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Jhajjar-Bahadurgarh News: ओलंपियन साक्षी मलिक के गांव में सुविधाओं को तरसे खिलाड़ी
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51 - अनिल, खिलाड़ी
अभिषेक कीरत
रोहतक। देश को ओलंपिक में पहला पदक दिलाने वाली महिला पहलवान साक्षी मलिक के गांव मोखरा में नए खिलाड़ियों को प्रतिभा निखारने के लिए बेहतर सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने गांव में साक्षी के नाम पर स्टेडियम बनाने की घोषणा की थी। इसका निर्माण कार्य बजट के अभाव में अब तक अधूरा पड़ा है।
यहां रोजाना एथलेटिक्स, कबड्डी और वालीबॉल की तैयारी के लिए लगभग 250 खिलाड़ी आते हैं। इनके लिए पेयजल व शौचालय तक की सुविधा नहीं है। गांव की महिलाएं दो किलोमीटर दूर से खिलाड़ियों के लिए पानी लाती हैं। संवाद
ग्रामीण बोले-साक्षी मलिक के पदक जीतने के बाद सोचा था कि कुछ होगा
स्टेडियम का निर्माण पांच साल पहले अधूरा छोड़ दिया। स्टेडियम बन जाए तो बच्चे गांव से तैयारी कर नेशनल लेवल पर नाम रोशन कर पाएंगे। सरकार को इस तरफ ध्यान देना चाहिए। -साहब सिंह, ग्रामीण
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पोता-पोता तैयारी करने आते हैं। हर गेम खिला रहे हैं। बच्चों को पानी देेने के लिए भी दो किलोमीटर से आना पड़ता है। साक्षी मलिक के पदक जीतने के बाद सोचा था कि कुछ होगा लेकिन कुछ नहीं हुआ। - बीरमति, ग्रामीण
पड़ोस के बच्चे तैयारी करते हैं। उनके लिए पानी की सुविधा नहीं है। इसलिए करीब एक किलोमीटर से पानी लेकर आते हैं ताकि प्रदेश का नाम रोशन कर सकें। - निर्मला, ग्रामीण
भर्ती की तैयारी के लिए दौड़ लगाते हैं। बारिश आने के बाद ग्राउंड गीला हो जाता है तो रोड पर भागना पड़ता है। बाउंंड्री करके काम छोड़ दिया है। -राहुल, ग्रामीण
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खिलाड़ी बोले-स्टेडियम और कोच मिल जाए तो नाम रोशन कर देंगे
वालीबॉल की तैयारी करते हैं। दौड़ भी लगाते हैं। गांव में स्टेडियम व कोच की सुविधा हो जाए तो कहीं न कहीं नाम रोशन करने की चाह है। तैयारी के लिए बाहर जाना पड़ता है। - हर्ष, खिलाड़ी
कुश्ती की तैयारी के लिए मदीना गांव में आठ किलोमीटर दूर जाना पड़ता है। पापा छोड़ने व लेने जाते हैं। कई बार दिक्कत भी आती है। अगर यहां सुविधा हो जाए तो समय बचेगा व ज्यादा प्रैक्टिस कर पाएंगे। - दिवेक, खिलाड़ी
वालीबॉल की तैयारी करता हूं। बारिश के बाद दो दिन तक खेला ही नहीं जाता। रात को खेलने के लिए लाइट भी नहीं। कोच व निर्माण की व्यवस्था हो जाए तो कहीं बड़े स्तर पर कुछ करना चाहता हूं। - अमन, खिलाड़ी
निर्माण कई सालों से अधूरा है। पीने के पानी, शौचालय व कोच की कोई सुविधा नहीं है। सरकार को इस तरफ ध्यान देना चाहिए।
- विकास मलिक, खिलाड़ी
दौड़ की तैयारी करती हूं। पीने के पानी की बोतल लानी पड़ती है। कच्चे ट्रैक पर कई बार गिर भी जाते हैं। - श्रुति, खिलाड़ी
