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Jhajjar-Bahadurgarh News: मस्तक पर तिलक लगाना आत्मिक स्मृति का प्रतीक
Sun, 04 Aug 2024 04:44 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
Updated Sun, 04 Aug 2024 04:44 AM IST
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बहादुरगढ़। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की जसौर खेड़ी ब्रह्माकुमारी पाठशाला में रक्षाबंधन के मौके पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर सेक्टर-2 सेवा केंद्र से ब्रह्माकुमारी लक्ष्मी ने शिरकत की। उन्होंने रक्षाबंधन का आध्यात्मिक अर्थ स्पष्ट किया।
ब्रह्माकुमारी लक्ष्मी ने रक्षाबंधन के महत्व का महत्व बताया। उन्होंने कहा कि मस्तक पर तिलक लगाना आत्मिक स्मृति का प्रतीक है, जो हमें आत्मा के स्वरूप की याद दिलाता है। कलाई पर मौली बांधना विकारों से रक्षा सूत्र का प्रतीक है, जिसे स्वयं परमात्मा निराकार शिव भगवान इस समय हमें बांधते हैं। मुख मीठा करना अर्थात सदा मुख से मीठे वचन बोलना है, जो हमारे विचारों और शब्दों की शुद्धता को दर्शाता है। कार्यक्रम में उपस्थित महिलाओं ने निराकार शिव भगवान को साक्षी मानकर यह प्रतिज्ञा ली कि वे सदा जीवन में मन, वचन और कर्म से पवित्र रहकर सबको सुख देंगी। परमात्मा समृद्धि का प्रतीक रक्षा का सूत्र सभी ने अपनी कलाई पर बंधवाकर श्रेष्ठ एवं गौरवांवित महसूस किया। उन्होंने स्वयं से वायदा किया कि वे सदा सबके प्रति एक समान दृष्टि रखेंगे और सबको आत्मिक दृष्टि से देखेंगे। इस मौके पर सुरेंद्र, संदीप, होशियारी, पूनम, बिमला आदि प्रमुख रूप से उपस्थित रहे। यह पर्व सभी के लिए आत्मिक जागरूकता और शुद्धता का संदेश लेकर आया। ब्रह्माकुमारी पाठशाला के इस आयोजन ने सभी को आध्यात्मिक शक्ति और प्रेरणा प्रदान की, जिससे वे अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकें। रक्षाबंधन के इस पावन अवसर पर ब्रह्माकुमारी परिवार ने एकता, प्रेम, और शांति का संदेश फैलाया, जो सभी के लिए एक नई दिशा और ऊर्जा का स्रोत बना।
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ब्रह्माकुमारी लक्ष्मी ने रक्षाबंधन के महत्व का महत्व बताया। उन्होंने कहा कि मस्तक पर तिलक लगाना आत्मिक स्मृति का प्रतीक है, जो हमें आत्मा के स्वरूप की याद दिलाता है। कलाई पर मौली बांधना विकारों से रक्षा सूत्र का प्रतीक है, जिसे स्वयं परमात्मा निराकार शिव भगवान इस समय हमें बांधते हैं। मुख मीठा करना अर्थात सदा मुख से मीठे वचन बोलना है, जो हमारे विचारों और शब्दों की शुद्धता को दर्शाता है। कार्यक्रम में उपस्थित महिलाओं ने निराकार शिव भगवान को साक्षी मानकर यह प्रतिज्ञा ली कि वे सदा जीवन में मन, वचन और कर्म से पवित्र रहकर सबको सुख देंगी। परमात्मा समृद्धि का प्रतीक रक्षा का सूत्र सभी ने अपनी कलाई पर बंधवाकर श्रेष्ठ एवं गौरवांवित महसूस किया। उन्होंने स्वयं से वायदा किया कि वे सदा सबके प्रति एक समान दृष्टि रखेंगे और सबको आत्मिक दृष्टि से देखेंगे। इस मौके पर सुरेंद्र, संदीप, होशियारी, पूनम, बिमला आदि प्रमुख रूप से उपस्थित रहे। यह पर्व सभी के लिए आत्मिक जागरूकता और शुद्धता का संदेश लेकर आया। ब्रह्माकुमारी पाठशाला के इस आयोजन ने सभी को आध्यात्मिक शक्ति और प्रेरणा प्रदान की, जिससे वे अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकें। रक्षाबंधन के इस पावन अवसर पर ब्रह्माकुमारी परिवार ने एकता, प्रेम, और शांति का संदेश फैलाया, जो सभी के लिए एक नई दिशा और ऊर्जा का स्रोत बना।
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