रोसेसिंग के जरिए कुछ मिलाया गया न हो तब। मामोज बेचने वाले लोग मिर्च की क्वालिटी की चिंता नहीं करते हैं, वे मार्केट से सस्ती या लोकल मिर्च पाउडर खरीदकर उसकी चटनी बनाते हैं, ऐसी चटनी खाने से बवासी होने का खतरा बना रहता है।
इंसेट
इनका रखें ख्याल
-मैदे से बनीं सामग्री, तेज मसाले वाले और तले हुए भोजन करने से बचें।
-दाल, चपाती, हरी तरकारी खाएं, रोजाना 250 ग्राम से अधिक सलाद खाएं।
-शीतल पेय, पैकेट बंद भोजन, फास्ट फूड खाने की लत न लगाएं।
-फोटो 55 : अस्पताल में इलाज के लिए पहुंचे लोग। संवाद
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नागरिक अस्पताल के चिकित्सक बताते हैं कि 12 से 17 साल तक के पांच फीसदी में परेशानी मिलने लगी है। हालांकि समय रहते दवा और खानपान में सुधार से यह ठीक हो जाते हैं। नागरिक अस्पताल के फिजिशयन डॉ. सुंदरम ने बताया कि 15 साल पहले तक 12 से 18 साल तक के कुछ लोगों को ही बवासीर की शिकायत होती थी। अब इनकी संख्या करीब पांच फीसदी है।
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पूछताछ में पता चला है कि ये लोग सप्ताह में तीन-चार दिन फास्ट फूड और बाजार का तला भोजन खाते हैं। शारीरिक गतिविधियां कम करते हैं। डॉ. सुंदरम का कहना है कि पौष्टिक भोजन और खेलकूद अधिक करने से इसे नियंत्रित किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि देर तक बैठकर कार्य करने, नॉनवेज खाने, तंबाकू-शराब के कारण भी बवासीर तेजी से बढ़ रहा है। मोमोज में कई तरह के केमिकल का प्रयोग किया जाता है। इसे खाने से शरीर का संतुलन बिगड़ रहा है और बीमारियां घेर रही हैं।
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मैदा पहुंचाता है अग्नाश्य को नुकसान
मोमोज के ऊपर की लेयर मैदे से बनाई जाती है। जो अनाज का रेशेदार चोकर हटाने के बाद बचा हुआ स्टार्च वाला हिस्सा होता है। इस स्टार्च वाले हिस्से में कुछ ब्लीच वाले केमिकल मिलाए जाते हैं। दावा है कि मैदा में एलोक्सन होता है। यह केमिकल मैदा को काफी समय तक नरम बनाए रखता है। मैदा में मिलाए जाने वाले ब्लीच केमिकल अग्नाश्य को नुकसान पहुंचाते हैं। एलोक्सन केमिकल अग्नाश्य के लिए हानिकारक होता है और यह न केवल बवासीर बल्कि डायबिटीज के लिए जिम्मेदार हो सकता है।
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तीखी चटनी है खतरनाक
लाल मिर्च को स्वास्थ्य के लिए काफी फायदेमंद माना जाता है लेकिन मिर्च में प्रोसेसिंग के जरिए कुछ मिलाया गया न हो तब। मामोज बेचने वाले लोग मिर्च की क्वालिटी की चिंता नहीं करते हैं, वे मार्केट से सस्ती या लोकल मिर्च पाउडर खरीदकर उसकी चटनी बनाते हैं, ऐसी चटनी खाने से बवासी होने का खतरा बना रहता है।
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इनका रखें ख्याल
-मैदे से बनीं सामग्री, तेज मसाले वाले और तले हुए भोजन करने से बचें।
-दाल, चपाती, हरी तरकारी खाएं, रोजाना 250 ग्राम से अधिक सलाद खाएं।
-शीतल पेय, पैकेट बंद भोजन, फास्ट फूड खाने की लत न लगाएं।
-फोटो 55 : अस्पताल में इलाज के लिए पहुंचे लोग। संवाद