यहां 60 वालीबॉल खिलाड़ी तैयारी कर रहे हैं। कोच की सुविधा हो जाए तो खिलाड़ी बड़े स्तर पर प्रदेश का नाम रोशन कर सकते हैं। स्टेडियम निर्माण कार्य करीब पांच साल से अधूरा है। साफ-सफाई भी ग्रामीण खुद कराते हैं। -अनिल, खिलाड़ी
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कोच बोले-बच्चों को फ्री में पहलवानी सिखा रहे
बच्चों को फ्री में पहलवान की तैयारी कराते हैं। अगर स्टेडियम बन जाए व कोच की सुविधा हो तो गांव से बड़े लेवल पर खिलाड़ी प्रदेश का नाम रोशन कर सकते हैं। कच्चे अखाड़ों में ही प्रैक्टिस करा रहे हैं। - माड़िया, वरिष्ठ पहलवान व कोच
गांव के 50 खिलाड़ी एथलेटिक्स की तैयारी के लिए आते हैं। इसके अलावा हरियाणा पुलिस, सेना व अन्य भर्ती की दौड़ की तैयारी करते हैं। करीब पांच साल पहले इसे अधूरा छोड़ दिया गया। अब यहां झाड़ियां उगी हैं। ग्रामीणों ने अपने खर्च पर सफाई कराकर मैदान को खेलने योग्य बनाया है। गांव से ओलंपिक खिलाड़ी निकलने के बाद भी बच्चों को सुविधा नहीं मिल पा रही है। प्रशासन को इस तरफ ध्यान देना चाहिए। -जगजीत, कोच।
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वर्जन
तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने स्टेडियम की घोषणा की थी। बजट के अभाव के कारण काम अटका है। 61 प्रतिशत कार्य हो चुका है। बजट के लिए डिमांड दोबारा भेज रखी है। -अनूप कुमार, जिला खेल अधिकारी
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रोहतक। देश को ओलंपिक में पहला पदक दिलाने वाली महिला पहलवान साक्षी मलिक के गांव मोखरा में नए खिलाड़ियों को प्रतिभा निखारने के लिए बेहतर सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने गांव में साक्षी के नाम पर स्टेडियम बनाने की घोषणा की थी। इसका निर्माण कार्य बजट के अभाव में अब तक अधूरा पड़ा है।
यहां रोजाना एथलेटिक्स, कबड्डी और वालीबॉल की तैयारी के लिए लगभग 250 खिलाड़ी आते हैं। इनके लिए पेयजल व शौचालय तक की सुविधा नहीं है। गांव की महिलाएं दो किलोमीटर दूर से खिलाड़ियों के लिए पानी लाती हैं। संवाद
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ग्रामीण बोले-साक्षी मलिक के पदक जीतने के बाद सोचा था कि कुछ होगा
स्टेडियम का निर्माण पांच साल पहले अधूरा छोड़ दिया। स्टेडियम बन जाए तो बच्चे गांव से तैयारी कर नेशनल लेवल पर नाम रोशन कर पाएंगे। सरकार को इस तरफ ध्यान देना चाहिए। -साहब सिंह, ग्रामीण
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पोता-पोता तैयारी करने आते हैं। हर गेम खिला रहे हैं। बच्चों को पानी देेने के लिए भी दो किलोमीटर से आना पड़ता है। साक्षी मलिक के पदक जीतने के बाद सोचा था कि कुछ होगा लेकिन कुछ नहीं हुआ। - बीरमति, ग्रामीण
पड़ोस के बच्चे तैयारी करते हैं। उनके लिए पानी की सुविधा नहीं है। इसलिए करीब एक किलोमीटर से पानी लेकर आते हैं ताकि प्रदेश का नाम रोशन कर सकें। - निर्मला, ग्रामीण
