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नाम का ही मातृ-शिशु अस्पताल, धरातल पर सामान्य सुविधाएं तक नहीं, गर्भवती महिलाओं को अब भी जाना पड़ रहा तीन किलोमीटर दूर मुख्य अस्

Mon, 09 Jul 2018 06:09 PM IST
Updated Mon, 09 Jul 2018 06:09 PM IST
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नाम का ही मातृ-शिशु अस्पताल, धरातल पर सामान्य सुविधाएं तक नहीं, गर्भवती महिलाओं को अब भी जाना पड़ रहा तीन किलोमीटर दूर मुख्य अस्
अमर उजाला ब्यूरो
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चरखी दादरी।
सरदार झाडू सिंह चौक के समीप करीब एक साल पहले शुरू किए गए मातृ-शिशु अस्पताल में सुविधाएं न के बराबर हैं। सरकार के निर्देशों पर स्वास्थ्य विभाग ने पुराने अस्पताल का नाम बदलकर मातृ-शिशु अस्पताल तो कर दिया। लेकिन अब भी गर्भवती महिलाओं को बेहतर उपचार के लिए तीन किलोमीटर दूर शहीद उद्यम सिंह सिविल अस्पताल जाना पड़ रहा है। मातृ-शिशु अस्पताल 30 बेड का प्रस्तावित है। लेकिन अब तक यहां वार्ड की व्यवस्था तक नहीं है। यहां तक की स्टाफ सदस्यों के लोिए पानी और शौचालय तक का प्रबंध नहीं किया जा सका है।
जिला अस्पताल में भी इस समय महज सामान्य डिलीवरी ही कराई जाती हैं, जबकि थोड़ी-सी विकट स्थिति में महिला मरीज को भिवानी सिविल अस्पताल या पीजीआई रोहतक रेफर कर दिया जाता है। इस समय मातृ-शिशु अस्पताल में नॉर्म्स के मुताबिक 10 प्रतिशत सेवाएं भी शुरू नहीं हो पाई है। सिविल अस्पताल में एक माह में औसतन 45 डिलीवरी केस आते हैं। जिले में मातृ-शिशु केंद्र सही तरीके से वर्किंग में न होने से काफी परेशानी हो रही है। मौजूदा नए सामान्य अस्पताल में महिला प्रसूति विशेषज्ञ न होने और सभी प्रकार की सुविधाएं न होने की वजह से महिला डिलीवरी को लेकर समय-समय पर दिक्कत बनी रहती है। निजी अस्पतालों में डिलीवरी के नाम पर मोटी फीस वसूली जा रही है जो आम आदमी के दायरे से बाहर है।
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एक साल में ये हुए प्रयास
पूर्व राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह के समय बने शहर के पुराने सिविल अस्पताल भवन में मातृ-शिशु अस्पताल सुचारु रूप से शुरू करने की योजना ठंडे बस्ते में पड़ी है। सीएमओ ने डिप्टी सीएमओ, पीडब्ल्यूडी विभाग के कार्यकारी अभियंता व नगर परिषद अधिकारियों की एक कमेटी का गठन भी किया था। इस कमेटी ने गत 14 मार्च को मातृ-शिशु अस्पताल परिसर का दौरा किया था। लेकिन करीब साढ़े तीन माह बाद भी इसकी रिपोर्ट तैयार नहीं हो सकी है। इस कमेटी रिपोर्ट के आधार पर भवन निर्माण संबंधी नया निर्णय लिया जाना है। गत 10 अप्रैल को स्वास्थ्य विभाग के निदेशक सूरजभान कंबोज ने भी यहां का निरीक्षण किया था इस दौरान मीडिया से रूबरू होते हुए उन्होंने जल्द यहां ऑपरेशन थिएटर शुरू करने सहित स्टाफ की कमी को पूरा करने का आश्वासन दिया था। लेकिन अब तक हालात जस के तस है।
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ये मिलनी थी सुविधाएं
गत वर्ष सरकार ने नगर के सरदार झाडू सिंह चौक के समीप पुराने सिविल अस्पताल भवन में जच्चा-बच्चा केंद्र को मंजूरी दे दी थी लेकिन एक वर्ष से ज्यादा समय बीत जाने पर भी इस पर काम आगे नहीं बढ़ सका है। जच्चा-बच्चा केंद्र में बच्चों व महिलाओं के इलाज के लिए सभी प्रकार की सुविधाएं उपलब्ध करवाई जानी हैं। जिसमें ऑपरेशन थिएटर, शिशु-नर्सरी, महिला वार्ड, अल्ट्रासाउंड मशीन, एक्सरे मशीन, बायल एप्रेटस मशीन व जांच लैब आदि की सुविधाएं मिलनी थी। इस समय यहां महज ओपीडी की सुविधा के साथ-साथ गर्भवती महिलाओं के सामान्य चैकअप की सुविधा ही है।
44 पोस्ट स्वीकृत, दस ही तैनात
30 बेड के मातृ-शिशु अस्पताल में एसएमओ सहित 44 पद स्वीकृत हैं, लेकिन तैनाती 10 की ही की गई है। यहां आठ चिकित्सकों सृजित हो चुके हैं, जबकि नियुक्ति एक की ही है। इसके अलावा आठ स्टाफ नर्सों के पद स्वीकृत हैं, जबकि तैनाती दो की ही है। नर्सिंग सिस्टर का एक पद, पीएचएनसी का एक, एलटी के दो, एंबुलेंस चालक व फार्मासिस्ट के दो पद यहां खाली पड़ हैं। इसके अलावा अकाउंटेंट, लैब तकनीशियन, पैथालॉजिस्ट, रेडियोग्राफर सहित चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के पद भी सृजित हो चुके हैं।

बोलीं महिलाएं
मातृ-शिशु अस्पताल में बेहतर सुविधाएं मुहैया करवाए सरकार
मातृ-शिशु अस्पताल में महिलाओं को अगर सभी सुविधाएं मिलेंगी तो उन्हें निजी अस्पतालों में जाकर जेब ढीली नहीं करनी पड़ेगी। कागजों में तो यह अस्पताल है लेकिन सुविधाओं का अभाव है।
- कृष्णा धवन, शिक्षिका एवं सामाजिक कार्यकर्ता

जिले के अनुरूप चिकित्सा सेवाएं यहां मुहैया नहीं है। सरकार भी इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रही। मातृ-शिशु अस्पताल का सही से वर्किंग में होना जरूरी है और सरकार को जल्द यहां तमाम अव्यवस्थाओं को दूर करना चाहिए।
- सुमन, कन्हेटी, सामाजिक कार्यकर्ता।

मातृ-शिशु अस्पताल में तो सभी सुविधाएं होनी चाहिए। अब तक दादरी का मातृ-शिशु अस्पताल सही से वर्किंग में नहीं आ सका है। यहां सुविधाएं हो तो सिविल अस्पताल या दूसरे शहरों में जाने की जरूरत न पड़े।

- पूनम कुमारी, शिक्षिका एवं सामाजिक कार्यकर्ता

वर्जन::
हम जिला की स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर करने के लिए निरंतर प्रयासरत्त हैं। सरकार को इस संबंध में डिमांड भेजी गई है। जल्द ही मातृ-शिशु अस्पताल में तमाम व्यवस्थाएं कर दी जाएंगी।
- डा. जितेंद्र कादियान, सीएमओ।
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