भर्ती की तैयारी के लिए दौड़ लगाते हैं। बारिश आने के बाद ग्राउंड गीला हो जाता है तो रोड पर भागना पड़ता है। बाउंंड्री करके काम छोड़ दिया है। -राहुल, ग्रामीण
खिलाड़ी बोले-स्टेडियम और कोच मिल जाए तो नाम रोशन कर देंगे
वालीबॉल की तैयारी करते हैं। दौड़ भी लगाते हैं। गांव में स्टेडियम व कोच की सुविधा हो जाए तो कहीं न कहीं नाम रोशन करने की चाह है। तैयारी के लिए बाहर जाना पड़ता है। - हर्ष, खिलाड़ी
कुश्ती की तैयारी के लिए मदीना गांव में आठ किलोमीटर दूर जाना पड़ता है। पापा छोड़ने व लेने जाते हैं। कई बार दिक्कत भी आती है। अगर यहां सुविधा हो जाए तो समय बचेगा व ज्यादा प्रैक्टिस कर पाएंगे। - दिवेक, खिलाड़ी
वालीबॉल की तैयारी करता हूं। बारिश के बाद दो दिन तक खेला ही नहीं जाता। रात को खेलने के लिए लाइट भी नहीं। कोच व निर्माण की व्यवस्था हो जाए तो कहीं बड़े स्तर पर कुछ करना चाहता हूं। - अमन, खिलाड़ी
निर्माण कई सालों से अधूरा है। पीने के पानी, शौचालय व कोच की कोई सुविधा नहीं है। सरकार को इस तरफ ध्यान देना चाहिए।
- विकास मलिक, खिलाड़ी
दौड़ की तैयारी करती हूं। पीने के पानी की बोतल लानी पड़ती है। कच्चे ट्रैक पर कई बार गिर भी जाते हैं। - श्रुति, खिलाड़ी
यहां 60 वालीबॉल खिलाड़ी तैयारी कर रहे हैं। कोच की सुविधा हो जाए तो खिलाड़ी बड़े स्तर पर प्रदेश का नाम रोशन कर सकते हैं। स्टेडियम निर्माण कार्य करीब पांच साल से अधूरा है। साफ-सफाई भी ग्रामीण खुद कराते हैं। -अनिल, खिलाड़ी
कोच बोले-बच्चों को फ्री में पहलवानी सिखा रहे
बच्चों को फ्री में पहलवान की तैयारी कराते हैं। अगर स्टेडियम बन जाए व कोच की सुविधा हो तो गांव से बड़े लेवल पर खिलाड़ी प्रदेश का नाम रोशन कर सकते हैं। कच्चे अखाड़ों में ही प्रैक्टिस करा रहे हैं। - माड़िया, वरिष्ठ पहलवान व कोच
गांव के 50 खिलाड़ी एथलेटिक्स की तैयारी के लिए आते हैं। इसके अलावा हरियाणा पुलिस, सेना व अन्य भर्ती की दौड़ की तैयारी करते हैं। करीब पांच साल पहले इसे अधूरा छोड़ दिया गया। अब यहां झाड़ियां उगी हैं। ग्रामीणों ने अपने खर्च पर सफाई कराकर मैदान को खेलने योग्य बनाया है। गांव से ओलंपिक खिलाड़ी निकलने के बाद भी बच्चों को सुविधा नहीं मिल पा रही है। प्रशासन को इस तरफ ध्यान देना चाहिए। -जगजीत, कोच।
वर्जन
तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने स्टेडियम की घोषणा की थी। बजट के अभाव के कारण काम अटका है। 61 प्रतिशत कार्य हो चुका है। बजट के लिए डिमांड दोबारा भेज रखी है। -अनूप कुमार, जिला खेल अधिकारी

51 - अनिल, खिलाड़ी

51 - अनिल, खिलाड़ी

51 - अनिल, खिलाड़ी

51 - अनिल, खिलाड़ी

51 - अनिल, खिलाड़ी

51 - अनिल, खिलाड़ी

51 - अनिल, खिलाड़ी

51 - अनिल, खिलाड़ी

51 - अनिल, खिलाड़ी

51 - अनिल, खिलाड़ी

51 - अनिल, खिलाड़ी

51 - अनिल, खिलाड़ी